मध्य प्रदेश के खरगोन में रामनवमी जुलूस पर हुए पथराव और आगजनी के बाद प्रशासन ने हनुमान जयंती पर जुलूस निकालने की अनुमति 16 शर्तो पर दी और उस मांग को खारिज कर दिया गया जिसमे जुलूस को पुराने शहर के इलाके से निकलने के लिए कहा गया था। हनुमान जयंती के मौके पर भोपाल के खेड़ापति मंदिर से लेकर भोपाल के ओल्ड सिटी से होकर जुलूस निकालने के मांग हिंदू संगठनों के की थी जिसे भोपाल पुलिस ने खारिज कर दिया गया। पुलिस ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए मांग को खारिज किया पुलिस ने कहा की जुलूस शहर के अन्य जगहों से होकर गुजर सकता है लेकिन ओल्ड सिटी के इलाकों से होकर नही गुजर सकता। पुलिस प्रशासन ने ये फैसला मौलवियों के दबाव में आकर किया है। मौलवियों ने कहा की अगर जुलूस ओल्ड सिटी के इलाकों से होकर निकलता है तो दंगे हो सकते है। क्योंकि मुस्लिम इलाकों से जुलूस निकालना खतरनाक हो सकता है।

 

आखिर सुरक्षा देने के बजाय जुलूस पर रोक क्यों?

 

पुलिस प्रशासन ने जुलूस को ओल्ड सिटी से निकलने पर रोक क्यों लगाई? क्या सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम नहीं किए जा सकते थे? आखिर कब तक हम अपने धर्म के प्रति समझौता करते रहेंगे? अपने देखा होगा ताजिया का मेला जब निकाला जाता है हिंदू समाज के लोगो के द्वारा किसी भी तरह का कोई आपत्ति नहीं की जाती ऐसे बहुत कम हो मामले होगे जब ताजिया के लिए किसी ने आपत्ति दर्ज कराई हो। हमे किसी भी प्रकार की कोई दिक्कत नही होती बल्कि हैं अपने घरों के सामने से ताजिया जुलूस को निकलते देखते है। लेकिन वही जब बात आती है रामनवमी के जुलूस की हनुमान जयंती के जुलूस की तो क्यों विशेष समुदाय के कुछ शांतिदूतो को इससे दिक्कत होती है। क्या हमे अपने रीति रिवाज के साथ अपने धर्म के पालन करने का अधिकार नहीं है? इस मामले पर पुलिस प्रशासन ने ओल्ड सिटी से होकर जाने की इजाजत ना दी और सुरक्षा व्यवस्था के लिए जो कदम उठाएं उनमें पहला ये है कि जुलूस पर ड्रोन से नजर रखी जाएगी। फिर, पूरे जुलूस में 600 पुलिसकर्मी तैनात रहेंगे, जिन 12 इलाकों से ये जुलूस जाएगा वहाँ पुलिस तैनात होगी, जुलूस शांतिपूर्वक तरीके से निकाला जाएगा यातायात प्रभावित नहीं होगा।

 

पुलिस प्रशासन ने रखी ये शर्ते।

 

प्रशासन ने इस जुलूस को निकालने से पहले जिन शर्तों को रखा उनमें सबसे पहले कहा गया कि जुलूस के दौरान कोई आपत्तिजनक नारे नहीं लगाए जाएँगे। इसके बाद आपत्तिजनक बैनक पोस्टर लगाने की अनुमति भी किसी को नहीं होगी, डीजे पर जो गाने चलेंगे उनकी लिस्ट प्रशासन को देनी होगी, जुलूस में त्रिशूल-गदा छोड़कर बाकी पर किसी शस्त्र पर पाबंदी होगी, कार्यक्रम में बीड़ी-सिररेट या मादक पदार्थों का प्रयोग नहीं होगा, कार्यक्रम में अगर कोई गड़बड़ होती है तो इसकी जिम्मेदारी आयोजक की होगी।

 

जुलूस से मौलवियों को आपत्ति।

 

मौलवियों के आपत्ति के कारण ही हनुमान जयंती के जुलूस के लिए रास्ते में बदलाव किया गया। उन लोगो ने आपत्ति जताई की जुलूस अगर मुस्लिम इलाकों से होकर गुजरता है तो बड़े पैमाने पर दंगा हो सकता है। क्योंकि जुलूस की जहां से गुजरना है वहां पर मुस्लिम बाहुल्य क्षेत्र है। इस संबंध में उनके एक प्रतिनिधिमंडल ने काजी सैयद मुश्ताक अली नादवी के नेतृत्व में भोपाल डीजीपी सुधीर सक्सेना और गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा से मुलाकात की और इस बाबत चिंता व्यक्त की। उनका कहना है कि बजरंग दल और अन्य हिंदू संगठन मुस्लिम बहुल इलाकों में जुलूस को निकालने वाले हैं जो कि खतरनाक हो सकता है।

 

शांतिदुतो ने रामनवमी के जुलूस पर किया था हमला।

 

रामनवमी पर शांतिपूर्ण तरीके से जुलूस निकाला जा रहा था उसके बावजूद जुलूस पर हमला किया गया। सड़को और गलियों से जुलूस निकल रहा था जबकि ना तो यातायात प्रभावित हो रहा था ना ही कोई आपत्तिजनक चीजें की गई। जिसके बावजूद मुस्लिम समुदाय के दंगाई के। द्वारा जुलूस पर पेट्रोल बम से हमला किया गया और घरों के छत के ऊपर से पत्तरबाजी की गई। हिंसा करने और उसे भड़काने में कही ना कही इन्ही मौलवियों का हाथ रहा होगा। और आज जब हनुमान जयंती पर जुलूस निकालने के बात हुई तो उन्होंने फिर से आपत्ति जताई। क्योंकि इनकी मनसा शुरू से ही साफ है।

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