उत्तर प्रदेश विभिन्न कारणों से सुर्खियों में रहता है। वर्तमान समय में राज्यसभा चुनाव को लेकर सुर्खियों में है। उत्तर प्रदेश में 11 राज्यसभा सीटों के लिए चुनाव होने हैं 4 जुलाई को यह सीट खाली हो रही है। इन 11 सीटों में वर्तमान समय में 5 भाजपा, 3 सपा , 2 बसपा और 1 कांग्रेस के पास है। 24 मई से राज्यसभा चुनाव के लिए नामांकन शुरू हो गया है। 10 जून को शाम 5:00 बजे नतीजे आएंगे । इस बार कई ऐसे नाम हैं जो चौंकाने वाले हैं। समाजवादी पार्टी के कोटे से तीन व्यक्ति राज्यसभा जा सकते हैं। लगभग लगभग तीनों नाम फाइनल हो चुके हैं, जिनमें से 2 नाम चौंकाने वाले हैं पहला कपिल सिब्बल का और दूसरा डिंपल यादव। माना जा रहा था कि अखिलेश यादव के इस्तीफा देने के बाद आजमगढ़ से डिंपल यादव को उपचुनाव लड़ा जा सकता है। लेकिन 2019 में कन्नौज से डिंपल यादव लोकसभा का चुनाव हार गई थी जिसके बाद अखिलेश यादव कब रिस्क नहीं लेना चाहते और इसीलिए डायरेक्ट उच्च सदन भेज रहे हैं। आइए थोड़ा इन नामों के बारे में जान लेते हैं।

 

1-डिंपल यादव: डिंपल यादव के बारे में तो आप जानते ही होंगे, नेता प्रतिपक्ष,समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव की पत्नी है। लोकसभा सदस्य रह चुकी हैं अब राज्यसभा जाने की तैयारी है। 2019 में कन्नौज लोकसभा सीट से एक अपनी किस्मत आजमाई थी लेकिन हार गई थी। माना जा रहा था कि आजमगढ़ से डिंपल यादव को उपचुनाव में उतारा जा सकता है आजमगढ़ के लोकल उम्मीदवारों की मांग को देखते हो अखिलेश यादव ने शायद यह फैसला लिया होगा कि डिंपल यादव को लोकसभा नहीं सीधे राज्यसभा भेजा जाए। विधानसभा चुनाव के दौरान भी यह हलचल थी कि डिंपल यादव विधानसभा का चुनाव भी लड़ सकती है लेकिन ऐसा हुआ नहीं। ऐसे तमाम अटकलों पर उस समय पानी फिर गया लेकिन अब इस बात पर मुहर लग चुकी है कि डिंपल यादव राज्यसभा जा रही हैं। दरअसल राज्यसभा में अखिलेश यादव अपने परिवार का प्रतिनिधित्व चाहते हैं इसीलिए डिंपल यादव को राज्यसभा भेज रहे हैं।

 

2-कपिल सिब्बल : कपिल सिब्बल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता थे। सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील हैं। 2004 से लेकर 2014 तक कांग्रेस सरकार में केंद्रीय मंत्री रह चुके हैं। अब सवाल है कि कपिल सिब्बल अगर कांग्रेस के नेता है तो समाजवादी पार्टी के कोटे से राज्यसभा क्यों जा रहे हैं। तो इसका जवाब कपिल सिब्बल ने खुद ही दे दिया कपिल सिब्बल ने बताया कि उन्होंने 16 मई को ही कांग्रेस से इस्तीफा दे दिया है। आपको बता दे कि कपिल सिब्बल और कांग्रेस पार्टी के बीच इन दिनों कुछ ठीक नहीं चल रहा था। कपिल सिब्बल लगातार कांग्रेस पार्टी के नेतृत्व को लेकर सवाल उठा रहे थे। कपिल सिब्बल कई बर गाहे बगाहे राहुल गांधी की आलोचना करते हुए नजर आए है। दूसरा कारण यह भी है कि वर्तमान समय में उत्तर प्रदेश में कांग्रेस पार्टी के सिर्फ दो विधायक हैं यानी कांग्रेस पार्टी किसी को भी राज्यसभा भेजने में सक्षम नहीं है। तो ऐसे में कपिल सिब्बल के पास समाजवादी पार्टी एक बढ़िया विकल्प है। एक तीसरा कारण भी है जो इन दिनों खूब सुर्खियों में है वह है कपिल सिब्बल और आजम खान के बीच का संबंध। दरअसल इस समय आजम खान अपने शीर्ष नेतृत्व से नाराज चल रहे हैं। ऐसी कई सांकेतिक खबर भी सामने आए जिससे इस बात की पुष्टि होती है। कपिल सिब्बल आजम खान को जेल से निकालने में एक वकील के नाते अहम भूमिका निभाए है। माना जा रहा है कि समाजवादी पार्टी उन्हें उपहार के रूप में राज्यसभा सीट दे रही है। जिसे आजम खान खुश हो सके।

 

3-जावेद अली खान: यह तीसरा नाम संभावित था विधानसभा चुनाव के बाद से ही यह माना जा रहा था कि जावेद अली खान को समाजवादी पार्टी राज्यसभा भेज सकती हैं। खान समाजवादी पार्टी के संरक्षक मुलायम सिंह यादव के साथ-साथ प्रो. रामगोपाल यादव के भी करीबी हैं। विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी को मुसलमानों का जमकर साथ मिला था जिसके बाद से 3 सीटों में 1 सीट मुस्लिम को देना लाजमी था। संभल से आने वाले जावेद अली खान सपा के पुराने नेता है। पूर्व में 2014 से लेकर 2020 तक राज्यसभा के सदस्य रह चुके हैं।2019 में माना जा रहा था कि जावेद अली खान को समाजवादी पार्टी संभल से लोकसभा के टिकट पर उतारेगी लेकिन ऐसा हुआ नहीं। पार्टी इन्हें 2007 में ठाकुरद्वार विधानसभा सीट से प्रत्याशी बना चुकी हैं। 2005 में मुबारकबाद जिला के जिलाअध्यक्ष भी रह चुके हैं। सबसे खास बात यह है कि खान जामिया मिलिया इस्लामिया छात्र संघ के महासचिव भी रह चुके हैं।

 

इस फार्मूलें के आधार पर होता है राज्यसभा का चुनाव

यूपी में विधानसभा की कुल 403 सीटें हैं, विधान परिषद की 100 और राज्यसभा के 31 सीटें है। इन 31 सीटों में 11 सीटें खाली हो रही है। राज्यसभा सदस्यों का निर्वाचन विधानसभा के सदस्यों के द्वारा होता है। राज्यसभा का चुनाव अप्रत्यक्ष तरीके से होता है। राज्यसभा चुनाव के लिए फार्मूला है कि (कुल खाली सीटों की संख्या+1)।इसके योग से विधानसभा के कुल सीटों की संख्या को भाग देना होगा। और उसके बाद जो योग है उसमें एक जोड़ दिया जाता है। उसके बाद जो संख्या निकल कर आती है उतने विधायकों की संख्या एक राज्यसभा सीट के लिए चाहिए होती है। चलिए उत्तर प्रदेश के उदाहरण से समझते हैं उत्तर प्रदेश में राज्यसभा की कुल 11 सीटें खाली होने वाली है अभी 11 में 1 जोड़ने पर कुल संख्या आएगी 12(11+1=12)। उत्तर प्रदेश में कुल विधानसभा सीटों की संख्या है 403 अब 403 को 12 से विभाजित करने पर संख्या आएगी 33.58।अब इसमें एक जोड़ देते हैं अब कुल संख्या हो जाएगी 34.58 यानी कि उत्तर प्रदेश में 1 राज्य सभा सीट के लिए 35 विधायकों की आवश्यकता पड़ेगी।

 

UP के लिहाज से राज्यसभा चुनाव का गुड़ा गणित

उत्तर प्रदेश में राज्यसभा की एक सीट के लिए से 35 विधायकों की आवश्यकता है।संख्या बल के हिसाब से यह तो तय है कि बीजेपी कोटे से 7और समाजवादी पार्टी कोटे से 3 व्यक्ति राज्यसभा जा सकते हैं। लड़ाई कुल मिलाकर 11वीं सीट के लिए होगी। विधानसभा में भाजपा गठबंधन के पास 273 तो वहीं सपा गठबंधन के पास कुल 125 विधायक है। राजा भैया की पार्टी जनसत्ता दल लोकतांत्रिक के पास 2 कांग्रेस पार्टी के पास 2 और बसपा के पास 1 विधायक है। विधानसभा चुनाव के दौरान ही राजा भैया और अखिलेश यादव के बीच तल्खी देखने को मिली थी जिसके बाद यह साफ हो गया था कि राजा भैया अखिलेश यादव का साथ नहीं देगे।11वीं सीट के लिए राजा भैया अपने 2 सीटों का समर्थन भारतीय जनता पार्टी को दे सकते हैं। वहीं कांग्रेस पार्टी अपने एक विधायक का समर्थन सपा को दे सकते हैं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि बहुजन समाजवादी पार्टी किसी को समर्थन नहीं देगी।

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