वीरेंद्र सहवाग आय दिन कुछ न कुछ बयान आ रहा है, अभी हाल में ही उन्होंने शोएब अख्तर पर बयान देकर शुर्खिया बटोरी थी और अब उन्होंने अपने करियर को बचाने के लिए दो खिलाड़ियों का नाम लिया है, दोनो ही खिलाड़ी भारत के सबसे बेहतरीन स्पिनर रह चुके है। सहवाग अपनी बातों को बेबाकी से रखते है, और उन्होंने वही बेबाकी आज भी दिखाई है। वीरेंद्र सहवाग ने ऑस्ट्रेलिया दौरे को लेकर बहुत बड़ा खुलासा किया है। उन्होंने भारत के टेस्ट टीम के पूर्व कप्तान अनिल कुंबले की भूमिका का खुलासा करते हुए कहा है कि अनिल कुंबले ही थे जिन्होंने उनके कैरियर को वापस से पटरी पर लाया था,और पूरा श्रेय अनिल कुंबले को ही जाता है। उस समय वीरेंद्र सहवाग खराब फॉर्म से जूझ रहे थे और लगभग 50 के औसत होने के बावजूद इस खिलाड़ी को भारतीय टेस्ट टीम से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया था। सहवाग जनवरी 2007 में अपना 52वां टेस्ट खेलने के बाद सहवाग ने 2008 में ऑस्ट्रेलिया में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ अपना 53वां टेस्ट खेला था।

 

 

सहवाग ने एक इंटरव्यू में बातचीत के दौरान ये बताया कि, ‘अचानक, मुझे एहसास हुआ कि मैं टेस्ट टीम से बाहर हो रहा हूं, इससे मुझे दुख हुआ।’ उन्होंने आगे कहा, ‘मैं 10,000 से अधिक टेस्ट रन बनाता, अगर मुझे उस समय बाहर नहीं किया जाता।’ 2007-08 के ऑस्ट्रेलिया दौरे के लिए बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी के लिए जब सहवाग का नाम टेस्ट टीम में नही आया था तब कई लोगो को हैरानी हुई थी। लेकिन, कप्तान अनिल कुंबले जो हमेशा हौसला बढ़ाते थे सहवाग का वो उस समय पहले दो टेस्ट नहीं खेल पाए थे। ये भी सहवाग का निराशा का कारण बना था। पर्थ में तीसरे टेस्ट से पहले टीम ने अभ्यास मैच के लिए कैनबरा की यात्रा की। सहवाग आगे बताते है कि, उन्हे कंबले द्वारा ये कहा गया था की वो इस मैच में 50 रन बनाए और उन्हे निश्चित ही पर्थ में होने वाले टेस्ट मैच के लिए चुना जाएगा। सहवाग ने एसीटी इनविटेशन इलेवन के खिलाफ मैच में लंच से पहले शतक लगा दिया था जो उनके टीम में आने के लिए काफी था। लेकिन जैसा कि वादा किया गया था, सहवाग ने पर्थ में खेले, दोनों पारियों में शीर्ष पर अच्छी शुरुआत दी और दो विकेट लिए। लेकिन यह एडिलेड था जब उन्होंने अपने आगमन की घोषणा की। पहली पारी में 63 रन के बाद एडिलेड में दूसरी पारी में एक अस्वाभाविक लेकिन मैच बचाने वाली 151 रनों की पारी खेल डाली। जो उनका जगह टीम में सुनश्चित कर रहा था। सहवाग ने इंटरव्यू में आगे बातचीत के दौरान कहा कि, ‘वे 60 रन जो उन्होंने बनाया था वो उनके जीवन का सबसे कठिन 60 रन थे। उन्होंने कहा कि वो अनिल भाई के विश्वास पर खड़ा उतरना चाहते थे। वो नहीं चाहते थे कि कोई उन्हें ऑस्ट्रेलिया लाने के लिए अनिल कुंबले से सवाल करे।’ चौथी पारी में जो सहवाग ने बल्लेबाजी की वो वाकई में मास्टरक्लास था। शुरू में ही पार्टनर खोने के बाद भी सहवाग अपने अंदाज में बल्लेबाजी करते रहे और उन्होंने बेहतरीन 151 रन ठोक डाले। सहवाग ने अपने इस बेहतरीन पारी के बारे में बताते हुए कहा कि, ‘मैं स्ट्राइकर के छोर पर टिका हुआ था, दूसरे छोर पर मैंने अपने पसंदीदा गाने गुनगुनाते हुए अंपायर से बात की, जिससे मेरा दबाव खत्म हो गया।’ और मैं रन बनाता चला गया।

 

शोएब अख्तर पर अभी कुछ दिन पहले ही दिया था बयान

 

जैसा की सबको पता ही है की पाकिस्तान के पूर्व खिलाड़ी शोएब अख्तर का विवादो से हमेशा नाता रहा है। कई बार देखा गया है की वीरेंद्र सहवाग और शोएब अख्तर जब कमेंट्री बॉक्स में एक साथ होते थे तब दोनो एक दूसरे पर गजब का कटाक्ष करते थे। जैसा की सब जानते है कि शोएब अख्तर को उनके रफ्तार के वजह से रावलपिंडी एक्सप्रेस के नाम से जाना जाता था। लेकिन वीरेंद्र सहवाग ने रावलपिंडी एक्सप्रेस के लिए जो बयान दिया है उस से अख्तर के प्रशंसक वीरेंद्र सहवाग से नाराज जरूर होंगे। वीरेंद्र सहवाग ने अचानक से अख्तर को लेकर अपने बयान के जरिए एक खुलासा कर दिया जिसे खुद शोएब अख्तर भी शायद हजम न कर पाय। जब भी शोएब अख्तर का नाम अगर आता है तो उनको उनके रफ्तार के वजह से जाना जाता है क्योंकि रावलपिंडी एक्सप्रेस ने क्रिकेट इतिहास की सबसे तेज गेंद भी फेंकी है,जो आज तक कोई नही फेक पाया है। शोएब अख्तर ने 2003 वर्ल्ड कप के दौरान इंग्लैंड से मैच खेलते हुए 161.3 kmph की गति से गेंद फेंकी थी। जिसने पूरे क्रिकेट जगत में सनसनी फैला दी थी। रावलपिंडी एक्सप्रेस जब बॉलिंग के लिए दौड़ना शुरू करते थे तो वो बाउंड्री के करीब से आते थे फिर गेंद को फेकते थे। लेकिन टीम इंडिया के पूर्व ओपनर वीरेंद्र सहवाग का मानना है कि पाकिस्तान के पूर्व तेज गेंदबाज शोएब अख्तर ‘चकिंग’ करते थे। वीरेंद्र सहवाग ने ये बहुत बड़ा खुलासा किया है जो किसी भी पाकिस्तानी फैन्स को हजम नही होगा। होम ऑफ हीरोज स्पोर्ट्स18 से इंटरव्यू के दौरान वीरेंद्र सहवाग ने कहा कि ‘शोएब अख्तर को पता था कि उनकी कोहनी मुड़ती है और वह चक्का गेंद फेंकते हैं। नहीं तो ICC ने उन्हें बैन ही क्यों किया होता।’ वीरेंद्र सहवाग ने कहा, ‘शोएब अख्तर की कोहनी मुड़ती थी और बल्लेबाज को पता ही नहीं चलता था कि उनका हाथ कहां से आ रहा है और गेंद कहां से आएगी। अगर ब्रेट ली की बात करें तो उनका हाथ सीधा आता था, जिससे उनकी गेंद को पिक करना बल्लेबाज के लिए थोड़ा आसान होता था।’

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