” ब्रह्मास्त्र: पार्ट वन शिवा ” एक तरह से देखा जाए तो सनातन संस्कृतियों और परंपराओं से भागती युवा पीढ़ी को वापस उनकी धुरी की तरफ लाने की अच्छी कोशिश है ।

ब्रह्मास्त्र फ़िल्म

ब्रह्मास्त्र फ़िल्म में टाइटल का महत्व

हिंदू धर्म की पौराणिक गाथाओं में ब्रह्मास्त्र वह अस्त्र है , जो चलाए जाने के बाद कभी चूकता नहीं है । फिल्म में त्रेता युग की महागाथा कहती रामचरित मानस का जिक्र भी मिलता है । फिर द्वापर में हुए महाभारत के युद्ध में भी इसका प्रयोग हुआ है । यह एक ऐसा अस्त्र है जो अचूक है । इसका प्रयोग बार बार हो सकता है । और जब भी इसका प्रयोग होता है तो यह खाली नहीं लौटता । कुछ खुद इसके सामने नतमस्तक होकर पाश में बंध जाते है और कुछ को निशाने से हटाकर इसकी दिशा भी बदल दी जाती है ।

ब्रह्मास्त्र फ़िल्म में अमिताभ बच्चन और मौनी रॉय का बेहतरीन इस्तेमाल किया गया है

ब्रह्मास्त्र: पार्ट वन शिवा ” एक तरह से देखा जाए तो सनातन संस्कृतियों और परंपराओं से भागती युवा पीढ़ी को वापस उनकी धुरी की तरफ लाने की अच्छी कोशिश है ।  फिल्म की उत्सवधर्मिता का अपना एक अलग रंग है । दशहरा से दीवाली के बीच के रंगों, प्रकाशों और उत्साहों की झलक फिल्म में दिखती है ।

फिल्म अपना एक अलग संसार भी मौजूदा संसार के बीच से धीरे धीरे रचने की कोशिश करती है । कहानी दिल्ली से वाराणसी से होती हुई हिमाचल प्रदेश जाती है और इस दौरान कार पर हुए एक हमले की पूरी सीक्वेंस काफी रोमांचकारी है । फिल्म में अमिताभ बच्चन का इस्तेमाल उनके आभामंडल के लिए क्या गया है, जबकि मौनी रॉय अपने षडयंत्रों और हिंसक इरादों में असर छोड़ने में सफल रहती है ।

ब्रह्मास्त्र फिल्म

ब्रह्मास्त्र फ़िल्म की कमजोर है कड़ियां

” ब्रह्मास्त्र: पार्ट वन शिवा ” की कमजोर कड़ियां इसके संवाद के अलावा इसका संपादन भी है । फिल्म के शुरुआती हिस्से में रणबीर कपूर और उसके दोस्तों के बीच होने वाली बातचीत बहुत मुंबइया है । ऐसी हिंदी अब हिंदी भाषी दर्शकों को भी अच्छी नहीं लगती । फिल्म में शिवा की पृष्ठभूमि से फिल्म का भविष्य तय किया गया है लेकिन ईशा कौन है, उसका पृष्ठभूमि क्या है, इसके बारे में बस इतना पता चलता है कि वह अमीर है और उसका अमीर होना बनावटी नहीं है ।

फिल्म का बैकग्राउंड स्कोर अच्छा है लेकिन फिल्म का गीत संगीत फिल्म के कथ्य के हिसाब से काफी कमजोर है । फिल्म ” ब्रह्मास्त्र: पार्ट वन शिवा ” उन दर्शकों को खास पसंद आ सकती है जो मार्वल सिनेमैटिक यूनिवर्स जैसा कुछ हिंदी में देखने की ख्वाहिश अरसे से लिए रहे है । गड़बड़ियां इस फिल्म की वही है जो इन दिनों एमसीयू की फिल्मों में भी खूब दोहराई जा रही है ।

 

ब्रह्मास्त्र फ़िल्म की इंटरवल के बाद सुस्त है कहानी 

एक फिल्म करते करते प्यार कर बैठे रणबीर कपूर और आलिया भट्ट को पहली बार परदे पर देखना असल जिंदगी के प्रेमियों को तो खूब भाने ही वाला है । फिल्म शाहरुख खान के प्रशंसकों के भी दिल को छू जाती है । अपनी दूरबीन से तारे निहारते वैज्ञानिक मोहन के घर में ब्रह्मास्त्र के पहले हिस्से की खोज में हुए हमले का पूरा सीक्वेंस दर्शकों को बांधकर रखता है । वानरास्त्र से नंदीअस्त्र तक आने की यात्रा में गति भी है और रोमांच भी ।

” ब्रह्मास्त्र: पार्ट वन शिवा ” धीमी पड़नी वहां से शुरू होती है जहां कहानी में एक ऐसा आश्रम आता है जिसके बाहर भी ” आश्रम ” लिखा है । ऐसी गलतियां फिल्म में ढेर सारी है जिसमें दर्शकों को कुछ स्पष्ट सी बातें या तो नेपथ्य में चलती आवाज या फिर परदे पर कुछ न कुछ दिखाकर बताने की कोशिश की जाती हैं, जिसकी फिल्म में जरूरत है नहीं । सिनेमा में बहुत बताना भी बहुत अच्छा नहीं होता ।

ब्रह्मास्त्र फ़िल्म

मार्वल स्टूडियोज का सिनेमा कहें या हैरी पॉटर सीरीज व लॉर्ड ऑफ द रिंग्स सीरीज की फिल्में, इन सबके असर से बीते दो ढाई दशक में जवान हुई दर्शकों की ऐसी पूरी एक पीढ़ी तैयार हो चुकी है । जिसने दादी, नानी से सुनी अपनी देसी कहानियों को ऐसे ही भव्य तरीके से परदे पर दिखाए जाने की हिंदी फिल्म निर्माताओं से आस लगा रखी है । ताज्जुब की बात यह है कि फिल्में बनाने की तकनीक के इतना उन्नत होने के बाद भी किसी हिंदी फिल्मकार का ध्यान अब तक इस तरफ गया ही नहीं ।

भारतीय दंतकथाओं में पौराणिक गाथाओं की तमाम कहानियां मुख्य कहानियों की क्षेपक कथाओं के रूप में आती है । ऐसी ही एक क्षेपक कथा सरीखी अयान मुखर्जी की 11 साल पहले सोची गई फिल्म ” ब्रह्मास्त्र ” तीन हिस्सों में बनना प्रस्तावित है । इस कहानी का पहला हिस्सा अयान ने फिल्म ” ब्रह्मास्त्र: पार्ट वन शिवा ” के रूप में बनाया है । इसकी अगली कड़ी फिल्म ” ब्रह्मास्त्र: पार्ट टू देवा ” की घोषणा भी फिल्म के क्लाइमेक्स में की है और जिस मोड़ पर आकर ये कहानी रुकती है, वहां इसके दूसरे भाग को देखने की दिलचस्पी दर्शकों में बनी रहती है ।

” ब्रह्मास्त्र ” की उत्सुकता अमेरिका में भी

” ब्रह्मास्त्र: पार्ट वन शिवा ” में अमेरिका के लॉस एंजेलिस शहर के पास वाल्ट डिज्नी के बसाए पहले डिज्नीलैंड के कस्बे के रूप में मशहूर शहर अनाहाइम में देखी । अनाहाइम में दुनिया भर के पर्यटकों को मेला लगना शुरू हो चुका है । शुक्रवार से यहां डी23 एक्सपो शुरू होने वाला है । हर दो साल पर होने वाले इस जलसे में हजारों की तादाद में पर्यटक आते है । और, इस साल इसकी खासियत ये भी है कि इसी के साथ डिज्नी की स्थापना के 100 वे साल की शुरुआत हो रही है ।

” ब्रह्मास्त्र: पार्ट वन शिवा ” भी डिज्नी की शाखा स्टार स्टूडियोज की ही फिल्म है । यह संयोग भी निराला ही है । डिज्नी की अंतर्राष्ट्रीय रिलीज की लिस्ट में शामिल रही ” ब्रह्मास्त्र: पार्ट वन शिवा ” को अमेरिका में देखना एक अलग एहसास इसलिए भी रहा क्योंकि यहां के सिनेमाघर में हिंदी सिनेमा के कुछ शौकीनों से भी मिलना हो गया ।

ब्रह्मास्त्र फ़िल्म देखना चाहिए या नहीं  ?

ब्रह्मास्त्र फिल्म में शिवा के रूप में रणबीर कपूर ने ठीक काम किया है । उन्होंने कोशिश की है कि ओवर ऐक्टिंग न करें । उसमें वो काफ़ी हद तक क़ामयाब भी रहे है । ईशा के रोल में आलिया कहीं-कहीं पर ओवरऐक्टिंग का शिकार हो गई है । गुरुजी के रोल में अमिताभ ने बढ़िया काम किया है । उनकी आवाज़ इस फ़िल्म की जान है । शाहरुख भी जितनी देर स्क्रीन पर रहते हैं, बांधे रखते है । नागार्जुन ने भी ठीक काम किया है । मोनी रॉय ने बेहतरीन काम किया है । उनको जुनून के रोल के बाद और फ़िल्में मिलेंगी ।

ब्रह्मास्त्र में फ़िल्म लिखाई के मामले में कमजोर है । टेक्निकल पार्ट मजबूत है । आपको फ़िल्म ज़रूर जाकर देखना चाहिए । ये थिएटर एक्सपीरियंस वाली मूवी है । जाकर देख सकते है ।

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