पूरे दुनिया में आज क्रिप्टोकरेंसी का चलन बहुत तेजी से शुरू हो गया है ठीक उसी तरह आज भारत में भी क्रिप्टोकरेंसी का लोगो में उत्साह है ख़ासतर युवाओं में, आज पूरे भारत में लगभग 10 करोड़ लोग है जो क्रिप्टो में ट्रेडर्स है। और ये संख्या पूरे दुनिया में सबसे ज्यादा है आज पूरे दुनिया में सबसे ज्यादा क्रिप्टो ट्रेडर्स भारत में ही है। क्रिप्टोकरेंसी के अनियमित उतार-चढ़ाव से निवेशकों को बचाने के लिए मोदी सरकार ने सख्त कदम उठाने का फैसला कर लिया है। और इसी को देखते हुए केंद्र सरकार इसपर एक नया कानून ला सकतें है। केंद्र की मोदी सरकार भारत में क्रिप्टोकरेंसी पर बैन लगाने की तैयारी कर रही है। इसको मद्देनजर संसद के शीतकालीन बिल पेश किया जाएगा। शीतकालीन सत्र आज यानी 29 नवंबर से शुरू हो रहा है। जिसके तहत देश में सभी निजी क्रिप्टोकरेंसी पर बैन लगा दिया जाएगा। इस खबर के सामने आते ही क्रिप्टो मार्केट बुरी तरह धराशायी हो गया। वहीं, सभी तरह की क्रिप्टोकरेंसी में 25 से 30 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है। क्रिप्टो मार्केट में आए इस भूचाल को देखते हुए समझते हैं कि क्या है क्रिप्टोकरेंसी बिल और इसकी मदद से केंद्र सरकार क्रिप्टोकरेंसी पर कैसे काबू पाएगी?

आइए जानते है क्या है क्रिप्टोकरेंसी?

क्रिप्टोकरेंसी को बताने से पहले हम आपको बताते है करेंसी क्या होती है। अर्थशास्त्र की माने तो “Money is what Money dose” इसे आसान शब्दों में कहें तो अगर आप किसी अनजान इंसान से कोई भी वस्तु या सामान खरीदते है और उसे लेने के लिए जो भी आप देते है उसे करेंसी कहते है। क्रिप्टोकरेंसी वो करेंसी होती है जो ऑनलाइन दुनिया में होती है, जोकि आपके कंप्यूटर और फोन में होती है। आप आमतौर पे जैसे आप नोट और सिक्को को छू सकते है लेकिन इसे आप छू नही सकते।
आप जानते होगे की नोट और सिक्को पर उसके अपने देश का अधिकार होता है। लेकिन क्रिप्टोकरेंसी के साथ ऐसा नहीं है क्रिप्टो पर किसी भी देश की सरकार किसी भी देश के बैंक का अधिकार नहीं होता है। इसको किसी भी देश की सरकार या संस्था कंट्रोल नही कर सकती बल्कि इसपर इसका खुद का अधिकार होता है। जितनी इसकी डिमांड, उतनी ही इसकी वैल्यू होती है।

किसने और क्यों बनाई।

क्रिप्टोकरेंसी 2009 में सतोशी नाकामोतो ने शुरू किया था, लेकिन ऐसा नहीं है। इससे पहले भी कई निवेशकों ने या देशों ने डिजिटल मुद्रा पर काम किया था। यूएस ने 1996 मुख्य इलेक्ट्रॉनिक गोल्ड बनाया था, ऐसा गोल्ड जिसे रखा नहीं जा सकता था, लेकिन इससे दूसरी चीजें खरीदी जा सकती थी। हालांकि 2008 इसे बैन कर दिया गया। वैसा ही 2000 की साल में नीदरलैंड ने पेट्रोल भरने के लिए कैश को स्मार्ट कार्ड से जोड़ा था।

काम कैसे करती है ये क्रिप्टोकरेंसी?

पिछले कुछ सालों से क्रिप्टोकरेंसी मुद्राओं की लोकप्रियता बढ़ी है। इन्हें ब्लॉकचेन सॉफ़्टवेयर के ज़रिए इस्तेमाल किया जाता है। ये डिजिटल मुद्रा इनक्रिप्टेड यानी कोडेड होती हैं। इसे एक डिसेंट्रेलाइज्ड सिस्टम के जरिए मैनेज किया जाता है। इसमें प्रत्येक लेन-देन का डिजिटल सिग्नेचर द्वारा वेरिफिकेशन होता है। क्रिप्टोग्राफी की मदद से इसका रिकॉर्ड रखा जाता है। खरीदी को क्रिप्टो माइनिंग (Cryptocurrency Mininig) कहा जाता है क्योंकि हर जानकारी का डिजिटल रूप से डेटाबेस तैयार करना पड़ता है। जिनके द्वारा यह माइनिंग की जाती है, उन्हें माइनर्स कहा जाता है। आसान भाषा में और समझें तो क्रिप्टोकरेंसी ब्लॉकचेन तकनीक पर आधारिक एक वर्चुअल करेंसी है जो क्रिप्टोग्राफी द्वारा सुरक्षित है। यह सारा काम पावरफुल कंप्यूटर्स के जरिए होता है।

क्या है क्रिप्टोकरेंसी बिल?

जानकारी के मुताबिक, क्रिप्टोकरेंसी के नियमन के लिए केंद्र सरकार की ओर से संसद के शीतकालीन सत्र में क्रिप्टोकरेंसी एवं आधिकारिक डिजिटल मुद्रा विनियमन विधेयक 2021 पेश किया जाएगा। इस बिल के माध्यम से सरकार रिजर्व बैंक इंडिया के तहत एक आधिकारिक क्रिप्टोकरेंसी जारी करने के लिए आसान फ्रेमवर्क तैयार करने की योजना बना रही है। इसकी तकनीक और इस्तेमाल को लेकर भी तैयारी की जा रही है। साथ ही, इस बिल के तहत ऐसा प्रावधान लाया जाएगा, जिससे सारी निजी क्रिप्टोकरेंसी पर प्रतिबंध लग जाएगा। गौरतलब है कि शीतकालीन सत्र में पेश करने के लिए 26 बिल सूचीबद्ध किए गए हैं। इनमें क्रिप्टोकरेंसी बिल भी शामिल है।

किस विधेयक के प्रस्तावित होने की संभावना है?

संसद की एक वेबसाइट पर पोस्ट किए गए एक संक्षेप में कहा गया है कि, भारत में सभी निजी क्रिप्टोकरेंसी को प्रतिबंधित करने का प्रयास किया जाएगा, हालांकि, यह कुछ अपवादों को क्रिप्टोकरेंसी और इसके उपयोग की अंतर्निहित तकनीक को बढ़ावा देने की अनुमति देता है।
सरकारी प्रस्ताव क्रिप्टोकरेंसी को एक वित्तीय संपत्ति के रूप में मान सकता है और निवेश के लिए न्यूनतम राशि निर्धारित कर सकता है, जबकि आधिकारिक तौर पर कानूनी निविदा के रूप में इसके उपयोग पर प्रतिबंध लगा सकता है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा, की क्रिप्टो की दुनिया में होने वाले सभी प्रकार के प्रयोगों की पारदर्शिता होनी चाहिए।

आज की बैठक में वित्त मंत्री ने क्या कहा?

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सोमवार को कहा कि केंद्र सरकार की देश में बिटकॉइन को लीगल टेंडर के रूप में स्वीकार करने की कोई योजना नहीं है। यह जवाब देते हुए कि क्या सरकार को पता है कि हाल के वर्षों में भारत में बिटकॉइन लेनदेन चुपचाप फल-फूल रहा है , सीतारमण ने कहा कि भारत में बिटकॉइन लेनदेन पर कोई डेटा एकत्र नहीं करता है ब्रोकर डिस्कवरी और तुलना प्लेटफॉर्म BrokerChooser के अनुसार, भारत में दुनिया में सबसे अधिक 10.07 करोड़ क्रिप्टोक्यूरेंसी धारक हैं। 2.74 करोड़ क्रिप्टो-मालिकों के साथ अमेरिका दूसरे स्थान पर रहा, उसके बाद रूस (1.74 करोड़) और नाइजीरिया (1.30 करोड़) का स्थान रहा।
केंद्र सरकार संसद के शीतकालीन सत्र के दौरान ‘क्रिप्टोकरेंसी एंड रेगुलेशन ऑफ ऑफिशियल डिजिटल करेंसी बिल, 2021’ पेश करने के लिए पूरी तरह तैयार है। बिल में कुछ अपवादों को छोड़कर, देश में सभी निजी क्रिप्टोकरेंसी पर प्रतिबंध लगाने की मांग की गई है।

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