यूपी में अभी योगी आदित्यनाथ ने सीएम की सपथ नही ली है लेकिन एक विशेष समुदाय के लोगो का तांडव अभी भी शुरू है। एक घटना ऐसी हुई है जो सोचने पे मजबूर कर रही है की एक फिल्म से एक समुदाय कितना डरा हुआ है। खबर है की यूपी के कुशीनगर के फाजिलनगर कस्‍बे के एक सिनेमा हाल से कश्मीर फाइल फिल्म देखने के बाद बाहर निकल रहे युवकों पर एक समुदाय विशेष के लोगों ने चाकू से हमला कर दिया। इस घटना में तीन युवक गंभीर रूप से घायल हो गये हैं। बताया जा रहा है कि सिनेमा हाल से निकलते समय युवकों ने देशभक्ति के नारे लगाए थे

जिसके बाद उन पर हमला किया गया। अब भला डरा हुआ एक व्यक्ति झुंड बना कर किसी पर हमला भी नही कर सकता है। कई मीडिया चैनलों ने इस खबर से पूरी तरह से दूरी बनाई हुई है जैसे कोई ऐसी घटना हुई ही न हो। खबर है कि फाजिलनगर पंचायत क्षेत्र में स्थित एक सिनेमाघर में कश्मीर फाइल फिल्म चल रही है। जैसा की पूरे भारत में यही फिल्म लगी हुई है वैसे ही वहा पर भी चल रही। शुक्रवार को अंतिम शो में विकास खण्ड के जोकवा बाजार निवासी कुछ युवक उस फिल्म को देखने पंहुचे थे। फिल्म देखने के दौरान युवक देशभक्ति का नारा लगा रहे थे जो एक समुदाय विशेष के युवकों को बिल्कुल भी पसंद नही आया। शो से बाहर निकलने के बाद दोनों तरफ के युवकों के बीच कहासुनी शुरू हो गई। इसी दौरान एक तरफ के युवकों ने झुंड बना कर दूसरी तरफ के युवकों पर हमला बोल दिया,वो भी हाथ में चाकू लेकर। ये पूरी घटना एक सोची समझी साजिश लगती है क्योंकि आखिर चाकू आया कहा से ये सोचनीय विषय है। इस घटना के बुरी तरह से साहुल पुत्र अशोक जायसवाल, कृष्णा पुत्र अशोक जायसवाल और सचिन पुत्र छोटे लाल गोंड गंभीर रूप से घायल हो गये। घटना के तुरंत बाद इन तीनों को कुछ लोगो द्वारा तुरंत अस्पताल पहुंचाया गया जहा इनकी देखरेख डॉक्टरों द्वारा की जा रही है। लेकिन सवाल ये भी है की क्या जिन लोगो ने चाकू से हमला किया है उनकी गिरफ्तारी हुई या नहीं तो आपको बता दे की अभी भी पुलिस के हाथ खाली है और निरंतर पुलिस उन्हें पकड़ने का प्रयास कर रही है। देखा जाए तो होना तो कायदे से ये चाहिए था कि कश्मीर फाइल्स के दर्शक क्रोधित होकर फिल्म हॉल से निकलते और अपने क्रोध के मारे चारों ओर अव्यवस्था खड़ा कर देते। लेकिन उनके सहिष्णुता को सराहना होगा। फिल्म हॉल से निकलने के बाद भी कोई उन्माद नहीं फैलाते। संतों की तरह बस राम का नाम लेकर हॉल छोड़ते हैं। होना ये भी चाहिए था की अगर वो राष्ट्र के नाम नारा लगा रहे थे तो विशेष समुदाय के लोग भी लगाते और कश्मीर में जो हुआ उसपे सरमिंदा होते लेकिन क्या हुआ सब आप सब के सामने है निजाम-ए-मुस्तफा की चाह समेटे उन्मादी लोग उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में चाकू से हमला कर रहे हैं। तनिक सोच कर देखिए वास्तव में कश्मीर में क्या हुआ होगा। बंगाल से 2 दिन पहले की खबर आई है कि फिल्म हॉल में घुसकर दर्शकों के ऊपर हमला किया गया है। कितना भयावह है यह सब कुछ।

 

यूपी के अमरोहा में भी होली के मौके पर हुई झड़प

 

उतर प्रदेश को होली पर उत्तम प्रदेश बनाने के लिए प्रशासन पूरी तरह से अलर्ट पर था लेकिन हुआ वही जिसका डर था। दो लड़के जो होली खेल रहे थे उनको मुस्लिम भीड़ ने पकड़ कर बहुत मारा,जो बिल्कुल निंदनीय था। तो दूसरी तरफ अमरोहा में ही मुस्लिम भीड़ ने छत से पत्थर चलाए,मामला सुनने में ये आया की होली खेल रहे लोगो ने डीजे पर योगी जी के गाने लगाकर डांस कर रहे थे। इस मामूली सी बात पर ईट और पत्थर चलने लगे। अब सवाल ये है की भाईचारे की बात करने वाले तब क्यो बिल में घुस जाते है जब एक धर्म के लोगो को उन्ही के त्यौहार पर उनको टारगेट किया जाता है। बहुत आसान होता है की किसी के त्यौहार पर आकर उसको ज्ञान देकर चले जाना लेकिन जब उन्ही पर हमला होता है तो सब शांत पड़ जाते है और बोलने से कतराते है। अब आप अमरोहा का ही देख लीजिए पुलिस के अलर्ट पे होने के बाद भी वहा माहौल खराब किया गया,लोगो पे पत्थर इस लिए बरसाए गए क्योंकि वो योगी ही आएंगे गाने पर नाच रहे थे। अब इतनी नफरत क्यों है इसको समझना मुश्किल है क्योंकि ऐसा कभी नहीं होता की उनका त्यौहार हो और कोई किसी प्रकार का हुड़दंग मचाया हो। लेकिन एक समुदाय विशेष जरूर अपनी हुडदंगई दिखा जाता है दूसरे के त्योहारों पर। अब देखना ये है की जो हुआ उसको लेकर पुलिस कितनी सख्ती दिखाती है और कितनी जल्दी उन लोगो पर कारवाई करती है।

 

 

बेगूसराय में भी हमला

 

देश का माहौल कैसे खराब करना है इनसे कोई सीखे,बिहार में भी यही हाल हुआ। बेगूसराय में होली की रात मामूली विवाद में दो पक्षों के बीच जमकर झड़प हुई। आप समझ गए होंगे की एक पक्ष कौन सा होगा। स्थिति ऐसी हो गई की यहां भी मामूली विवाद को लेकर एक समुदाय के लोगो ने तीन को चाकू मारकर हॉस्पिटल पहुंचा दिया। घटना इतनी चौकाने वाली थी की खुद वहा के सांसद गिरिराज सिंह को भी विश्वास नहीं हुआ और वो अपने ही मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को प्रश्न दाग गए की हिंदू रहे तो रहे कहा? ये सवाल उनका लाजमी भी था क्योंकि आखिर हिंदू जाए तो जाए कहा, हर जगह तो अत्याचार किया जा रहा और अपने आप को शांति दिखाया जा रहा है। गिरिराज सिंह अस्पताल जाकर घटना में घायल हुए लोगो का हाल चाल भी लिया। और वहा के अधिकारियों से बात करके जल्दी से जल्दी कारवाई की मांग की। अब सवाल ये है की इस देश में ये घटनाएं कम कैसे होंगी तो इसका जवाब है की दोनो पक्षों को आपस में मिल कर आगे बढ़ना होगा लेकिन ये मानने के लिए कौन तयार नही हो रहा इसका जवाब शायद आपको अब तक मिल चुका होगा। ज्यादा बताने की आवश्यकता नहीं होगी।

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