मंकीपॉक्स : परिचय-

मंकीपॉक्स मानव चेचक के समान एक दुर्लभ वायरल संक्रमण है । यह पहली बार साल 1958 में शोध के लिए रखे गए बंदरों में पाया गया था ।मंकीपॉक्स से संक्रमण का पहला मामला 1970 में दर्ज किया गया था । यह रोग मुख्य रूप से मध्य और पश्चिम अफ्रीका के उष्णकटिबंधीय वर्षावन क्षेत्रों में होता है और कभी-कभी अन्य क्षेत्रों में पहुंच जाता है ।

 

मंकीपॉक्स के सामान्य लक्षण 

 

  1. विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के अनुसार, मंकीपॉक्स आमतौर पर बुखार, दाने और गांठ के जरिये उभरता है और इससे कई प्रकार की चिकित्सा जटिलताएं पैदा हो सकती है ।
  2. इस रोग के लक्षण आमतौर पर दो से चार सप्ताह तक दिखते हैं, जो अपने आप दूर होते चले जाते है । मामले गंभीर भी हो सकते है । हाल के समय में, मृत्यु दर का अनुपात लगभग 3-6 प्रतिशत रहा है, लेकिन यह 10 प्रतिशत तक हो सकता है । हालांकि संक्रमण के वर्तमान प्रसार के दौरान मौत का कोई मामला सामने नहीं आया है ।मंकीपॉक्स का लक्षण-
  3. मंकीपॉक्स जैसी बीमारी का लक्षण है – बार-बार तेज बुखार आना । पीठ और मांसपेशियों में दर्द । त्वचा पर दानें और चकते पड़ना। खुजली की समस्या होना । शरीर में सामान्य रूप से सुस्ती आना । इस वायरस की शुरुआत चेहरे से होती है ।
  4. संक्रमण आमतौर पर 14 से 21 दिन तक रहता है । चेहरे से लेकर बाजुओं, पैरों और शरीर के अन्य हिस्सों पर रैशेस होना । गला खराब होना और बार-बार खांसी आना।ध्यान दें! कैसे फैलता है संक्रमण- मंकीपाक्स एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में फैलता है । ऐसे में लोगों को शारीरिक संपर्क से बचाव रखना चाहिए ।
  5. संक्रमित व्यक्ति या किसी व्यक्ति में पंकीपाक्स के लक्षण हैं, तो उसे तुरंत डाक्टर से संपर्क करना चाहिए । संक्रमित व्यक्ति को इलाज पूरा होने तक खुद को आइसोलेट रखना चाहिए । मंकीपाक्स वायरस त्वचा, आंख, नाक या मुंह के माध्यम से शरीर में प्रवेश करता है । यह संक्रमित जानवर के काटने से, या उसके खून, शरीर के तरल पदार्थ, या फर को छूने से भी हो सकता है ।

मंकीपॉक्स के लक्षण

 

मंकी पॉक्स होने पर इन चीजों का सेवन न करे

मंकीपॉक्स से संक्रमित हो जाने के बाद या अन्य किसी भी संक्रमण से ग्रसित हैं तो चाय, कॉफी व सोडा जैसी ड्रिंक्स का सेवन बिल्कुल न करना चाहिए । इस तरह की इंस्टेंट एनर्जी देने वाली ड्रिंक्स संक्रमित मरीजों के लिए नुकसानदायक होती है ।

 

मंकीपॉक्स के मरीजों का ऐसा होना चाहिए डाइट

  • किसी भी संक्रमण या बीमारी से जल्द ठीक होने के लिए हेल्दी और पौष्टिक आहार को अपनी डाइट में शामिल करना चाहिए । ऐसे में अगर कोई मरीज मंकीपॉक्स से संक्रमित है तो उसे प्रोटीन, विटामिन, खनिज और एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर चीजों का सेवन करना चाहिए ।
  • यह बीमारी संक्रमण से फैलती है, इसलिए संतुलित आहार के साथ ही खानपान में स्वच्छता का भी खास ध्यान रखना चाहिए ।
  • मंकीपॉक्स के मरीजों को पर्याप्त मात्रा में पानी पीना चाहिए । शरीर को हाइड्रेट रखने के लिए अधिक पेय पदार्थों का सेवन करना चाहिए ।

मंकीपॉक्स से जुड़ी बातें

 

मंकीपॉक्स, बीमारी का नाम सुनते ही लगता है कि यह बीमारी बंदरों से फैलती होगी, लेकिन ऐसा नहीं है । इस महामारी के इस साल जो केस आएं है करीब-करीब सभी केस एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में ही फैले है । स्टडी में सबसे अजीब बात ये सामने आई है कि मंकीपॉक्स के 99% तक मामले गे या फिर बाइसेक्शुअल लोगों में आए है‌ ।

 

बाइसेक्शुअल लोगों में मंकीपॉक्स के 99% मामले

आईएमए कोविड टास्क फोर्स के को-चेयरमैन डॉ राजीव जयदेवन से बातचीत में पाया गया है कि मंकीपॉक्स महामारी गे या फिर बाइसेक्शुअल लोगों में ज्यादा फैल रही है । इसके पीछे वजह है- एक व्यक्ति के मल्टिपल सेक्स पार्टनर्स होना । उनका मानना है कि इस समुदाय के लोगों को फिलहाल मल्टिपल सेक्स पार्टनर्स बनाने से बचना चाहिए ।

 

आंकड़ों में सामने आई वज़ह 

 

आंकड़ों के मुताबिक ये साबित हुआ है कि मंकीपॉक्स के ज्यादातर केस गे या बाइसेक्शुअल कम्यूनिटी में ही हुए है । अमेरिका में मंकीपॉक्स के 99% केस इसी समुदाय से जुड़े हुए है । जैसे मेन हैविंग सेक्स विद मैन की कैटेगरी से ही मंकीपॉक्स के ज्यादातर मामले जुड़े है‌ । यह बीमारी जब आम परिवार के किसी सदस्य को होती है तो खुद को आइसोलेट करता है । इसमें वो दूसरों से यौन संबंध भी नहीं बनाता । इससे वायरस का प्रसार बंद हो जाता है ।

मंकीपॉक्स की जांच है आवश्यक

त्वचा का संपर्क से फ़ैल रही है मंकीपॉक्स

आम लोगों को समझना होगा कि गे या बाइसेक्सुअल में ही यह वायरस क्यों ज्यादा फैल रहा है । मंकीपॉक्स एक धीरे फैलने वाली बीमारी है, ये आसानी से नहीं फैलती है । इसको फैलने के लिए स्किन टु स्किन कॉन्टैक्ट होना चाहिए । त्वचा का संपर्क भी लंबे वक्त के लिए होना चाहिए ।

 

दुनियाभर से 25 हजार से ज्यादा केस आ चुके है मंकीपॉक्स के

दो व्यक्तियों की त्वचा का लंबे वक्त का संपर्क सेक्स के दौरान सबसे ज्यादा होता है । यह गे और बाइसेक्शुअल समुदाय में आम बात है । दुनियाभर में 25 हजार से ज्यादा केस आ चुके हैं, भारत में अभी तक सिर्फ 9 केस ही आए है , लेकिन ये भारत में भी ऐसे कई मामले हो सकते है , जिनका पता नहीं चल सका हो ।

 

विश्व स्वास्थ्य संगठन ने दी सलाह 

 

विश्व स्वास्थ्य संगठन भी बताया है कि गे और बाइसेक्शुअल लोगों को अपने पार्टनर्स को सीमित करना चाहिए । अगर किसी व्यक्ति की स्किन पर दाग या दाने है तो उससे फिजिकल संबंध तब तक ना बनाएं जब तक कि वो स्वस्थ ना हो जाए । स्ट्रेट लोगों में इसका रिस्क बहुत कम है । मंकीपॉक्स के कुछ मरीज डॉक्टर के पास आने से हिचकते है । कुछ लोग घर में ही इलाज करने की कोशिश करते है‌ । अगर आपको चेचक जैसे दाने दिख रहे हैं तो डॉक्टर को दिखाएं, हल्के में ना ले । भारत में मंकीपॉक्स के लिए पीसीआर टेस्ट उपलब्ध है ।

 

मंकीपॉक्स से बचाव के कुछ महत्वपूर्ण उपाय

 

  1. मंकीपॉक्स के मामले भले ही फिलहाल कम है लेकिन मंकीपॉक्स कोरोना की तरह की फैल रहा है । इसलिए मंकीपॉक्स के प्रसार को रोकने के लिए लापरवाही बिल्कुल न करें ।
  2. किसी भी व्यक्ति में मंकीपॉक्स जैसे लक्षण दिखें तो तुरंत चिकित्सक को दिखाएं।
  3. मंकी पॉक्स से बचाव के लिए चेचक का टीका जरूर लगवाएं ।
  4. जो लोग इन्फेक्टेड देशों से लौट रहे हैं, उनके संपर्क में आने से बचना चाहिए ।
  5. साफ सफाई का ख्याल रखें । संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने पर साबुन से हाथ धोएं ।
  6. सैनिटाइजर का उपयोग अवश्य रूप से करें ।
  7. अगर संक्रमित के संपर्क में आने वाले किसी शख्स में मंकीपॉक्स होने का खतरा हो, तो उसकी जानकारी दें ।

 

 

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