गुजरात में कुछ समय बाद ही विधानसभा चुनाव होने है और उस के पहले कांग्रेस पार्टी को बहुत बड़ा झटका लगा है। गुजरात के पाटीदार नेता हार्दिक पटेल ने कांग्रेस से इस्तीफा दे दिया है। ये कांग्रेस का बहुत बड़ा लॉस है क्योंकि पिछले बार पूरा चुनाव पटेल के ईर्द गिर्द रहा था। कहा ये भी जा रहा है कि हार्दिक पटेल पिछले कुछ समय से भाजपा के नेताओ के टच में भी है। माना जा रहा है कि हार्दिक पटेल जल्दी ही भाजपा का दामन थाम सकते है। पटेल ने बहुत बड़ा आरोप लगाया है कि जब देश परेशानियों से जूझ रहा था तब कांग्रेस को भी नेतृत्व की जरूरत थी, तब हमारे नेता विदेश में घूम रहे थे। जो देश और पार्टी के लिए शर्म की बात थी। हार्दिक पटेल ने अपने इस्तीफे में विवादित विषयों की बात करते हुए लिखा है कि “प्रभु श्री राम का मंदिर हो,सीएए-एनआरसी का मुद्दा हो, जम्मू-कश्मीर से धारा 370 हटाना हो अथवा जीएसटी लागू करने जैसे निर्णय हों, देश लम्बे समय से इनका समाधान चाहता था और कांग्रेस पार्टी सिर्फ इसमें एक बाधा बनने का काम करती रही।” इस एक वाक्य में “राम मंदिर” के बदले “प्रभु श्री राम का मंदिर” लिखे होने भर से अनुमान लगाया जा सकता है कि उनका अगला ठिकाना संभवतः भाजपा है। आगे हार्दिक पटेल ने कहा कि कांग्रेस का आलाकमान ने सिर्फ भारत देश का ही अपमान नही किया है, बल्कि उन्होंने केंद्र को घेरने के लिए गुजरात हो या मेरा पटेल समाज, हर मुद्दे पर कांग्रेस का स्टैंड कुछ रहा ही नहीं। पटेल ने कहा है कि कांग्रेस को इन्हीं सब वजह से लगभग देश के हर राज्य की जनता ने पूरी तरह से रिजेक्ट किया है। और यही हालात रहे तो आगे भी जनता ऐसे ही रिजेक्ट करती रहेगी। हार्दिक पटेल ने ऐसा नहीं है की अचानक से पार्टी पर आरोप लगाए है बल्कि बहुत पहले से ही वो पार्टी पर हमलावर थे। बकौल पटेल ने आगे कांग्रेस पे आरोप लगाते हुए कहा कि कांग्रेस पार्टी के शीर्ष नेतृत्व में किसी मुद्दे के प्रति गंभीरता की कमी एक बड़ा मुद्दा है। और ये मुद्दे पर कोई काम नहीं करना चाहता ताकि इसको सही किया जा सके। पटेल पार्टी पर आरोप लगाते हुए कहते है कि जब भी पार्टी के नेतृत्व से मिला तो लगा कि उनका ध्यान गुजरात की जनता की समस्याओं से सुनने से ज्यादा अपने मोबाइल और बाकी चीजों पर रहा। जब भी देश संकट में था, अथवा कांग्रेस को नेतृत्व की जरूरत थी, तो हमारे नेता विदेश में छुट्टियां मना रहे थे। शीर्ष नेतृत्व का बर्ताव जनता के प्रति ऐसा है कि गुजरात और गुजरात के लोगों से उन्हें नफरत हो जाए। हार्दिक बताते है की जब पार्टी के छोटे नेता दूर दूर तक जाकर पार्टी का प्रचार करते है और बदले में पार्टी उनकी बातों को सीरियस नही लिया जाता। हार्दिक बताते है की जब भी मैं लोगो के बीच जाता हू तो लोग हमे बोलते है की आप ऐसे पार्टी में क्यों हैं। जहा ये देखा जाता हो की कौन चिकन सैंडविच खाया और कौन नही।

 

हार्दिक पटेल का कांग्रेस छोड़ना किसी दल से किसी नेता का अलग होना नहीं है। हार्दिक पटेल का कांग्रेस छोड़ना जाति-पाति वाली विनाशकारी राजनीति का गुजरात की जनता द्वारा एक निर्णायक बहिष्कार है। गुजरात जैसे वाइब्रेंट राज्य में यदि जाति के नाम पर राजनीति का सिक्का चल जाए, तो कहीं ना कहीं 8 वर्षों से देश में विकासवादी राजनीति एक फरेब साबित होगा। कांग्रेस से किसी का मोह भंग हो रहा है तो ऐसे ही नही हो रहा। उत्तर प्रदेश चुनाव में हम सब ने देखा था की कैसे कई दिग्गज कांग्रेस छोड़ कर भाजपा में शामिल हो गए थे। कांग्रेस जितनी कमजोर हो रही भाजपा उतना ही मजबूत होते जा रही है। कांग्रेस को समझने के लिए आप बंगाल चुनाव का उदाहरण देख सकते हैं। वहा कांग्रेस का सूफड़ा साफ था फिर भी वो जश्न मना रहे थे वो जश्न इस लिए था क्योंकि वहा बीजेपी की सरकार नही बनी। अब एक पार्टी को जहा अपने हार पर बैठक बुला कर विचार विमर्श करना चाहिए वहा पर कांग्रेस इस लिए जश्न मना रही थी क्योंकि वहा बीजेपी की सरकार नही बनी। अब इसी से अंदाजा लगाया जा सकता है की कांग्रेस की स्थिति क्या हो गई है। देखा जाए तो कांग्रेस के हालात जीतने बुरे है उसके वो खुद ही जिम्मेदार है। क्योंकि कांग्रेस का अध्यक्ष कोई और नहीं बन पा रहा बल्कि सिर्फ गांधी परिवार के लोग ही बन सकते।

 

जहां एक तरफ बिहार आज भी पुरानी पिछड़ी जातिवादी राजनीति के कारण देश को हर कसर कमजोर कर रहा है। नहीं तो कम से कम देश की मजबूती में अपना योगदान तो नहीं ही दे रहा। वहीं दूसरी तरफ गुजरात देशभर को राजनीतिक संदेश देने में भी अपना वाइब्रेंट छवि लगातार बनाया हुआ है।

 

वही हार्दिक पटेल जिसने गुजरात चुनाव में राजनीति के चाणक्य अमित शाह को एक बार के लिए अचंभित कर दिया था। तब हार्दिक के चुनावी मैदान में जनता की उपस्थिति में भी कोई कमी नहीं थी। बावजूद इसके गुजरात ने गंदी राजनीति को पूरी तरह नकार दिया है। आज गुजरात राजनीति का वह निर्णायक परिणाम देश के सामने है। यही चीज गुजरात को बिहार बंगाल जैसे राज्यों से अलग करता है। इसके लिए गुजरात धन्यवाद का पात्र है।

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