एक बच्चा जो पढ़ने में थोड़ा कमज़ोर था अन्य बच्चों की तुलना में। उसकी स्कूल टीचर हर रोज़ उसकी माँ से शिकायत करती है कि वो बच्चा कभी कुछ नही कर पायेगा। अगले दिन फ़िर वो बच्चा स्कूल जाने के बजाय स्कूल के पीछे वाले मैदान में चल रही क्रिकेट के प्रैक्टिस को घंटो से देखता हुआ पाया जाता है। उसकी मां को फिर स्कूल बुलाया जाता है और कहा जाता है कि- “ये लड़का भविष्य में कभी भी कुछ नही कर पायेगा, इसमें कुछ भी करने की काबिलियत नही है”।मां की आंखों में आँसू आ जाते है। और एक दिन वही बच्चा अपनी माँ के हाथों में “देश का सर्वोच नागरिक सम्मान ला के रख देता है”। खेल एक कला है और इस कला में शिल्पकारों की भूमिका बहुत अहम है। क्रिकेट में ऐसे कई महान खिलाड़ी हैं जिन्होंने इस खेल को सफलता की बुलंदी पर पहुंचाया है। पर असल मायनों में क्रिकेट का एक ऐसा खिलाड़ी भी है जिसने क्रिकेट को ही धर्म बना दिया, सचिन तेंदुलकर विश्व क्रिकेट का वह चेहरा है जिसे पिछले कई सालों से करोड़ों खेल-प्रेमी अपनी आंखों का तारा बनाए हुए हैं। आज ही के दिन 24 अप्रैल 1973 में क्रिकेट के भगवान का जन्म हुआ। किसी को नहीं पता था की ये लड़का विश्व भर में राज करेगा। भारत जैसे क्रिकेटप्रेमियों के देश में सिर्फ़ सचिन का नाम लिख देने मात्र से ख़त उनके घर तक पहुंच जाता है। एक दौर था जब क्रिकेट का नाम ही केवल सचिन तेंदुलकर होता था। हर पांचवें घर का एक बच्चा “सचिन” होता था, गुस्सा आये तो भी माँ यही करके धमकाए की “रुक बनाती हूँ तुझे सचिन तेंदुलकर” , पापा के ताने में भी “सचिन तेंदुलकर नही बन जाओगे” जैसी बातें ही आती थी। सचिन ने हमें क्रिकेट देखना नही क्रिकेट जीना सिखाया है, और हमें गर्व है हमनें सचिन को खेलते हुए देखा है।

 

हर तरफ सचिन का जलवा

 

सचिन ने हर उस टीम के खिलाफ क्रिकेट खेला जिसके सामने खिलाड़ी खेलने से डरते थे। ऑस्ट्रेलिया उस समय विश्व की नंबर एक टीम मानी जाती थी सचिन ने ऑस्ट्रेलिया में घुस के आस्ट्रेलिया के खिलाफ शतक लगाए। यही नहीं बल्कि ऑस्ट्रेलिया, दक्षिण अफ्रीका, पाकिस्तान,श्रीलंका का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन सचिन के दौर में रहा तब सचिन क्रिकेट के भगवान बने। सचिन ने सर्वश्रेष्ठ गेंदबाज माने जाने वाले खिलाड़ियों के खिलाफ रन बनाए। उस दौर में वार्न, मैक्ग्रा, अकरम, वकार यूनिस, शोएब अख्तर, ब्रेट ली, मुरलीधरन जैसे कई महान और अद्भुत गेंदबाज हुए, सचिन ने उनमें से प्रत्येक के खिलाफ कई मैचों और श्रृंखलाओं में अपना दबदबा बनाया। यहां तक की फिरकी के जादूकर शेन वार्न ने तो ये बोला था की सचिन हमारे सपने में आते है।

 

टेस्ट से लेकर वनडे तक सचिन का दबदबा

 

टेस्ट क्रिकेट में उनका औसत कांबली के बाद सबसे अधिक है। (विनोद कांबली ने महज 17 टेस्ट खेले। अगर वह अधिक खेलते तो शायद उनका औसत और कम होता)। उस दौर के किसी भी बल्लेबाज का औसत विदेशी मैदान में सचिन के आसपास भी नहीं था। सचिन का ऑस्ट्रेलिया में औसत 53 तो लारा का 42, द्रविड़ का 41 था। सचिन का इंग्लैंड में औसत 54 से ऊपर का था। वहीं लारा 48 तो पोंटिंग का औसत लगभग 42 था। हालांकि इंग्लैंड में द्रविड़ का औसत सबसे अधिक 68 का था। वहीं साउथ अफ्रीका में द्रविड़ 29 का औसत रखते थे तो सचिन, लारा और पोंटिंग ने यहां 46 से अधिक के औसत से रन बनाए थे।

 

टेस्ट ही नहीं एकदिवसीय में सचिन का औसत औरों से अधिक था। यहां वह लगभग 44 का औसत रखते थे। अर्थात सचिन जीवन भर निरंतर अच्छा खेल खेलते रहे। सचिन का औसत 44, जबकि वर्तमान में विराट का औसत 59 है। इसका मतलब यह नहीं कि विराट, सचिन से बहुत बेहतर है। सचिन का औसत जब 44 था उसके समकालीन कोई भी खिलाड़ी 40 से ऊपर औसत नहीं रख पा रहा था। आज के दौर में रोहित शर्मा का औसत भी 50 के करीब है। यहां तक कि केदार जाधव भी सचिन को औसत में टक्कर दे रहा है।

 

अगर, सचिन को देखें तो उन्होंने जब पदार्पण किया था टीम इंडिया में अच्छे वनडे औसत का बेंचमार्क 35 हुआ करता था। इसे सचिन ने और ऊपर ले जाते हुए 44 तक पहुंचाया। सचिन जब आए थे डेसमंड हेंस के 17 शतक थे। वह एकदिवसीय क्रिकेट में शतक का सबसे ऊंचा आंकड़ा था। सचिन ने इसे 49 तक ले जाकर छोड़ा। सचिन ने अजहर से सबसे अधिक रन का रिकॉर्ड छीना और उसे दोगुने तक पहुंचा डाला। सचिन का स्ट्राइक रेट भी अपने दौर के बल्लेबाजों से अच्छा हुआ करता था। अफरीदी और जयसूर्या के अलावा उस दौर में शायद ही किसी का औसत सचिन से अच्छा हो। चूंकि जयसूर्या और अफरीदी दोनों ही पिंचहिटर थे तो यहां उनके स्ट्राइक रेट का जिक्र करना ही बेईमानी है।

 

यकीनन किसी विशेष दिन में लारा, सचिन से कहीं बेहतर बल्लेबाज थे या किसी विशेष दिन में राहुल द्रविड़ सचिन से अधिक भरोसेमंद। लेकिन ओवरऑल कोई भी बल्लेबाज सचिन के आसपास भी नहीं हुआ। ये तमाम रिकॉर्ड छोड़ दीजिए। ये रिकॉर्ड न भी होते तो भी सचिन सबसे बेहतर होता। यूट्यूब पर हजारों वीडियो उपलब्ध हैं। उनमें सचिन के शॉट्स देखिये। क्या कोई भी खिलाड़ी उस कलात्मकता की बराबरी कर सकता है? दूर-दूर तक नहीं। खेल को खिलाड़ी खेलते हैं, सचिन ने क्रिकेट को रचा है। यूँ ही नहीं सचिन को क्रिकेट का ईश्वर कहा जाता है। सचिन को देख करके कई लोगो ने क्रिकेट खेलना और सीखना शुरू किया। भारतीय टीम के पूर्व ओपनर और धाकड़ बल्लेबाज ने सचिन के बारे में बोला था की सचिन अगर हाथी है तो वो उनके सामने एक चिटी है। सचिन और सहवाग की जोड़ी खूब पसंद की जाती रही है क्योंकि ये जोड़ी ऐसी थी की कभी कभी ऑस्ट्रेलिया जैसी मजबूत टीम के सामने दिन भर खड़े रह जाते थे। सचिन तेंदुलकर विश्व क्रिकेट का एक ऐसा नाम है जिसे पीछे नहीं छोड़ा जा सकता। कई खिलाड़ी सचिन बनने आए और चले गए लेकिन कोई भी सचिन की बराबरी भी नही कर पाया। एक समय था जब क्रिकेट का मतलब ही सचिन होता था और बल्ला मतलब उनका एमआरएफ का बल्ला।

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