पिछले साल भर से सरकार द्वारा लाए गए कृषि बिल के खिलाफ किसान आंदोलन कर रहे, और वही केंद्र सरकार भी किसानों को देखते हुए शीतकालीन सत्र के पहले दिन ही कृषि कानूनों को वापस ले लिया। और फैसला किसानों के हक में दिया। इसके बावजूद खुद को किसानों का नेता बताने वाले राकेश टिकैत अभी अड़े हुए है और मानने को तैयार नहीं। वही बिल के वापस होते ही किसान आंदोलन छोड़ जाने का फैसला किया, लेकिन टिकैत अब भी आग उगलने का काम कर रहे। किसानो को कह रहे जो घर जायेगा वो जेल भी जायेगा। लेकिन वही कुछ किसान संगठनों ने भी संकेत दिया है की अभी वो आंदोलनरत रहेंगे और राकेश टिकैत ने भी साफ कह दिया है की अभी हम इतनी जल्दी आंदोलन खत्म नही करेगे।

आखिर चाहते क्या है राकेश टिकैत?

जब केंद्र सरकार ने कृषि बिल वापस ले लिया है तो अब किस बात की अड़चने आ रही। टिकैत कहते है की सरकार को एमएसपी पर गारंटी देनी चाहिए अगर नही देते है तो ये आंदोलन खत्म नही होने वाला और हमारे ऊपर लगे मुकदमों को भी वापस लिया जाए।

और वही किसानों का एक धड़ा आंदोलन खत्म करने को लेकर अगुवाई कर रहा है तो कुछ नेता अपनी अन्य मांगों पर आंदोलन को जारी रखना चाहते हैं। बीकेयू ‘कादियान’ के अध्यक्ष हरमीत सिंह कादियान ने बताया कि, एक दिसंबर को एसकेएम (संयुक्त किसान मोर्चा) की बैठक होगी। इसके बाद आगे की रणनीति पर फैसला लिया जाएगा। हालांकि 1 दिसंबर को होने वाली बैठक के अलावा एसकेएम ने 4 दिसंबर को अपनी अगली बैठक बुलाई हुई है।

जल्द ही जेल जाएंगे सब।

सरकार के ऊपर एक बार फिर निशाना साधते हुए टिकैत कहते है की जश्न मनाने की कोई जरूरत नही है आने वाले समय में सरकार से बात चीत होने की उम्मीद है लेकिन अभी से ही कानून वापसी के जश्न मनाने की कोई जरूरत नही है। सब कोई टारगेट पर है और जो जितनी जल्दी घर जायेगा वो उतनी ही जल्दी जेल भी जायेगा। किसानो को फिर गुमराह करते हुए टिकैत कहते है की ये समय घर जाने का नही एक बार फिर संयुक्त मोर्चा को इकट्ठा करने की जरूरत है। दरअसल पंजाब किसान संघठनों का मानना है कि, कानून वापसी के बाद उनकी जीत हो चुकी है. इसलिए अब आंदोलन को जारी रखने को लेकर हम बैठक में तय करेंगे। वहीं किसान यह भी जानना चाहते हैं कि सरकार की एमएसपी को लेकर क्या योजना है?

आखिर जब मंशा चुनाव लडने का नही तो क्यों बहका रहे है किसानो को टिकैत?

एक तरफ किसानों का वो दल जो सरकार के फैसले का सम्मान करते हुए आंदोलन खत्म करने को कहा है और वही राकेश टिकैत जो अभी भी किसानो को एक करने में लगे है इसके पीछे क्या टिकैत का अपना फायदा है? क्या वो चुनाव लडने के लिए किसानों को अपनी तरफ करके सरकार के विरुद्ध खड़ा करना चाहते है। अगर नही तो आखिर क्यूं बात किसानों को बहका रहे है। राजेश टिकैत कहते है की मैं चुनाव नही लड़ूंगा लड़ूंगा. संयुक्त मोर्चा के नेताओं के चुनाव लड़ने पर उन्होंने कहा, क्या चुनाव के पर्जे भर दिए गए हैं? जब चुनाव होगा तो कौन रोक सकता है, जिसे चुनाव लडना है , उसे वोट देने का अधिकार है। जिसे चुनाव लडना है उसे कोई रोक लेगा क्या? और जब संयुक्त मोर्चा का नेता चुनाव लड़ेगा, तो उसे जवाब देना होगा, अभी चुनाव का कोई मुद्दा नहीं। एक तरह टिकैत कहते है अभी चुनाव का कोई मुद्दा नहीं लेकिन वही दूसरी तरफ ये भी कहते है की जो चुनाव लड़ेगा तो उसे कोई रोक लेगा क्या? तो इस बात से कही न की ये लगता है राकेश टिकैत किसानों को खुद के लिए एक ढाल की तरह इस्तेमाल कर रहे है।

भारतीय किसान यूनियन के नेता दर्शन पाल ने टिकैत को दी नसीहत।

भारतीय किसान यूनियन के नेता दर्शन पाल ने राकेश टिकैत से कहा की टिकैत को जिम्मेदारी से साथ बयान देने की जरूरत है। ताकि आंदोलन में एकता बनी रही। दर्शन पाल ने आपसी मतभेद ने मामले में कहा की सयुक्त मोर्चा के नेताओ को अपने मतभेद खत्म करने ज़रूरत है। नेताओं को एक बयान देने की जरूरत है, किसान नेताओं को मुद्दे पर एक तरफा बयान नही देना चाहिए।

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