अभिनेत्री शिल्पा शेट्टी की फिल्म ” निकम्मा ” अपने शीर्षक के तरफ ही निक्कमा साबित हुई । 17 जून को रिलीज हूई अभिनेत्री शिल्पा शेट्टी की फिल्म का भी इस हफ्ते की शुरुआत के साथ के ही लोग बेसब्री से शुक्रवार को इंतजार कर रहे थे । हालांकि अभिमन्यु दसानी-शिल्पा शेट्टी अभिनीत यह फिल्म निक्कमा इतनी उलझी हुई है कि इसे 80 के दशक में भी पूरी तरह से खारिज कर दिया गया होता ।

 

अभिमन्यु दस्सानी, शिल्पा शेट्टी और शर्ली सेतिया स्टारर फिल्म निक्कमा की तो यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर कुछ खास कमाल कर पाई है । शिल्पा शेट्टी की इस फिल्म से कमबैक करने के कोशिश एक बार फिर नाकाम होती दिख रही है । अपनी रिलीज के पहले ही दिन लाखों में कमाई करने वाली इस फिल्म ने तीसरे दिन भी कुछ खास कारोबार नहीं किया है । फिल्म ने अपने तीसरे दिन महज 44 लाख की कमाई की । इसके साथ ही अब इस फिल्म का कुल कलेक्शन 1.41 करोड़ हो गया है । लेकिन शिल्पा शेट्टी की ये फिल्म अपने नाम के मुताबिक बिल्कुल खरी उतरती है । इससे पहले शिल्पा शेट्टी ने इतनी बेकार फिल्म कभी नहीं की होगी‌ ।  ऐसा लगता है कि निर्माताओं को पहले से ही पता था कि इस फिल्म का रिजल्ट कैसा होने वाला है और इसीलिए फिल्म का नाम ” निकम्मा ” भी अपनी सोच के मुताबिक रखा था ।

 

बाक्स ऑफिस पर बुरी तरह से पिटी शिल्पा शेट्टी की फिल्म –

लोग बेसब्री से शुक्रवार को बॉक्स ऑफिस पर रिलीज होने वाली फिल्मों का इंंतजार करते है । फिल्मों में से कई लोगों को बेहद पसंद आती तो वहीं कई फिल्मों को सिरे से नकार दिया जाता है । किसी भी फिल्म को मिल रही प्रतिक्रिया का अंदाज उसके कलेक्शन से लगाया जाता है । बीते दिनों सिनेमाघरों में हिंदी से लेकर साउथ सिनेमा तक की कई फिल्में रिलीज की गई है । ऐसा नहीं है कि हम हर दिन ही एक ऐसी फिल्म देखते है , जो अपने नाम के मुताबिक खरी उतरती है लेकिन शिल्पा शेट्टी की ये फिल्म अपने नाम के मुताबिक बिल्कुल खरी उतरती है । इससे पहले शिल्पा शेट्टी ने इतनी बेकार फिल्म कभी नहीं की होगी‌ । फिल्म में कहीं से भी आपको ये नजर नहीं आएगा कि फिल्म ने आपका दिल जीता हो । ऐसा लगता है कि निर्माताओं को पहले से ही पता था कि इस फिल्म का रिजल्ट कैसा होने वाला है और इसीलिए फिल्म का नाम ” निकम्मा ” भी अपनी सोच के मुताबिक रखा था । इस फिल्म में शिल्पा शेट्टी और अभिमन्यु दसानी मुख्य भूमिका में है‌ । शर्ली सेतिया भी इस फिल्म का हिस्सा हैं लेकिन आप शायद ही उन्हें नोटिस करेंगे. इस फिल्म को साबिर खान ने डायरेक्ट किया है । लेकिन अगर आप सोच रहे है कि ये फिल्म आपको देखनी है तो हम आपको सलाह ये देंगे कि सिर दर्द की गोली जरूर ले लें ताकि आप खुद को जल्द इससे बाहर निकाल पाएं । बता दें कि अभिनेत्री शिल्पा शेट्टी इससे पहले ” हंगामा 2 ” में नजर आ चुकी है‌ । लेकिन इस फिल्म में भी उनकी एक्टिंग और दो लोगों के बीच की उम्र का फासला भी कुछ जमा नहीं था । इस फिल्म में देवर-भाभी का रिश्ता कमाल भी कर जाता लेकिन अगर इस एंगल को ढंग से डेवलप किया गया होता है । इस फिल्म से लोग किसी भी तरह से कनेक्ट ही नहीं कर पा रहे है । अभिमन्यु दसानी एक हीरो के तौर पर खुद पर ही भरोसा नहीं कर पा रहे है । हां, वो केवल भाग्यश्री के बेटे होने की वजह से फिल्में पा रहे है और इसमें कोई संदेह भी नहीं है । उनके चेहरे के भाव फिल्म में तकरीबन जगह एक जैसे ही लगते है ।

 

कहानी को दर्शकों तक पहुंचाने में नाकाम रहे लेखक-

फिल्म के पहले 20 मिनट में केवल ये बताने की कोशिश की गई है कि निकम्मा अभिमन्यु जो फिल्म में आदि की भूमिका निभा रहे हैं, वो कैसा है ? वैसे इतनी मेहनत की जरूरत नहीं थी । आप बस फिल्म के खत्म होने का इंतजार कर सकते थे‌ । अफसोस की बात ये है कि आदि की बोरिंग लाइफ इस फिल्म का सबसे दुखद हिस्सा है । इस फिल्म की पटकथा बेहद ही कमजोर है । फिल्म का फोकस केवल देवर और भाभी का रिश्ता है । इस रिश्ते पर आधारित हम पहले कई बेहतरीन फिल्में जैसे ” नदिया के पार ” या ” हम साथ-साथ हैं ” देख चुके है । फिल्म में दिखाया गया है कि यहां देवर के जीवन का अपना कोई उद्देश्य ही नहीं है‌ । भाभी परिवहन विभाग में ऑफिसर है लेकिन दोनों की आपस में बनती ही नहीं है । बीच-बीच में फिल्म की कहानी को लव स्टोरी बनाने की कोशिशें की जाती है , लेकिन उसमें भी सफल नहीं हो पाती है ये फिल्म‌ । फिर जरूरत आ जाती है , जब देवर को अपना धर्म निभाना है । उसे भाभी की लक्ष्मण रेखा बनना है. कहानी बुरी नहीं है । यह तेलुगू में सुपरहिट रही है लेकिन इसका हिंदी रूपांतरण इतना खराब है कि ये पूरी तरह से खोखला और बेहद नकली नज़र आता है ।बता दें कि शर्ली सेतिया ने इस फिल्म से अपना डेब्यू करना क्यों चुना, ये समझ से परे है । अभिमन्यु दसानी के पास एक्टिंग जैसी कोई चीज दिखाने लायक बची नहीं है और फिल्म के बाकी कलाकार केवल टाइमपास करते हुए नजर आते है । इस फिल्म के गाने भी फिल्म को कमजोर करने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ते है । ये फिल्म बस आपको हर मायने में बोर करेगी और कुछ नहीं । इस फिल्म को देखना मतलब अपने पैसे और समय दोनों की ही बर्बादी है ।

 

साबिर खान का जादू नहीं चला दर्शकों पर –

साबिर खान ने इससे पहले कई बेहतरीन फिल्में दी है जिनमें ” हीरोपंती ” और ” बागी‌ ” शामिल है । ” बागी ” तेलुगू फिल्म ” वर्षम ” की हिंदी रीमेक थी और ” हीरोपंती ” भी तेलुगू फिल्म ” पारुगु ” की रीमेक रही है‌ । वह रीमेक के मास्टर रहे है, लेकिन इस बार ” निकम्मा ” को लेकर उनका दांव सही जगह नहीं बैठ पाया । यह फ़िल्म दो साल से रिलीज के लिए तैयार थी तो दो साल के बाद ये फिल्म रिलीज हुई लेकिन इसके बावजूद भी इस फिल्म ने कोई खास कमाल नहीं दिखाया जिसकी वो बाट जोह रहे थे । इस फ़िल्म की कहानी से भी छेड़छाड़ उन्होंने ही किया है‌ । अभिमन्यु दसानी को एक एक्शन हीरो बनाने का उनका दांव पूरी तरह से फ्लॉप साबित हुआ है ।

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