बीजेपी अपने प्रत्याशियों के टिकट चयन के लिए आज दिल्ली में बैठक कि जोकि लगभग 10 घंटे चली। और भारतीय जनता पार्टी ने इसबार साफ किया है कि, दागी और खराब छवि वाले विधायकों को टिकट नहीं मिलेगा। क्योंकि बीजेपी इस बार उसी उम्मीदवार को टिकट देगी जो पार्टी के लिए सीट निकाल कर दे सके। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में पहले और दूसरे चरण के प्रत्याशी चयन के लिए मंगलवार को दिल्ली में भाजपा की बैठक हुई। बैठक में यूपी भाजपा की ओर से तैयार प्रत्याशियों के पैनल पर मंथन के बाद उम्मीदवारों के नाम तय किए जाएंगे। पार्टी के चुनाव प्रभारी धर्मेन्द्र प्रधान की मौजूदगी में होने वाली बैठक में भाजपा प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह, उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य, डॉ.दिनेश शर्मा, महामंत्री संगठन सुनील बंसल और प्रदेश प्रभारी राधामोहन सिंह मौजूद रहें। बैठक में शामिल होने के लिए पार्टी के नेता सोमवार रात दिल्ली पहुंच गए थे। बैठक में गृह मंत्री अमित शाह ने यूपी में बीजेपी के क्षेत्रों के क्षेत्रवार समीक्षा की इस दौरान सभी क्षेत्रीय प्रभारी उसे बीजेपी के कामकाज और पार्टी के समीकरण को लेकर चर्चा की गई बैठक में आज उम्मीदवारों के नाम पर चर्चा नहीं हुई। इसके लिए बुधवार सुबह 11:00 बजे दोबारा पार्टी की बैठक होगी।

बतादे उत्तर प्रदेश में कुल 7 चरण में विधानसभा चुनाव होने है। जोकि 10 फरवरी से शुरू होकर 7 मार्च तक होगा जिसका परिणाम 10 मार्च को घोषित कर दिया जाएगा। जानकारी के मुताबिक, पहले चरण की सीटो के उम्मीदवारों का ऐलान 15 से 16 जनवरी तक हो सकता है। ये बैठक बीजेपी चुनाव समिति और केंद्रीय नेतृत्व में हुई जिसमे सूबे के मुखिया योगी आदित्यनाथ और डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य मौजूद रहे। सूत्रों के मुताबिक 58 सीटो के दावेदारों के नाम सोमवार को लखनऊ में चुनाव समिति के बैठक में ही तय हो चुका है। और इस सूची को प्रदेश के संगठन महामंत्री सुनील बंसल दिल्ली लेकर पहुंचे थे। इस लिस्ट को मुख्यमंत्री और दोनो डिप्टी सीएम के साथ चर्चा की गई। और चर्चा में यूपी के प्रभारी राधा मोहन सिंह, सुनील बंसल, आदि लोग शामिल थे। और इन नामों को बुधवार को फाइनल किया जा सकता है।

 

मुस्लिम नेताओं की मांग कम से कम 20 मुस्लिम नेताओं को मिले टिकट।

 

‘द प्रिंट’ की खबर के मुताबिक, भारतीय जनता पार्टी के अल्पसंख्यक मोर्चा के अध्यक्ष जमाल सिद्दीकी ने मुस्लिम नेताओं के लिए टिकट की मांग करते हुए कहा, ‘यूपी में ऐसी बहुत सी सीटें हैं, जहां बड़ी तादाद में मुस्लिम आबादी है और इनमें से कई सीटों पर हम 2017 के विधानसभा चुनाव में बेहद कम वोटों के अंतर से हारे थे। उदाहरण के तौर पर सम्भल, मुरादाबाद और मेरठ जिलों को देखिए, जहां मुस्लिम मतदाताओं की संख्या अच्छी खासी है। पश्चिम बंगाल में भी हमारी पार्टी ने मुस्लिम उम्मीदवार उतारे थे और हम इस बार यूपी चुनाव के लिए भी कुछ नाम भेज रहे हैं। हम चाहते हैं कि मुस्लिम समाज को भी सरकार में प्रतिनिधित्व मिले, ताकि वो आगे बढ़ सकें।’

 

उत्तर प्रदेश में कुल 19 फीसदी है मुस्लिम आबादी।

 

जमाल सिद्दीकी ने आगे कहा, ‘हमने उत्तर प्रदेश के अंदर ऐसी करीब 100 सीटों की पहचान की है, जहां अल्पसंख्यक आबादी 30 फीसदी है। इसके अलावा 140 सीटें ऐसी हैं, जहां ये आबादी 20 फीसदी और 40 सीट ऐसी हैं, जहां अल्पसंख्यक आबादी 60 से 70 फीसदी है। इनमें से ज्यादातर सीटें पश्चिमी उत्तर प्रदेश, अवध और बृज क्षेत्र में हैं। 2017 के यूपी चुनाव के आंकड़ों को अगर देखें तो सहारनपुर नगर सीट पर हम समाजवादी पार्टी से केवल 4000 वोटों के अंतर से हारे। इसी तरह गाजियाबाद की धौलाना सीट पर भी हमारी हार का अंतर काफी कम था। यूपी में कई सीटों पर ऐसा ही समीकरण रहा।

 

45 से अधिक सिटिंग एमएलए के कट सकते है टिकट।

 

बैठक में हुए मंथन के दौरान ये भी खबर है कि लगभग 45 सिटिंग विधायकों के टिकट कट सकते है, वही पार्टी के बड़े नेताओं का मानना है कि उत्तर प्रदेश की जनता योगी सरकार से खुश है लेकिन वही स्थानीय विधायकों से नाराजगी है। इसलिए सूत्रों के मुताबिक इस बार कुछ विधायकों के टिकट कट सकते है। और यही वजह है की पार्टी से कुछ नेता इस्तीफा भी दे रहे है उनको डर है कि कही हमारा भी टिकट न कट जाए।

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