” गोल्डन ब्वॉय‌ ” उपनाम से मशहूर नीरज चोपड़ा ने एक बार फिर से इतिहास रच दिया है । टोक्यों ओलंपिक में स्वर्ण जीतने वाले इस भालाफेंक एथलीट ने अमेरिका में विश्व एथलेटिक्स चैंपियनशिप में देश को रजत पदक दिलाया । वह विश्व एथलेटिक्स में पदक जीतने वाले पहले भारतीय पुरुष बन गए है । उनसे पहले महिलाओं में दिग्गज एथलीट अंजू बॉबी जॉर्ज ने 2003 में ऐतिहासिक कांस्य पदक जीता था । नीरज चोपडा ने चौथे राउंड में 88.13 मीटर दूर भाला फेंकर रजत अपने नाम किया । ग्रेनाडा के एंडरसन पीटर्स ने दूसरे राउंड में 90.46 दूर भाला फेंककर स्वर्ण पदक अपने नाम किया है ।

 

नीरज चोपडा का शुरुआती जीवन, शिक्षा और स्पोर्ट्स करियर

24 दिसंबर साल 1997 को हरियाणा राज्य के पानीपत शहर के खांद्रा गाँव में जन्मे नीरज चोपडा को कौन नहीं जानता है । साल 2020 में भारत को स्वर्ण पदक दिलाने वाले प्रथम खिलाड़ी थे , जिसके बाद नीरज चोपडा ” गोल्डन ब्वाय ” के उपनाम से भारत में मशहूर हो गए । नीरज के पिता का नाम सतीश कुमार है , जो की पेशे से एक छोटे किसान है । उनकी माता का नाम सरोज देवी है जो की एक गृहणी है । जैवलिन थ्रो में नीरज की रुचि 11 वर्ष के उम्र में ही आ गई थी , जब वो अपना मोटापा को कम करने के लिए स्टेडियम मे क्रिकेट की प्रैक्टिस करने जाया करते थे । चूंकि क्रिकेट मे ज्यादा रुचि ना होने के कारण प्रैक्टिस के दौरान अपने खाली वक्त मे दूसरे खेल के खिलाडीओ को देखा करते थे , जहाँ से जेवलिन थ्रो के प्रति उनकी रुचि बढ़ने लगी । नीरज चोपडा ने अपने जेवलिन थ्रो की प्रैक्टिस उसी स्टेडियम मे चालू कर दी । एक साल के प्रशिक्षण के बाद, नीरज को पंचकूला के ताऊ देवी लाल स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स में भर्ती कराया गया, जहाँ उनके कोच नसीम अहमद ने उन्हें भाला फेंक के साथ लंबी दूरी की दौड़ में प्रशिक्षित किया । भाला फेंक खिलाड़ी नीरज चोपड़ा ने अपनी प्रारंभिक पढ़ाई हरियाणा से ही की है। नीरज ने अपने ग्रेजुएशन की डिग्री डीएवी कॉलेज चंडीगढ़ से प्राप्त की है । अपनी प्रारंभिक पढ़ाई को पूरा करने के बाद नीरज चोपड़ा ने लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी से बैचलर ऑफ आर्ट किया । नीरज चोपड़ा के कोच का नाम उवे है , जो कि जर्मनी देश के पेशेवर जैवलिन एथलीट रह चुके है ।

 

नीरज चोपड़ा को जीत के लिए करना पड़ा था बहुत संघर्ष

एक के बाद एक टूर्नामेंट में नीरज को सफलता यू हीं नहीं मिली । इसके लिए उन्होंने काफी त्याग किए है । एक समय घरवालों से बात करना भी कम कर दिया था । सोशल मीडिया से दूरी बनाई थी । नीरज चोपडा संयुक्त परिवार में रहते है । उनके माता-पिता के अलावा तीन चाचा शामिल है । एक ही छत के नीचे रहने वाले 19 सदस्यीय परिवार में चचेरे 10 भाई-बहनों में नीरज सबसे बड़े है । ऐसे में वह परिवार के लाडले है । उन्हें इस खेल में अगले स्तर पर पहुंचने के लिए वित्तीय मदद की जरूरत थी जिसमें बेहतर उपकरण और बेहतर आहार की आवश्यकता थी । ऐसे में उनके संयुक्त किसान परिवार जिसमें उनके माता-पिता के अलावा तीन चाचा शामिल है । एक ही छत के नीचे रहने वाले 19 सदस्यीय परिवार में चचेरे 10 भाई बहनों में नीरज सबसे बड़े है । ऐसे में वह परिवार के लाड़ले भी है । परिवार की हालत ठीक नहीं थी और उसे 1.5 लाख रुपये का जेवलिन नहीं दिला सकते थे । पिता सतीश चोपड़ा और चाचा भीम ने जैसे-तैसे सात हजार रुपये जोड़े और उन्हें अभ्यास के लिए एक जेवलिन लाकर दिया ।नीरज चोपड़ा के जीवन में उतार-चढ़ाव का सिलसिला जारी रहा और एक समय ऐसा भी आया जब नीरज के पास कोच नहीं था । मगर नीरज ने हार नहीं मानी और यूट्यूब चैनल से विशेषज्ञों की टिप्स पर अमल करते हुए अभ्यास के लिए मैदान में पहुंच जाते । वीडियो देखकर अपनी कई कमियों को दूर किया । इसे खेल के प्रति उनका जज्बा कहें कि जहां से भी सीखने का मौका मिला उन्होंने इसका पूरा फायदा लिया ।

 

वज़न कम करने के लिए थामा था भाला

खेलों से नीरज के जुड़ाव की शुरुआत हालांकि काफी दिलचस्प तरीके से हुई । संयुक्त परिवार में रहने वाले नीरज बचपन में काफी मोटे थे और परिवार के दबाव में वजन कम करने के लिए वह खेलों से जुड़े । वह 13 साल की उम्र तक काफी शरारती थे । उनके पिता सतीश कुमार चोपड़ा बेटे को अनुशासित करने के लिए कुछ करना चाहते थे । काफी मनाने के बाद नीरज दौड़ने के लिए तैयार हुए जिससे उनका वजन घट सके । उनके चाचा उन्हें गांव से 15 किलोमीटर दूर पानीपत स्थित शिवाजी स्टेडियम लेकर गए । नीरज चोपडा को दौड़ने में कोई दिलचस्पी नहीं थी और जब उन्होंने स्टेडियम में कुछ खिलाड़ियों को भाला फेंक का अभ्यास करते देखा तो उन्हें इस खेल से प्यार हो गया । उन्होंने इसमें हाथ आजमाने का फैसला किया और अब वह एथलेटिक्स में देश के सबसे बड़े खिलाड़ियों में से एक बन गए ।

 

जूनियर विश्व रिकॉर्ड बनाकर सुर्खियों में आए थे नीरज चोपडा

नीरज चोपडा ने साल 2016 में जूनियर विश्व चैंपियनशिप में 86.48 मीटर के अंडर-20 विश्व रिकॉर्ड के साथ एक ऐतिहासिक स्वर्ण पदक जीतने के बाद सुर्खियों में आए और फिर उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा । नीरज चोपड़ा ने साल 2017 में सेना से जुड़ने के बाद कहा था कि हम किसान है , परिवार में किसी के पास सरकारी नौकरी नहीं है और मेरा परिवार बड़ी मुश्किल से मेरा साथ देता आ रहा है । लेकिन अब यह एक राहत की बात है कि मैं अपने प्रशिक्षण को जारी रखने के अलावा अपने परिवार का आर्थिक रूप से समर्थन करने में सक्षम हूं ।

 

नीरज चोपड़ा को पीएम नरेंद्र मोदी ने दी जीत की बधाई

नीरज चोपड़ा ने एक बार फिर भारतवासियों को जश्न मनाने का मौका दिया है । उन्होंने विश्व एथलेटिक्स चैंपियनशिप में रजत पदक जीतकर इतिहास रच दिया है । वो इस प्रतियोगिता में रजत पदक जीतने वाले पहले भारतीय है । साथ ही इस प्रतियोगिता में कोई भी पदक जीतने वाले पहले भारतीय पुरुष है । नीरज चोपडा की इस जीत के बाद देशवासी जश्न में डूब गए है और सोशल मीडिया पर बधाईयों का तांत लग चुका है । भारतीय सेना से लेकर प्रधानमंत्री मोदी और पहलवान बजरंग पूनिया तक कई दिग्गजों ने नीरज को बधाई दी है । पीएम मोदी ने लिखा- “हमारे सबसे खास एथलीट में से एक के द्वारा शानदार उपलब्धि । विश्व चैंपियनशिप में एतिहासिक रजत पदक जीतने पर नीरज चोपड़ा को बधाई । भारतीय खेलों के लिए यह पल खास है । आने वाली प्रतियोगिताओं के लिए नीरज को शुभकामनाएं । ”

 

 

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