अब जब आईपीएल अपने पूरे रोमांचक स्थिति में आ पहुंचा है तब श्रीलंका के खिलाड़ियों के लिए एक दुःख की खबर भी सामने आ गई है। आईपीएल के लगभग 25 मैच खेले जा चुके है, टीमें अपनी पूरी जोर लगा रही है प्लेऑफ में पहुंचने के लिए तब श्रीलंका में हालात ठीक नही चल रहा। वहा पूरा अर्थव्यवस्था डगमगा चुका है। इसी सिलसिले में श्रीलंका के पूर्व क्रिकेटर और मंत्री अर्जुन रणतुंगा ने मंगलवार यानी 12 अप्रैल को इंडियन प्रीमियर लीग में खेल रहे सभी श्रीलंकाई खिलाड़ियों से मौजूदा आर्थिक संकट के दौरान अपने देश के समर्थन में आने और खड़े होने का आग्रह किया है। एक तरफ से देखा जाय तो उनका बयान सही भी है क्योंकि किसी भी खिलाड़ी के लिए उसका देश ही पहली प्राथमिकता होनी चाहिए। आप सब को बताते चले कि श्रीलंका भोजन और ईंधन की कमी के साथ एक गंभीर आर्थिक संकट से जूझ रहा है जिससे श्रीलंका में बड़ी संख्या में लोग प्रभावित हो रहे हैं। COVID-19 महामारी की शुरुआत के बाद से श्रीलंका की अर्थव्यवस्था गिरावट में है। वैसे तो पूरी दुनिया कोविड से जूझ रही है लेकिन श्रीलंका की स्थिति कुछ ज्यादा ही खराब हो चुका है। तभी तो पूर्व कप्तान ने अपने खिलाड़ियों से वापस देश आने के लिए आग्रह किया है। तो दूसरी तरफ श्रीलंका के पीएम महिंदा राजपक्षे के हालिया संबोधन पर पूर्व श्रीलंकाई क्रिकेट कप्तान ए रणतुंगा ने कहा कि, “उन्होंने कभी यह नहीं बताया कि लोग किस दौर से गुजर रहे हैं। वह युवा पीढ़ी से सहानुभूति पाने की कोशिश कर रहे थे। उन्हें पिछले 2 वर्षों में जो हुआ उसका विश्लेषण करना चाहिए और सॉरी कहना चाहिए और एक उचित बदलाव करना चाहिए।” ये बयान सुन कर इतना तो तय हो गया है की श्रीलंका में सब कुछ अच्छा नही चल रहा। एएनआई न्यूज एजेंसी के हवाले से पूर्व श्रीलंकाई कप्तान ए रणतुंगा ने कहा कि, “वो वास्तव में ये नहीं जानते लेकिन कुछ क्रिकेटर ऐसे हैं जो आईपीएल में शानदार खेल रहे हैं और उन्होंने अपने देश के बारे में बात नहीं की है। दुर्भाग्य से, लोग सरकार के खिलाफ बोलने से डरते हैं। ये क्रिकेटर क्रिकेट बोर्ड के लिए भी काम कर रहे हैं। वे अपनी नौकरियों या फिर अपनी टीम में जगह की रक्षा करने की कोशिश कर रहे हैं। लेकिन अब उन्हें एक कदम उठना होगा क्योंकि कुछ युवा क्रिकेटरों ने अपने करियर की बिना परवाह किए आगे आकर प्रोटेस्ट के समर्थन में बयान दिए हैं।” कोरोना के वजह से श्रीलंका को विदेशी मुद्रा में भी कमी का सामना करना पड़ रहा है, जो श्रीलंका के लिए अच्छा नहीं है। इतना ही नहीं उसी के वजह से खाद्य और ईंधन आयात करने की उसकी क्षमता भी पूरी तरह से प्रभावित हुई है। जैसा की सबको पता है पर्यटन को प्रभावित करने वाले COVID-19 महामारी की शुरुआत के बाद से अर्थव्यवस्था हर देश की गिरावट में ही है चाहे वो कितना बड़ा देश ही क्यों न हो। आवश्यक वस्तुओं की कमी ने श्रीलंका को पड़ोसी देशों से मदद लेने के लिए मजबूर किया है। इस आर्थिक स्थिति ने प्रधान मंत्री महिंदा राजपक्षे और राष्ट्रपति गोटबाया राजपक्षे के इस्तीफे की मांगों के साथ भारी विरोध प्रदर्शनो को तेज कर दिया है। बाकी देशों की स्थिति भी कुछ ठीक नही है लेकिन श्रीलंका का कुछ ज्यादा ही खराब हो चला है। इसी वजह से कही न कही उन खिलाड़ियों को बुलाने की कोशिश हो रही है जिसके वजह से वहा की सरकार बैकफुट पर आ सके। कोई भी अगर काम करना हो और उसमे वो लोग हिस्सा ले ले जो अपने देश को रिप्रेजेंट करते है तो उसका लोड सरकार ज्यादा लेती है। वही श्रीलंका के पूर्व कप्तान ने करने की कोशिश की है।

 

श्रीलंका ने सभी विदेशी लोन को किया डिफॉल्ट

 

आपको जानकर ताजूब होगा की श्रीलंका के ऊपर 51 अरब डॉलर का भारी भरकम कर्ज है। जिसमें से लगभग 36 फीसदी की हिस्सेदारी चीन की है सिर्फ। श्रीलंका की स्थिति इतनी खराब हो चुकी है की उसने अपने सभी बाहरी कर्ज से डिफॉल्ट करने की घोषणा कर दी है। इसका मतलब है कि श्रीलंका ने आधिकारिक रूप से कर्ज देने से हाथ खड़े कर दिए हैं वो पूरी तरह से असमर्थ है अभी। यही वजह है की ए रणतुंगा चाहते है की उनके खिलाड़ी वापस अपने देश आए और अपने देश की स्थिति पे सरकार से सवाल खड़ा करे। लेकिन अभी तक श्रीलंकाई खिलाड़ियों के तरफ से ऐसा कुछ बयान नहीं आया है जिस से लगे की श्रीलंका के खिलाड़ी वापस अपने देश जा रहे है आईपीएल छोड़ कर। अगर ऐसा होता है की श्रीलंका के खिलाड़ी आईपीएल छोड़ कर अपने देश जाते है तो कही न कही से ये आईपीएल के टीआरपी पे फर्क डालेगा। क्योंकि ढेर से लंकाई खिलाड़ी अलग अलग फ्रेंचाइजी से जुड़े हुए है और अपने अपने टीम के लिए खेल रहे है। अब देखना ये है की ए रणतुंगा के बयान के बाद श्रीलंका बोर्ड और उनके खिलाड़ी क्या निर्णय लेते है।

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