मशहूर भारतीय वेटलिफ्टर मीराबाई चानू एक बार फिर से इतिहास रच डाला है । उन्होंने लगातार दूसरी बार राष्ट्रमंडल खेलों में गोल्ड मेडल को जीतकर रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया है । मीराबाई चानू ने क्लीन एंड जर्क के पहले राउंड में 109 किलो भार उठाया । उन्होंने इसके साथ ही स्वर्ण पदक जीत लिया , क्योंकि उनके करीब कोई भी नहीं था । हालांकि, इसके बाद भी उन्होंने दूसरा अटैम्प्ट किया और 113 किलोग्राम का वजन उठाया ।

टोक्यो ओलंपिक के रजत पदक की विजेता मीराबाई चानू ने कॉमनवेल्थ गेम्स 2022 में भारत को पहला स्वर्ण दिलाया है । उन्होंने वेटलिफ्टिंग में 49 किलोग्राम भारवर्ग में स्वर्ण पदक अपने नाम किया है । इसके अलावा मीराबाई चानू ने राष्ट्रमंडल खेलों में नया इतिहास भी रच दिया है । उन्होंने स्नैच राउंड में सबसे ज्यादा वजन उठाने का रिकॉर्ड भी बनाया है । मीराबाई ने स्नैच राउंड में सबसे ज्यादा 88 किलो का वजन उठाया ‌। और क्लीन एंड जर्क राउंड में 113 किलो का वजन उठाया है । उन्होंने कुल मिलाकर 201 किलो का वजन उठाया ।

 

महज़ 12 साल से ही वेटलिफ्टिंग में प्रतिभाशाली थी मीराबाई

मीराबाई चानू का जन्म 8 अगस्त 1994 को मणिपुर के नोंगपोक काकचिंग में एक मैतेई हिंदू परिवार में हुआ था । उसके माता-पिता ने उसकी प्रतिभा को तब देखा जब वह सिर्फ 12 साल की थी। वह आसानी से अपने घर में जलाऊ लकड़ी का भारी बोझ उठा सकती थी जिसे उठाने के लिए उसके भाई को भी संघर्ष करना पड़ा ।

 

मीराबाई चानू का शुरुआती जीवन

मीराबाई चानू एक मध्यम परिवार से ताल्लुक रखती है । उनकी माता जी एक ग्रहणी होने के साथ-साथ एक दुकानदार है । उनका नाम साइकोहं ऊँगबी तोम्बी लीमा है । उनके पिता पीडब्ल्यूडी डिपार्टमेंट में काम करते है । उनका नाम साइकोहं कृति मैतेई है । मीराबाई चानू बचपन से ही काफी एक्टिव रही है और वेट लिफ्टिंग की तरफ आकर्षित रही हैं बचपन से ही वह भारी वस्तु को उठाकर वेटलिफ्टिंग की प्रेक्टिस किया करती थी ।

 

मीराबाई चानू ने रचा इतिहास जीता गोल्ड मेडल

मीराबाई चानू ने स्नैच राउंड में पहले अटैम्प्ट में 84 किलो का वजन उठाया । मीराबाई ने टोक्यो ओलंपिक में भी स्नैच राउंड में पहला अटैम्प्ट 84 किलो का ही किया था । दूसरे अटैम्प्ट में मीरा ने 88 किलो का वजन उठाने का सोचा और ऐसा कर भी दिखाया । यह वजन उठाने के साथ ही मीराबाई ने इतिहास रच दिया है ।

 

कोई नहीं कर पाया मीराबाई चानू की बराबरी

राष्ट्रमंडल खेलों के इतिहास में स्नैच राउंड में किसी महिला एथलीट द्वारा उठाया गया यह सबसे ज्यादा भार है । इसके साथ ही मीराबाई ने अपने पर्सनल बेस्ट की बराबरी भी की । नेशनल लेवल पर मीरा 88 किलो वजन उठा चुकी है । मीराबाई चानू का 49 किग्रा में व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन कुल 203 किग्रा (स्नैच: 88 किग्रा, क्लीन एंड जर्क: 115 किग्रा) का है, जो उन्होंने 2020 में फरवरी में नेशनल चैंपियनशिप में बनाया था । हालांकि, मीराबाई चानू की तीसरा प्रयास विफल रहा । तीसरे प्रयास में मीरा ने 90 किलोग्राम वजन उठाने का सोचा, लेकिन उनका बैलेंस बिगड़ गया और वह विफल रही । टोक्यो ओलंपिक में मीरा ने तीसरे प्रयास में 89 किलो उठाने का प्रयास किया था , उसमें भी वह विफल रही थी । हालांकि, 90 किलो नहीं उठा पाने के बावजूद मीरा स्नैच राउंड में टॉप पर रही है। उन्होंने दूसरे स्थान पर मौजूद वेटलिफ्टर से 12 किलो वजन की बढ़त बना रखी थी ।

 

मीराबाई चानू ने दिया अपना बेस्ट

मीराबाई चानू ने क्लीन एंड जर्क के पहले राउंड में 109 किलो भार उठाया । उन्होंने इसके साथ ही स्वर्ण पदक जीत लिया, क्योंकि उनके करीब कोई भी नहीं था । हालांकि, इसके बाद भी उन्होंने दूसरा अटैम्प्ट किया और 113 किलोग्राम का वजन उठाया है । तीसरे अटैम्प्ट में मीराबाई ने 115 किलो वजन उठाने की कोशिश की, लेकिन विफल रही । क्लीन एंड जर्क में 115 किलो वजन उनका बेस्ट है ।

Meerabai chanu another gold medal

21 साल बाद भारत को वेटलिफ्टिंग में मीराबाई चानू ने दिलाया मेडल

मीराबाई चानू ने पिछले साल ही देश को वेटलिफ्टिंग में 21 साल बाद ओलंपिक मेडल दिलाया था । टोक्यो ओलंपिक में मीरा ने 49 किलोग्राम वेट कैटेगरी में कुल 202 किलो का वजन उठाया था और रजत पदक अपने नाम किया था । उनसे पहले 2000 सिडनी ओलंपिक में कर्णम मल्लेश्वरी ने कांस्य पदक जीता था । मीराबाई चानू ने लगातार तीन राष्ट्रमंडल खेलों में पदक जीतती आ रही है । साल 2014 ग्लास्गो कॉमनवेल्थ गेम्स में मीरा ने रजत पदक और 2018 गोल्ड कोस्ट कॉमनवेल्थ गेम्स में मीरा ने स्वर्ण पदक जीता था ।

Meerabai chanu record

साल 2016 रियो ओलंपिक में डिस-क्वालिफाई हुई थी मीराबाई

मीराबाई चानू ने साल 2016 में रियो ओलंपिक में पदक से चूकने के बाद से कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा है । अब वह लगातार सफलता के झंडे गाड़ रही है । साल 2016 रियो ओलंपिक में मीराबाई चानू अपने एक भी प्रयास में सही तरीके से वजन नहीं उठा पाई थी । उनके हर प्रयास को डिस-क्वालिफाई कर दिया गया था । 2016 में जब मीरा वजन नहीं उठा पाई थी , तो उनके नाम के आगे – ” डिड नॉट फिनिश ” लिखा गया था । इस ” डिड नॉट फिनिश ” टैग ने मीरा का मनोबल तोड़ दिया था । इस हार की वजह से मीरा अवसाद में चली गई थी । इतना ही नहीं इससे बाहर निकलने के लिए मीरा को डॉक्टर का सहारा लेना पड़ा था । उन्होंने वेटलिफ्टिंग को अलविदा कहने का मन भी बना लिया था । हालांकि, खुद को साबित करने की ललक ने मीरा को ऐसा नहीं करने दिया । इसके बाद से मीराबाई चानू देश की नई आइकन बनकर उभरी है ।

Meerabai chanu New History

वर्ल्ड वेटलिफ्टिंग चैंपियनशिप में पदक जीतने के बाद मीरा रोने लगी थी, मीराबाई

साल 2017 में वर्ल्ड वेटलिफ्टिंग चैंपियनशिप में मीरा ने स्वर्ण पदक अपने नाम किया था । ऐसा करने वाली वह पहली भारतीय एथलीट थी । इस इवेंट की तैयारी के लिए वह अपनी सगी बहन की शादी भी छोड़ दी थी । वर्ल्ड वेटलिफ्टिंग चैंपियनशिप में पदक जीतने के बाद मीरा रोने लगी थी। उन्हें उस वक्त भी 2016 की हार याद थी । इसके बाद मीरा ने गोल्ड कोस्ट में पिछले राष्ट्रमंडल खेलों में स्वर्ण और टोक्यो ओलंपिक में रजत पदक अपने नाम किया । इस तरह वह देश की सर्वश्रेष्ठ एथलीट बन गई ।

बता दें कि राष्ट्रमंडल खेलों के पिछले संस्करण में भारतीय वेटलिफ्टर्स ने पांच स्वर्ण सहित नौ पदक जीते थे । इस बार बर्मिंघम राष्ट्रमंडल खेलों में वेटलिफ्टिंग में अब तक भारत को चार पदक मिल गए है । मीराबाई से पहले वेटलिफ्टिंग में ही संकेत सरगर ने 55 किलोग्राम भारवर्ग में रजत पदक है । और गुरुराजा पुजारी ने 61 किलोग्राम भारवर्ग में कांस्य पदक अपने नाम किया था । वहीं, बिंदियारानी देवी ने रजत पदक अपने नाम किया  है ।

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