अपनी आवाज से भारत ही नहीं बल्कि हर किसी का दिल जीतने वाली लता मंगेशकर की आवाज हमेशा के लिए खामोश हो गई है। भले ही उन्होंने दुनिया को अलविदा कह दिया हो लेकिन अपने गानों के जरिए हमारे बीच मौजूद रहेंगी।

उनका अंतिम संस्कार शिवाजी स्टेडियम में किया गया।उनके अंतिम दर्शन करने सड़कों पर भारी भीड़ जमा हुई, जहां शाहरुख खान, सचिन तेंदुलकर, उद्धव ठाकरे, शरद पवार, राज ठाकरे, पीयूष गोयल समेत कई लोग उन्हें अंतिम विदाई देने पहुंचे। वही प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी भी लता मंगेशकर के अंतिम दर्शन करने मुंबई के शिवाजी स्टेडियम पहुंचे थे।

इंदौर में जन्मी भारत की सबसे प्रतिष्ठित गायिका लता मंगेशकर आज भले ही हमारे बीच नहीं है, लेकिन वह अपने गानों के जरिए हमेशा हमारे बीच‌ रहेगी। उनके फैंस उन्‍हें मां सरस्वती का अवतार मानते है। उनका जन्म 28 सितंबर 1929 में मध्यप्रदेश के एक मराठा परिवार में हुआ। बचपन में सब उन्हें लता मंगेशकर को हेमा कह कर बुलाते थे।

 

लता मंगेशकर की बारे में दिलचस्प बातें-

  • लता मंगेशकर जी को दिलीप साहब छोटी बहन मानते थे। 1974 में लंदन के रॉयल एल्बर्ट हॉल में लता अपना पहला कार्यक्रम कर रही थी, वहां दिलीप भी मौजूद थे। फिर दिलीप कुमार ने हिंदी-उर्दू गाने गाते वक्त लता के मराठी उच्चारण पर टिप्पणी लता जी से कर दी थी। जिसके बाद ही उर्दू सीखने की ठान ली।
  • 60 के दशक में लता दी अपनी फिल्मों में गाना गाने के लिए रॉयल्टी लेना शुरू कर चुकी थी, लेकिन उन्हें लगता था कि सभी गायकों को रॉयल्टी मिले तो अच्छा होगा। जिसके कारण लता मंगेशकर जी का मोहम्मद रफी से अनबन हो गई थी और दोनों ने ही बड़े लम्बे समय तक एक दूसरे से दूरी बना ली थी। दरअसल मोहम्मद रफी ने रॉयल्टी लेने से मना कर दिया था। फिर मुकेश जी ने लता मंगेशकर जी और मोहम्मद रफी साहब को बुलाकर मामला सुलझाने का प्रयास भी किया। मोहम्मद रफी को समझाया पर वह और गुस्सा हो जाते है। वह लता मंगेशकर जी की तरफ देखते हुए बोलते है‌ कि मुझे क्या समझा रहे हो। यह जो महारानी बैठी है, इसी से बात करो। तो इस पर लता मंगेशकर जी भी गुस्से में कह देती है‌ कि आपने मुझे सही समझा, मै महारानी ही हूं।
  • लता मंगेशकर जी को बचपन से ही साइकिल खरीदना चाहती थी। उन्होंने बचपन में ही सहेलियों की साइकिल चलाना सीखा भी लेकिन उस वक्त घर की हालत इतनी सही नहीं थी कि वह साइकिल खरीद सके। जब वह फिल्मों में गायन करने लगी और आर्थिक स्थिति अच्छी हो गई, तब तक साइकिल उनकी चलाने की उम्र बीत गई‌ और उनका यह सपना पूरा नहीं हो पाया।
  • वर्ष 2001 में लता मंगेशकर को संगीत की दुनिया में अपना अमिट योगदान देने के लिए भारत के सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न से भी सम्मानित किया गया था। इसके अलावा उन्हें पद्म विभूषण, पद्म भूषण दादासाहेब फाल्के अवार्ड भी मिल चुके है। इसके साथ ही अपने गाने के लिए लता मंगेशकर जी को सर्वश्रेष्ठ गायिका का नेशनल अवार्ड भी मिला था‌ और 61 वर्ष की आयु में नेशनल अवार्ड जीतने वाली लता जी एकमात्र गायिका रही है।
  • हमेशा सादगी से अपना जीवन व्यतीत करने वाली लता मंगेशकर जी को एक खास किस्म के गहने बहुत पसंद थे। बता दें कि लता मंगेशकर जी को हीरे जड़ी चुड़िया बहुत पसंद आते थी। वही लता जी के फेवरेट कलर की बात करें तो उन्हें सफेद रंग बेहद प्यारा लगता था।
  • लता मंगेशकर अपने जी अपने जीवनकाल में सिर्फ एक दिन के लिए स्‍कूल गई थी। दरअसल पहले ही दिन जब लता स्‍कूल गई तो वह अपनी बहन आशा को भी साथ ले गई थी, ल‍ेकिन उनकी टीचर ने आशा को क्‍लास में बैठने की अनुमति नहीं दी, जिस कारण वह फिर कभी स्‍कूल नहीं गई।
  • दरअसल लता मंगेशकर जी अपने साथ पाठशाला जाती थी, एक दिन‌क्ष उनके शिक्षक ने दोनों को एक ही कक्षा में बैठाने से मना कर दिया था। तो दोनों ही बहनें रोते हुए घर पहुंची और फिर उसके बाद उन्होंने कभी भी पाठशाला ना जाने का फैसला किया।
  • लता मंगेशकर जी यह आदत थी कि उनकी किसी चीज की जब कोई तारीफ करता था तो वह तारीफ करने वाले को दे दिया करती थी‌ और उन दिनों जब फ़िल्म महल की शूटिंग हो रही थी तो गीतकार नक्शाब ने उनकी कलम की तारीफ़ की थी। फिर लता ने उन्हें कलम थमा दी लेकिन वह भूल गई कि इस कलम पर उनका नाम लिखा है। बाद में गीतकार नक्शाब यह कलम इंडस्ट्री में सबको दिखाकर यह जताने की कोशिश करने लगे कि लता और उनके बीच कुछ चल रहा है।इस पर लता जी पहले वह खामोश रही। नक्शाब और लता का आमना सामना हुआ, तो उस समय भी गीतकार यह जताने की कोशिश कर रहे थे कि लता उनके प्यार में पड़ गई है। यहां भी लता जी ख़ामोश रही। फिर एक दिन जब नक्शाब लता मंगेशकर जी के घर तक पहुंच गए,तब वह अपनी बहनों के साथ खेल रही थी। फिर यहां लता मंगेशकर जी से नहीं रहा गया और वह गीतकार को सड़क पर ले गई और कहा, मेरी इजाज़त के बिना घर आने की हिम्मत कैसे हुई। नक्शाब को धमकाते हुए उन्होंने कहा, अगर दोबारा यहां देखा तो टुकड़े करके गटर में फेंक दूंगी‌ और भूलना मत मैं मराठा हूं।
  • लता मंगेशकर जी को अपने करियर के शुरुआती दौर में कई लोगों ने लता जी नापसंद किया था और उनकी आवाज़ के लिए उनको कई बार रिजेक्शन का भी सामना करना पड़ा था।उन्हें पतली आवाज़ की कारण से उन्हें फिल्मों से बाहर किया गया था। लेकिन बहुत कड़ी मेहनत के दम पर उन्होंने दुनिया में अपना नाम बनाया। लता मंगेशकर ने अपने करियर में 30 हजार से भी ज्यादा गाने गाए है। एक समय ऐसा भी था जब जैसे ही लता जी ने गाना शुरू किया दिलीप कुमार ने उन्हें टोकते हुए कहा कि मराठियों की आवाज से दाल भात का गंध आती है। अपनी टिप्पणी के जरिए दिलीप कुमार लता जी के उच्चारण की तरफ इशारा कर रहे थे। दिलीप कुमार की इस टिप्पणी के बाद लता जी ने हिंदी और उर्दू सीखने के लिए एक टीचर रखा और अपनी उच्चारण को सही किया।
  • सन् 1962 के भारत-चीन युद्ध के बाद शहीदों को श्रद्धांजलि देने के लिये एक कार्यक्रम का आयोजन किया गया था। इस में तत्कालीन प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू भी उपस्थित थे। इस समारोह में लता जी के द्वारा गाए गये गीत “ऐ मेरे वतन के लोगों” को सुन कर सब लोग भाव-विभोर हो गये थे। पं नेहरू की आँखें भी भर आई थी। आज भी जब देश-भक्ति के गीतों की बात चलती है तो सब से पहले इसी गीत का उदाहरण दिया जाता है। आपको जानकर हैरानी होगी कि अपने गीत “ऐ मेरे वतन के लोगों” से पंडित नेहरू को रुलाने वाली लता जी ने से पहले इस गीत को गाने से मना कर दिया था। लेकिन बाद में इस गाने के लेखक कवि प्रदीप ने लता जी को इसे गाने के लिए मना लिया था।
  • अपनी आवाज़ से लोगों पर जादू करने वाली लता मंगेशकर के जीवन में एक समय ऐसा भी था जब उन्हें जान से मारने की कोशिश की साजीश की गई थी। लता मंगेशकर जी को खाने में धीमा जहर दिया गया था, जिसकी वजह से उनका 3 महीने तक बिस्तर से उठना मुश्किल हो गया था।
  • पिता के निधन के बाद लता मंगेशकर ने घर की सारी जिम्मेदारी निभाने के लिए बाहर कदम रखा। इसी वजह से घर की जिम्मेदारियां निभाने की वजह से ही शादी नहीं कर पाई। लता मंगेशकर जी ने अपने एक इंटरव्‍यू में बताया भी था कि अगर वह चाहें भी तो वह शादी नहीं कर सकती थी, लेकिन उन पर उनके भाई-बहनों की ज़िम्मेदारी थी। उन्होंने इंटरव्यू में बताया था कि जब वह 13 साल की थीं तभी उनके पिता का देहांत हो गया था। ऐसे में घर के सभी सदस्यों की जिम्मेदारियां मेरे पर गई थी। क्योंकि वह अपने भाई-बहनों में सबसे बड़ी थी। इसी वज़ह से वह कम उम्र में ही पैसे कमाने लगी थी। कई बार उन्हें शादी का ख्याल आता भी था तो वह उस पर अमल नहीं कर सकती थी। क्योंकि वह अपने भाई-बहनों और घर की जिम्मेदारियों को देखते-देखते ही वक्त चला गया और वे ताउम्र शादी नहीं कर पाई।

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