साल 1999 में एक बालक जो मात्र 9 वर्ष की आयु का था वह पेंटिंग बना बनाकर अपने शिक्षकों को बेचने लगा , एक पेंटिंग के उसे कुल 20 से 160 रुपए के बीच मिले ऐसा करके उसने कुल 1220 रुपए जोड़ें और उन्हें अपने प्रधानाचार्य को समर्पित कर दिया। वह बालक ऐसा क्यों कर रह था। इस पैसे को उसने कहा डोनेट किया और ये कहानी आपके लिए क्यों जरुरी है। ये आगे हम आपको बताएँगे। लेकिन पहले एक और घटना के बारे में जान लीजिये।

 

कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ़्ती ने भारत सरकार द्वारा आज़ादी के अमृत महोत्सव में हर घर तिरंगा अभियान का विरोध किया है उन्होंने कहा है की देशभक्ति थोपी नहीं जा सकती सही बात है देशभक्ति तो दिल में होती है , और अगर कोई हिंदुस्तानी है तो उसके दिल की धड़कन हमेशा भारत माता की जय बोलेगी तिरंगे पर प्रश्न नहीं उठाएगी चाहे उम्र 9 साल की हो या 90 की। अब आते है उस 9 साल के बच्चे पर , वो 9 साल का बच्चा अपनी पेंटिंग इसीलिए बेच रहा था की उस पैसे को आर्मी वेलफेयर फण्ड में जमा करवा सके और कारगिल युद्ध के वीरों को अपने हिस्से की सलामी दे सके। ये बच्चा अब बड़ा हो गया है और अब इन्होने पुरे लाल चौक को तिरंगा मय कर दिया है। यह बालक अब सांसद है और इनका नाम तेजस्वी सूर्या है।

 

साल था 1999 तारीख 26 जुलाई भारत ने पाकिस्तान पर एक और ऐतिहासिक विजय दर्ज की , तबसे ही भारत 26 जुलाई को विजय दिवस के रूप में हर्षोउल्लास के साथ मनाता है। विजय दिवस की गूंज पुरे देश में तो नजर आती थी , लेकिन जिस कश्मीर को बचाने के लिए हमारे वीर शहीद हुए उस कश्मीर में नहीं आखिर क्यों।

 

लाल चौक क्यों है महत्वपूर्ण

 

कश्मीर का लाल चौक भारत की अस्मिता का प्रतीक है, लेकिन क्या आप जानते है उस लाल चौक पर भारतीयों को तिरंगा फहराने नहीं दिया जाता था, और तब की सरकार आतंकवादियों से इतना खौफ खाती थी की उन्होंने कश्मीर को अलगावादियों और आतंकवादियों के लिए एक उपजाऊ भूमि बना दी। लेकिन ये 2022 का भारत है जहाँ कश्मीर भी हमारा है कश्मीरी भी हमारे है। लेकिन हाँ ना आतंकवादी हमारे है ना अलगावादी हमारे है वो तो बस दोज़ख को प्यारे है। कश्मीर में कारगिल विजय दिवस की धूम है पूरा कश्मीर तिरंगा से पटा हुआ है यह दृश्य देखकर पाकिस्तान ख़ुद ही कश्मीर मसले पर हथियार डाल देगा। अलगाववादी नेता इस तस्वीर को देख सो नहीं पाएंगे। आई एस आई कश्मीर को लेकर अपनी मुहीम अब छोड़ देगा।

 

इतिहास खुद को दोहराता है आज भारतीय जनता युवा मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष और लोकसभा सांसद तेजस्वी सूर्या ने लाल चौक को तिरंगामय कर दिया , चारों और सिर्फ विजय विश्व तिरंगा नज़र आ रहा है। तेजस्वी सूर्या के नेतृत्व में कश्मीर में तिरंगा यात्रा शुरू की गई है , जो लाल चौक से लेकर कारगिल तक जायेगी। भारतीय जनता युवा मोर्चा के कार्यकर्ता शहीदों के घरों से मिट्टी लेकर कारगिल के वॉर मेमोरियल में श्रद्धांजलि देंगे। यह इतना महत्वपूर्ण क्यों है यह भी जान लीजिये।

 

1986 से लेकर 1996 तक कश्मीर की स्थित भयावह रही यहाँ आतंकवादियों का वर्चस्व इतना ज्यादा था की हज़ारों कश्मीरी हिन्दुओं की हत्या कर दी जाती थी और सरकार मौन रहती थी। 1992 में नरेंद्र मोदी ने आतंकवाद‍ियों को ललकारते हुए श्रीनगर के लाल चौक पर तिरंगा झंडा फहराया था। इस दौरान आतंकवाद‍ियों ने चेतावनी जारी क‍ि थी क‍ि जो भी लाल चौक पर तिरंगा फहराने की कोशिश करेगा, उसे खत्‍म कर द‍िया जाएगा। इसके जवाब में नरेंद्र मोदी ने कहा था क‍ि मैं 26 जनवरी को लाल चौक पर आऊंगा। हाथ में तिरंगा झंडा लेकर आऊंगा। उस द‍िन लाल चौक पर फैसला हो जाएगा कि किसने अपनी मां का दूध पिया है।’

 

आज कश्मीर तिरंगा मय हो गया है लाल चौक पर बाइक रैली निकली गई है , जिसका नेतृत्व तेजस्वी सूर्या ने किया इस मौके पर उन्होंने कहा की तेजस्‍वी सूर्या ने कहा क‍ि लाल चौक में आज एक ऐतिहासिक दिन है। 200 से अध‍िक भारतीय जनता युवा मोर्चा के कार्यकर्ता लाल चौक पर जमा हुए। वे 100 से अध‍िक बाइक पर सवार श्रीनगर से कारगिल तक तिरंगा यात्रा न‍िकाली। तेजस्‍वी सूर्या ने कहा क‍ि लाल चौक में आज एक ऐतिहासिक दिन है। 2 इसके साथ ही उन्‍होंने आजादी का अमृत महोत्सव का जश्न मनाने की शुरुआत की।तेजस्‍वी सूर्या ने कहा क‍ि कुछ साल पहले, लाल चौक देशद्रोही और अलगाववादी भावनाओं से भरा हुआ था। तिरंगा फहराने की हिम्मत करने वालों को आतंकियों ने हत्या की धमकी दी थी। 1992 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने गर्व के साथ यहां तिरंगा फहराया इसके कारण भारतीय जनता युवा मोर्चा आज 30 साल बाद इसे एक बार फ‍िर से फहरा पाया है।

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