2022 में यूपी विधानसभा चुनाव होने जा रहे है ऐसे में राजनैतिक खींच तान जारी है। इन सब के बीच एक और खबर आ रही की अखिलेश यादव जौनपुर में एक चुनावी कार्यक्रम में जाने से पहले एक टीवी चैनल से बातचीत में सवाल जवाब में कहा की राकेश टिकैत किसानों के नेता है अगर वो चुनाव लड़ना चाहे तो हम उनका स्वागत करेगे।

लेकिन राकेश टिकैत ने स्पष्ट कर दिया है की मैं चुनाव नही लंडूगा और ऐसे में जो लोग भी मेरे पोस्टर्स का उपयोग अपने प्रचार में कर रहे है ये बिलकुल गलत है। दरअसल मिशन 2022 को लेकर मेरठ में भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत की तस्वीरें अखिलेश यादव और जयंत चौधरी के साथ लगाई गई थीं लेकिन रातों-रात राकेश टिकैत के मेरठ पहुंचने से पहले ही वह पोस्टर और बैनर हटा लिए गए।

टिकैत ने कहा अभी चुनाव लड़ने का कोई इरादा नहीं।

इस विवाद के बाद भारतीय राष्ट्रीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने बुधवार को अखिलेश यादव को साफ नसीहत देते हुए कहा की मैं किसानों की आवाज उठाता हूं और मेरा अभी किसी भी राजनैतिक पार्टी को कोई सिपोर्ट नही है। और अखिलेश यादव को नसीहत देते हुए कहा की अपना खेत अपने आप जोते मेरा किसी पार्टी से कोई संबंध नहीं है। टिकैत ने कहा की अगर चुनाव लड़ना भी हुआ तो गांव के लोगो से पूछकर आचार संहिता के बाद बताएंगे।

मीडिया से बातचीत के दौरान क्या कहा अखिलेश यादव ने?

बुधवार को जौनपुर में विजय यात्रा में निकलने से पहले अतिथि गृह में मीडिया में बातचीत के दौरान अखिलेश यादव ने कहा की राकेश टिकैत किसानों के बड़े नेता है, उनका आंदोलन भी राजनीति से दूर रहा, ऐसे में ये फैसला भी उनका अपना है। अखिलेश ने कहा भारत में किसानो को जीप से कुचला गया। किसान अन्न दाता है किसान हमारा पेट भरता है लेकिन आज उसको ही न्याय नही मिल पा रहा। इसका जिम्मेदार कौन है अगर कोई जिम्मेदार है तो वो बीजेपी नेता और साजिशकर्ता केंद्र गृह राज्यमंत्री सरकार को चाहिए कि उसे तुरंत बर्खास्त कर।

बीजेपी पर साधा निशाना।

अखिलेश यादव ने कहा की उत्तर प्रदेश की जनता अब बदलाव चाहती है। इसी लिए जनता से लगातार मिलने के लिए समाजवादी पार्टी की विजय रथ लोगो के बीच जा रही। खबर मिल रही की पेट्रोल और डीजल की कंपनियों को तीन तीन महीने में छह सौ फीसदी का मुनाफा हुआ है आखिर गरीब के जेब से निकलकर अमीर की तिजोरी में क्यों भरा जा रहा है? जितनी भी सरकारी संपतिया है उन्हे बेचा क्यों जा रहा? संविधान की धज्जियां उड़ाई जा रही है। इन सवालों को लेकर सपा, और अंबेडकरवादी सड़कों पर निकले है। यही नहीं अखिलेश यादव ने कहा सरकार जनता को साढ़े चार साल से धोखा दे रही है। उनकी हर बात झूठी है और उनका विज्ञापन भी झूठा है।

अखिलेश यादव ने केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय मिश्र टेनी को लेकर कहा कि अगर सरकार टेनी को जल्द से जल्द उसके पद से हटाकर जेल में डालने का काम नहीं करती है तो यह प्रदेश में बुलडोजर अभियान, माफिया उन्मूलन सब बेईमानी साबित होगा। शायद अखिलेश यादव को यह बात इसलिए ज्यादा चुभ रही है क्योंकि जेल में बंद सबसे ज्यादा अपराधी गुंडे और भूमाफिया समाजवादी पार्टी से जुड़े हुए लोग हैं। अखिलेश यादव का कहना है की सबसे ज्यादा किसानों के साथ अन्याय बीजेपी के सरकार में हुई है, और अपराधियों के हौसले इसी सरकार में बुलंद है। लेकिन हम बताते है आपको सपा सरकार के दौरान हुए दंगे और किस तरह से कानून व्यवस्था की धज्जियां उड़ाई जाती थी।

अखिलेश सरकार के दौरान हुए 9 बड़े दंगे।

आप सुनकर जरूर चौक जायेंगे की समाजवादी पार्टी की सरकार आज इतनी बड़ी बड़ी बाते कर रही है लेकिन जब वो सत्ता में थी तो हालात बत से बत्तर थे। सपा सरकार के कार्यकाल में कुल 134 बार से ज़्यादा सांप्रदायिक हिंसा भड़की जिसमे मुरादाबाद, मेरठ, अयोध्या, बरेली के भी दंगे शामिल है।अगर अखिलेश यादव के कार्यकाल में हुए प्रमुख दंगों की बात करें, तो फेहरिस्‍त बहुत लंबी है, हालांकि हम कुछ दंगों पर स्‍लाइडर में प्रकाश डाल रहे हैं, जो साफ तौर पर सरकार की नाकामी को बयां करते हैं। गृह मंत्रालय की रिपोर्ट के मुताबिक उत्तर प्रदेश में 2012 में सांप्रदायिक हिंसा के 134 मामले दर्ज किए गए। रिपोर्ट के अनुसार इन दंगों में 58 लोगों की मौत हुई और 456 जख्मी हुए। वहीं सीएम का दावा है कि 2012 में मात्र 27 दंगे हुए। अखिलेश के कार्यकाल में अबतक मुजफ्फरनगर, मथुरा, बरेली, अयोध्‍या और गाजियाबाद के दंगे सबसे ज्यादा भड़के।

 बड़े दंगे।

1- 7 सितंबर 2013 को मुजफ्फरनगर में जिस में आगजनी लूटपाट व घर जलाने की वारदातें जिसमें कुल 28 लोग मारे गए थे।

2- 4 सितंबर 2013 को शामली में जिस में दो गुटों में झड़प हुई और आगजनी जिसमे एक दर्जन से ज्यादा लोग घायल हुए थे।

3- 25 अक्टूबर 2012 फैजाबाद में दो गुटों में झड़प हुई जिसके बाद पूरे शहर में कर्फ्यू लगाना पड़ा।

4- 2 अगस्त 2013 को लखनऊ में रमजान के दौरान दो गुटों में झड़प।

5- 14 सितंबर 2012 गाजियाबाद में मुसलमानों और पुलिस के बीच झड़प जिसके बाद हुए दंगे।

6- 7 अगस्त 2009 को प्रतापगढ़ में दो गुटों में झड़प मामला टम्पू का किराया ज्यादा लेने को लेकर।

8- अगस्त 2012 को बरेली में धार्मिक जुलूस के वक्त दो गुटों में झड़प हो जिसके बाद पूरे इलाके में कर्फ्यू लगाना पड़ा था।

9- 30 जून 2012 को प्रतापगढ़ में एक गांव में सांप्रदायिक हिंसा भड़की थी जो कि 10 दिन चली थी जिसमें 4 मुसलमान लड़कों द्वारा 13 साल की हिंदू दलित बच्ची के साथ सामूहिक बलात्कार कर उसकी हत्या कर दी गई थी।

ये थे समाजवादी पार्टी के दौरान हुए कुछ प्रमुख दंगे लेकिन ये लिस्ट बहुत ही लंबी है।

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