उत्तर प्रदेश के वरिष्ठ मुस्लिम नेता रामपुर से विधायक आजम खान को आज अदालत से अंतरिम जमानत मिल गई। आजम खान सीतापुर जेल में पिछले 27 महीनों से बंद थे। आजम खान को 88 मामलों में पहले ही जमानत मिल गई थी और आज 89वें मामले में भी जमानत दे दी गई।आजम खान के बाहर आते ही उनके समर्थकों में काफी उत्साह था। आजम खान को जेल से छूटते ही बाहर शिवपाल यादव उनसे मिलने पहुंच गए।अखिलेश यादव ने भी शायराना अंदाज में ट्वीट कर आजम खान के रिहाई का स्वागत किया।

 

अखिलेश यादव से नाराज हैं आजम खान!

 

बीते कई दिनों से आ रही खबरों के मुताबिक यह बात तो स्पष्ट है कि आजम खान और अखिलेश के बीच सब कुछ ठीक नहीं चल रहा। आज जेल से छूटने के बाद आजम खान ने भी कुछ ऐसे ही संकेत दिए हैं। दरअसल आज जेल से छूटकर आजम खान रामपुर पहुंचे अपने समर्थकों का अभिवादन स्वीकार किया और इशारों इशारों में ही अखिलेश से नाराज होने का भी संकेत दे दिए। आजम खान ने कहा कि ज्यादा जुल्म अपनों ने ही किया है। आजम यहीं नहीं रुके उन्होंने शायराना अंदाज में यह भी कहा कि दरख्तों की जड़ों में अपनों ने ही जहर डाला है।

 

जेल से छूटने के बाद आजम खान ने क्या कहा?

 

आजम खान ने जेल में बिताए हुए पलों को भी याद किया जेल में बीताए हुए पल को बताते हुए आजम ने कहा कि हमें जेल में ऐसे रखा गया जैसे अंग्रेजों के जमाने में उन कैदियों को रखा जाता था जिन्हें दो-तीन दिन में फांसी होने वाली होती थी। हमारे बैरक के पास ही फांसी घर भी था। हमने जेल में कैसे वक्त गुजारा है, हम ही जानते हैं। पत्नी और बच्चे के आने के बाद बहुत तन्हा महसूस किया। जेल में सुबह होती थी तो शाम का इंतजार और शाम होती थी तो सुबह का इंतजार रहता था मेरे परिवार के साथ जो हुआ कभी नहीं भूल सकते।” खाने आगे कहा कि शहर को उजाड़ दिया था, सिर्फ इसलिए कि यहां तुम्हारी आबादी है। तारीख तो तोड़ा-मरोड़ा जा सकता है लेकिन भुलाया नहीं जा सकता। ”जिंदगी की शुरूआती दौर में जब एएमयू में सेक्रेट्री थे तब मुल्क में इमरजेंसी लगी, तब हमें पौने दो साल बनारस की जेल काटी थी। जब जिंदगी की शुरूआत हुई थी उस वक्त भी हालात ने हमसे कुर्बानी ली थी और जिंदगी के इस मोड़ पर एक बार फिर कुर्बानी ली चालीस साल का यह लंबा सफर बेकार नहीं जाएगा आसमान की कसम खाकर कहता हूं कि इन सूखे दरख्तों में फिर कपोले फूटेंगी। फिर बहार आएगी।

 

अखिलेश ने ट्वीट कर आजम के रिहाई का किया स्वागत-

 

सुप्रीम कोर्ट से आजम खान को अंतरिम जमानत मिलने के बाद स्वागत और बधाई हो का सिलसिला चल पड़ा। लोग अलग-अलग माध्यम से आजम खान को बधाई दे रहे थे। अखिलेश यादव ने भी जेल से छूटने पर आजम खान को बधाई दी।उन्होंने ट्वीट करते हुए लिखा कि सपा के वरिष्ठ नेता व विधायक मा. श्री आज़म ख़ान जी के जमानत पर रिहा होने पर उनका हार्दिक स्वागत है। जमानत के इस फ़ैसले से सर्वोच्च न्यायालय ने न्याय को नये मानक दिये हैं।पूरा ऐतबार है कि वो अन्य सभी झूठे मामलों-मुक़दमों में बाइज़्ज़त बरी होंगे।झूठ के लम्हे होते हैं, सदियाँ नहीं!

 

 

आजम के मीडिया प्रभारी ने भी लगाया था अखिलेश पर मुसलमानों के अनदेखी का आरोप-

 

यह बात उस वक्त की है जब आजम खान सीतापुर जेल में थे विधानसभा चुनाव के बीत चुके थे और नेता प्रतिपक्ष बन गए थे अखिलेश यादव,उसी वक्त आजम खान के मीडिया प्रभारी फसाहत अली खान अखिलेश यादव पर कई आरोप लगाए थे। फसाहत ने कहा था कि योगी आदित्यनाथ की टिप्पणी सही थी कि अखिलेश यादव नहीं चाहते कि आजम खान बाहर आएं। हमने आपको और मुलायम सिंह यादव को यूपी का सीएम बनाया लेकिन आपने आजम खान को नेता प्रतिपक्ष नहीं बनाया। आप सिर्फ एक बार जेल में उनसे मिलने गए थे। आजम खां के जेल से बाहर न आने की वजह से हम लोग सियासी रूप से यतीम हो गए हैं।हम कहां जाएंगे, किससे कहेंगे और किसको अपना गम बताएं. हमारे साथ तो वो समाजवादी पार्टी भी नहीं है।फसाहत अली खान ने अखिलेश यादव पर मुसलमानों के अनदेखी का आरोप लगाते हुए यह भी कहा था कि जिस आजम खान ने अपनी पूरी जिंदगी समाजवादी पार्टी को दे दी उन्होंने उनके लिए कुछ नहीं किया। हमारे राष्ट्रीय अध्यक्ष(अखिलेश यादव) को हमारे कपड़ों से बदबू आती है।

 

शिवपाल और अखिलेश के भी रास्ते अलग-

 

चाचा शिवपाल अखिलेश यादव से अलग होकर अपनी अलग पार्टी प्रगतिशील समाजवादी पार्टी का गठन कर लिया था। हालांकि बदलती परिस्थिति के दौर में मुलायम सिंह यादव के कहने पर शिवपाल यादव ने विधानसभा चुनाव में जसवंत नगर से साइकिल चुनाव निशान पर चुनाव लड़ा और जीत भी दर्ज किया। चुनाव परिणाम आने के बाद जैसे-जैसे समय बदलता गया शिवपाल यादव के भी रंग बदलते गए। शिवपाल यादव इशारों इशारों में अखिलेश यादव से अपनी नाराजगी समय-समय पर जाहिर करते है। ईद के मौके पर शिवपाल यादव ने कुछ ऐसा ट्वीट कर दिया जिससे सामाजिक तौर पर भी इस बात का अंदाज लगाया जाने लगा कि शिवपाल अखिलेश से नाराज है। दरअसल शिवपाल यादव ने ट्वीट करते हुए लिखा था कि अपने सम्मान के न्यूनतम बिंदु पर जाकर मैंने उसे संतुष्ट करने का प्रयास किया! इसके बावजूद भी अगर नाराज हूं तो किस स्तर तक उसने हृदय को चोट दी होगी!

हमने उसे चलना सिखाया..

और वो हमें रौंदते चला गया..

एक बार पुनः पुनर्गठन,आत्मविश्वास व सबके सहयोग की अप्रतिम शक्ति से ईद की मुबारकबाद।

 

 

मुस्लिमों के बीच और रामपुर में आजम खान का वर्चस्व

 

2019 के लोकसभा चुनाव में अखिलेश यादव की समाजवादी पार्टी कुल 5 सीटों पर जीत दर्ज हासिल की थी। उनमें से एक सीट रामपुर भी थी जहां से आजम खान जीतकर संसद पहुंचे थे। मोदी लहर में भी आजम खान अपनी सीट बचाने में कामयाब रहे इसके बाद यह तो तय हो गया की रामपुर में आजम खान की चलती है। रामपुर विधानसभा से आजम खान 9वीं बार चुनकर विधानसभा पहुंचे हैं। तमाम आरोपों के बाद यह बात तो स्पष्ट है क्या आजम खान का रसूख रामपुर में है। 2022 के विधानसभा चुनाव में योगी आदित्यनाथ की लहर के बावजूद रामपुर से आजम खान और स्वार से आजम खान के बेटे अब्दुल्ला आजम चुनाव जीतकर विधानसभा पहुंचे है। रामपुर से बीजेपी प्रत्याशी आकाश सक्सेना को आजम खान ने 55,000 मतों से हराया था। जेल में रहकर भी चुनाव जीत गए थे आजम खान।अब आजम खान समाजवादी पार्टी का साथ छोड़ते हैं तो यह तय है कि अखिलेश यादव को भारी नुकसान होगा।

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