पिछले महीनों से पूरी दुनिया में जारी कोरोना वायरस के ओमिक्रॉन वैरिएंट के संक्रमण से पूरा देश जुझ रहा है। हालांकि कुछ दिनों से कोरोनावायरस के ओमिक्रॉन वेरिएंट में के कमी के मामले सामने आए और लोगों को थोड़ी राहत मिली, इसी बीच एक नई बीमारी ने स्वास्थ्य विशेषज्ञों की चिंता बढ़ा दी है। जो लोगों के लिए एक बार फिर चिंता का विषय बन चुका है।केरल में “मंकी फीवर” की दस्तक ने स्वास्थ्य विशेषज्ञों की चिंता और लोगों की चिंताएं बढ़ा दी है। राज्य के वायनाड जिले में 24 वर्षीय युवक इस बीमारी से ग्रस्त पाया गया है। स्वास्थ्य अधिकारियों ने इस बात की पुष्टि की है कि इस बीमारी का शिकार हुआ अब तक एक ही मरीज मिला है।केरल में इस वर्ष मंकी फीवर का यह सबसे पहला मामला सामने आया है। इस बीमारी का वायरस फ्लैविविराइडा फैमिली से बिलांग करता है। यह बीमारी बंदरों से इंसानों में तेज़ी से फैल सकती है।

 

पिछले कुछ महीनों से जहां कोरोना के ओमिक्रॉन वैरिएंट के संक्रमण से पूरा देश इसकी चपेट में था, तो कुछ दिनों पहले ही कोरोनावायरस के उम्मीदवार के मामलों में कमी सामने आई तो लोगों के लिए थोड़ी राहत देने वाली खबर थी। लेकिन अब इसी बीच एक बीमारी ने स्वास्थ्य विशेषज्ञों और लोगों की चिंता बढ़ा दी है। इस बीमारी को मंकी फीवर के नाम से जाना जा रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक यह बीमारी केरल के कुछ हिस्सों से क्यासानूर फॉरेस्ट डीजीज से संक्रमण के मामले सामने आ रहे है।

जहां पिछले कुछ दिनों से कोरोना वायरस के नए मामलों में लगातार कमी आई है, तो वही यह नई बीमारी लोगों का चिंता बढ़ा रही है।इस बीमारी के दौरान इसके लक्षणों में बुखार, तेज सिरदर्द, मानसिक परेशानियां, कंपकंपी और देखने में परेशानी जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है।

हालांकि केरल से पहले कर्नाटक में भी पिछले महीने मंकी फीवर के एक मामले की पुष्टि हुई थी, जिसके बाद स्वास्थ्य विभाग को अलर्ट पर रखा गया। केरल में भी इससे पहले मंकी फीवर के मामले सामने आ चुके है।आमतौर पर प्रभावित क्षेत्रों में अक्टूबर-नवंबर में यह बीमारी शुरू होती है और जनवरी-अप्रैल के बीच पीक पर होती है। आम भाषा में इस बीमारी को मंकी फीवर के नाम से जाना जा रहा है। वही रिपोर्ट की मानें तो इस बीमारी की पुष्टि तब हुई जब हाल ही में वन विभाग से संबंधित एक आदमी ने बुखार और बदन दर्द जैसे लक्षणों की शिकायत बताई थी। हालांकि रिपोर्ट सामने आई और इसकी जांच में मंकी फीवर का मामला सामने आया है। आसपास के 20 और लोगों की भी जांच की गई है, फिलहाल उनकी रिपोर्ट का अभी‌ भी इंतजार किया जा रहा है।

 

क्या होता है मंकी फीवर आइये जानते है –

रिपोर्ट के मुताबिक क्यासानूर फॉरेस्ट डिजीज केएफडी या मंकी फीवर एक वायरल रक्तस्रावी बुखार है, जो फ्लेविविरिड फैमिली से संबंधी वायरस से संक्रमण के कारण होने वाली बीमारी है।कई तरह के कीड़ों को इस वायरस का वाहक माना जाता है, इंसानों को इन कीड़ों के काटने से संक्रमण हो सकता है। मंकी फीवर एक वेक्टर जनित रोग है जो मुख्य रूप से बंदरों और मनुष्यों को प्रभावित करता है। आमतौर पर यह संक्रमण उन लोगों में फैलता है जो जंगलों से संबंधित व्यवसाय से जुड़े है या फिर संक्रमित बंदरों के संपर्क में रहते है।

 

मंकी फीवर के क्या है लक्षण-

अध्ययन में पाया गया है कि मंकी फीवर से संक्रमित लोगों में इसके लक्षण हल्के से गंभीर स्तर को हो सकते है। मनुष्यों में, शुरुआती तीन से आठ दिनों में तेज बुखार और सिरदर्द की दिक्कत होती है। इसके बाद आंतरिक रक्तस्राव के कुछ लक्षण जैसे नाक, गले, मसूड़ों या आंतों से रक्तस्राव की समस्या देखी जा सकती है। संक्रमितों को उल्टी, सुस्ती, कंपकंपी, बेचैनी और चिंता का भी अनुभव होता है। रिपोर्ट्स के मुताबिक यह रोग हमेशा घातक नहीं होता है। हर साल लगभग 500 लोग इससे संक्रमित होते है, जिनमें से 15 से 50 लोगों की मृत्यु हो जाती है।वही स्वास्थ्य विशेषज्ञों से मुताबिक जिन क्षेत्रों में पहले लोगों को संक्रमण रह चुका है वहां पर बीमारी को फैलने से रोकने के लिए टीकाकरण करवाना बहुत जरूरी है। टीका आमतौर पर 7-65 वर्ष आयु वर्ग के लोगों के लिए उपलब्ध है। एक महीने की अवधि के भीतर इसके दो खुराक दिए जाते है। हालांकि कुछ रिपोर्ट्स में बताया गया है कि एक बार जब व्यक्ति संक्रमित हो जाता है तो टीके प्रभावी नहीं होते हैं। ऐसे में लोगों को इससे बचाव करते रहना चाहिए।इस बीमारी के दौरान इसके लक्षणों में बुखार, तेज सिरदर्द, मानसिक परेशानियां, कंपकंपी और देखने में परेशानी जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है।

 

मंकी फीवर का क्या इलाज है-

मंकी फीवर का वैसे तो कोई विशिष्ट उपचार नही है। हालांकि लक्षणों की पुष्टि हो जाने पर रोगी तो तत्काल चिकित्सा सहायता लेने की सलाह दी जाती है। रोगियों में आम तौर पर डिहाइड्रेशन की समस्या हो जाती है, इससे बचाव के लिए ड्रिप्स लगाई जाती है। इसके साथ हेमरेजिक ब्लीडिंग की समस्या को नियंत्रित करने के लिए कुछ अन्य आवश्यक सुरक्षात्मक उपाय भी किए जाते है। डॉक्टरों की मानें तो आमतौर पर बुखार से पीड़ित रोगियों को पूर्ण आराम करने के साथ खूब पानी या तरल पदार्थ, प्रोटीन युक्त आहार लेने की सलाह देते है। चूंकि रिपोर्ट्स के मुताबिक यह बीमारी हमेशा घातक नहीं होती है और हर साल लगभग 500 लोग इससे संक्रमित होते है, जिनमें से 15 से 50 लोगों की ही मृत्यु  के मामले सामने आए है। इसलिए स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक जिन क्षेत्रों में पहले लोगों को संक्रमण रह चुका है, वहां पर बीमारी को फैलने से रोकने के लिए टीकाकरण करवाना बहुत जरूरी है। इसलिए अपने आप उन लोगों को मंकी फीवर के संक्रमण से बचाने के लिए हमें सबसे पहले प्राथमिकता टीकाकरण को ही देनी चाहिए। हालांकि मंकी बीमारी में कई तरह के कीड़ों को इस वायरस का वाहक माना जाता है, इंसानों को इन कीड़ों के काटने से संक्रमण हो सकता है। मंकी फीवर एक वेक्टर जनित रोग है जो मुख्य रूप से बंदरों और मनुष्यों को प्रभावित करता है। तो हमें संक्रमण से बचने के लिए इस बार वायरस के वाहको से भी रखरखाव करना बहुत ही आवश्यक है।

 

 

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