आजाद समाज पार्टी के मुखिया चंद्रशेखर रावण ने प्रेस कांफ्रेंस करके ऐलान किया कि वो समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन नही करेंगे। चंद्रशेखर ने कहा कि मैं पिछले एक महीने से बातचीत करके आपसी सहमति से गठबंधन करने का प्रयास में हूं लेकिन मुझे नहीं लगता की सहमति बन पाएगी। आपको बता दे कि कल चंद्रशेखर रावण ने अखिलेश यादव को ट्वीट करके लिखा था कि, एकता में बड़ा दम है। मजबूती और एकता के बगैर बीजेपी जैसी मायावी पार्टी को हराना आसान नहीं है। गठबंधन के अगुवा का दायित्व होता है कि वो सभी समाज के लोगों के प्रतिनिधित्व और सम्मान का खयाल रखें। आज यूपी में दलित वर्ग अखिलेश जी से इस जिम्मेदारी को निभाने की अपेक्षा रखता है। इससे अंदाजा लगाया जा रहा था कि शायद आजाद समाज पार्टी और समाजवादी पार्टी में गठबंधन हो सकता है। लेकिन आज बात बिगड़ी हुई लगी।

 

अखिलेश यादव को दलितों की जरूरत नही।

 

भीम आर्मी चीफ रावण ने कहा कि, अखिलेश यादव से सकारात्मक बातचीत महीने से चल रही थी और उन्होंने बोला था शाम तक बताएंगे लेकिन सुबह हो गया अभी तक उनसे कोई संपर्क नहीं हुआ। क्योंकि वो चाहते ही नही की ये गठबंधन हो। चंद्रशेखर ने आरोप लगाया कि, अखिलेश यादव को सिर्फ दलितों का वोट चाहिए। दलित नेता नही क्योंकि अगर अगर दलित जीत के आएगा तो वो अपने समुदाय के लोगो के लिए न्याय और सामाजिक एकता की बात करेगा। आगे चंद्रशेखर ने कहा कि एक महीने दस दिन के बात चीत के बाद ये निकल कर सामने आया की वो इस गठबंधन को नही चाहते है।

 

अखिलेश यादव ने अपमानित किया है।

 

रावण का आरोप है कि अखिलेश यादव ने मुझे और पूरे बहुजन समाज के लोगो को अपमानित किया है। क्योंकि मुझे भरोसा था की वो 85 फीसदी बहुजन समाज के लोगो को एक करने का काम करेगे लेकिन लेकिन मुझे नहीं लगता वो इस गठबंधन में दलित समाज के लोगो को चाहते है। मेरे साथ बहुत से बहुजन समाज के लोगो का साथ है जिसकी वजह से आज मैं यहां बैठा हूं और उनका मन था कि बीजेपी को किसी भी हाल में रोकने के लिए इस गठबंधन का हिस्सा बने। क्यूंकि मैंने कहा था अखिलेश बड़े भाई है मेरे, अगुवा है वो, फैसला ले क्यूंकि दलित समाज, पीड़ित समाज, और पिछड़ा समाज आपके साथ इक्कठा हो रहा वो इसलिए की उन्हें लगता है आप सामाजिक न्याय करेगे।

 

अखिलेश यादव को सामाजिक न्याय का मतलब भी नही पता है।

 

रावण ने बड़ी बात बोलते हुए कहा कि, अखिलेश यादव को सामाजिक न्याय का मतलब भी नही पता है। क्योंकि सामाजिक न्याय कहने से नहीं होता है। हम मान्यवर कांशीराम को मानने वाले लोग इसलिए हम हिस्सेदारी में विश्वास रखते है, 25 फीसदी दलितों की हिस्सेदारी ये है कि अखिलेश यादव उन्हें अपने गठबंधन में नही रखना चाहते है।

 

बात भी किया और तय भी रखा लेकिन अहम टाइम पर धोका दिया – रावण

 

पिछले 40 दिन से बातचीत चल चल रही थी और उन्होंने तय भी किया था की आने वाले समय में बात रखी जायेगी। लेकिन ऐसा नही हुआ वो अपनी बातों पर नही रहे। क्योंकि उन्हें दलित समाज और वंचित समाज की चिंता नही है। रावण ने कहा उन्हें नही होगा लेकिन मुझे है। आरोप लगाया की पिछले पांच सालों में प्रदेश में हुए रेप और हत्या जैसे मामलों में कितनो के घर नही गए अखिलेश यादव फिर भी हम सारी चीजों को दरकिनार करके स्वाभिमान और सम्मान की लड़ाई लड़ने के लिए उनसे मुलाकात की उनसे अपील की इस गठबंधन को बना लेते है। लेकिन शायद उन्होंने मन में बना लिया है की उन्हें दलितों की लीडरशिप नही चाहिए।

 

क्यों नही बना गठबंधन?

 

चंद्रशेखर का आरोप है कि हम बस इतना चाहते थे कि अगर कल आपकी सरकार बनती है तो क्या दलितों और पिछड़ों के सामाजिक न्याय की बात होगी या नही। लेकिन उन्होंने इसपर मना कर दिया क्योंकि हम चाहते थे की वो इस स्थिति को साफ करें। क्योंकि पिछले कई ऐसे मुद्दे रहे है जिसमे अखिलेश ने चुप्पी साध रखे थे। इसलिए हम इस मुद्दे पर खुल के बात करना चाहते थे की ये साफ हो। रावण ने कहां अखिलेश भी बीजेपी की तरह दलितों के सम्मान की बस बात करते है क्योंकि असल में उन्हें दलितों से कुछ लेना देना ही नही है।

 

स्पष्ट किया गठबंधन नही करेंगे, अकेले चुनाव लड़ने में सक्षम।

 

आगे रावण के कहा की 25 फीसदी दलितों और वंचितों के लिए हमने लड़ाई लड़ी है, और आगे भी लड़ेगे सरकार ने हम पर सैकड़ों मुकदमे लगाए है। जेल भी भेजा है लेकिन फिर भी हमने लड़ाई लड़ी है। और रही चुनाव लड़ने की बात तो हम अकेले बिहार में चुनाव लड़ेगे थे तो हम यहां भी लड़ेगे क्योंकि हमारे साथ बहुत सारे लोग खड़े है, जिन्होंने मुझे यहां तक पहुंचाया है। मेरी इच्छा एमपी एमएलए बनने की नही है। मैं सामाजिक न्याय करना चाहता हूं।

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