दुनियाभर में समय कोरोना के ओमिक्रॉन वैरिएंट का संक्रमण आज भी जारी है। वैज्ञानिकों के अध्ययनों के मुताबिक कोरोना के इस वैरिएंट में 35 से अधिक म्यूटेशनों के बारे में पता चला है, जो इस कोरोनावायरस के वैरिएंट को काफी अधिक संक्रामक बनाती है, यही कारण है जिन लोगों को वैक्सीन की दोनों डोज लग चुकी है उन‌ में भी इस वैरिएंट का संक्रमित पाया जा रहा है।ओमिक्रॉन वैरिएंट को लेकर हुए अब तक के अध्ययनों में वैज्ञानिकों ने इसके तमाम तरह के जोखिम कारकों के बारे में पता लगाया। इसी से संबंधित हाल ही में हुए एक अध्ययन में वैज्ञानिकों ने संक्रमण के जोखिम को लेकर एक बड़ा ऐलान किया है, जो सबके लिए बहुत ही चौंका देने वाला है।

ओमिक्रॉन वैरिएंट का संक्रमण आज भारत सहित दुनियाभर में जारी है।35 से अधिक म्यूटेशनों के बारे में पता लगने के बाद यह वायरस बहुत अधिक संक्रामक है,यही कारण है कि लोगों को वैक्सीन की दोनों डोज लग चुकी है उनको भी उनमें यह संक्रमित पाया जा रहा है। इसी से संबंधित हाल ही में एक अध्ययन में वैज्ञानिकों ने संक्रमण के जोखिम को लेकर एक बड़ा ऐलान किया है।इम्पीरियल कॉलेज लंदन के रिएक्ट अध्ययन में वैज्ञानिकों ने पाया कि कोरोना के ओमिक्रॉन वैरिएंट का खतरा अभी भी सब लोगों में बरकरार है। वैज्ञानिकों ने पाया कि जो लोग पहले भी कोरोना से संक्रमित रह चुके है, उनमें ओमिक्रॉन संक्रमण का खतरा अधिक हो सकता है। अध्ययन में संक्रमण को लेकर कई और महत्वपूर्ण बातों का पता चला है,संक्रमितों पर किए इस अध्ययन में वैज्ञानिकों ने पाया कि करीबन दो तिहाई यानी करीब 66 परसेंटेज लोगों में पहले भी यह कोरोना के किसी वैरिएंट से संक्रमित रह चुके है।

 

वैज्ञानिकों ने दी चेतावनी पहले से कोरोना संक्रमित रह चुके लोगों को विशेष सावधानी बरतने की आवश्यकता-

ओमिक्रॉन के संक्रमण जोखिम कारकों को जानने के लिए 5 से 20 जनवरी के बीच इंग्लैंड में एकत्र किए गए एक लाख से अधिक पीसीआर परीक्षणों का अध्ययन किया गया है। इस अध्ययन के अनुसार वैज्ञानिकों ने पाया कि लगभग 66% प्रतिभागी पहले भी वायरस से संक्रमित रह चुके थे। इसके अलावा 7.5 फीसदी संक्रमित प्रतिभागियों ने बताया कि उन्हें पहले लगता था कि वह वायरस से संक्रमित है लेकिन परीक्षण में इसकी पुष्टि नहीं हो पाई थी। इस आधार पर वैज्ञानिकों का कहना है कि पहले से कोरोना संक्रमित रह चुके लोगों को ओमिक्रॉन संक्रमण को लेकर विशेष सावधानी बरतने की आवश्यकता है।विशेषज्ञ इससे बचाव के लिए लोगों को ज्यादा अलर्ट रहने की सलाह दे रहे है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक कोरोना के इस नए वैरिएंट का खतरा उन लोगों में भी बरकरार है, जिन्हें वैक्सीन की दोनों डोज लग चुकी है‌।अध्ययनों से पता चलता है कि अत्यधिक संक्रामक माने जा रहे कोरोना के ओमिक्रॉन वैरिएंट से बचाव के लिए मास्क पहनना सबसे कारगर तरीका हो सकता है। हालांकि संक्रमण को रोकने के लिए सही मास्क चुनना और इसे सही ढंग से पहनना बहुत जरूरी है।ओमिक्रॉन जैसे संक्रामक वैरिएंट से बचाव के लिए एन-95 और एन-99 जैसे मास्क काफी प्रभावी हो सकते है। लेकिन एन-99 मास्क सामान्य से अधिक मोटे होते है और उन्हें लंबे समय तक पहनना मुश्किल होता है, इसलिए एन-95 मास्क आमतौर पर ज्यादा प्रयोग में लाए जाते है और सुरक्षा के नजरिए से भी यह असरदार है।सांस के रोगियों के लिए कोरोना का संक्रमण गंभीर समस्याओं का कारण बन सकता है। वहीं विशेष रूप से सीओपीडी, अस्थमा या किसी अन्य सांस की समस्या वाले लोगों के लिए ज्यादा देर तक एन 95 मास्क पहन कर रखना भी कठिन हो सकता है। ऐसे लोगों को ट्रिपल लेयर मास्क का प्रयोग करना चाहिए। एन-95 की तुलना में इसे कम सुरक्षात्मक जरूर माना जाता है पर यह कपड़े के मास्क से बेहतर है।

 

टीकाकरण कोरोनावायरस के खिलाफ सबसे अच्छा हथियार साबित हुआ-

दुनियाभर के विशेषज्ञों और वैज्ञानिकों का मानना है कि टीकाकरण अब कोरोनावायरस के खिलाफ सबसे अच्छा हथियार साबित हुआ है। यूके हेल्थ सिक्योरिटी एजेंसी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी का कहना है कि टीकाकरण आपको ओमिक्रॉन के कारण होने वाली गंभीर बीमारी और अस्पताल में भर्ती होने से बचाने का सबसे अच्छा तरीका है। अध्ययनों में पाया गया है कि वैक्सीन की बूस्टर डोज देकर लोगों को ओमिक्रॉन जैसे संक्रामक वैरिएंट्स से सुरक्षित रखने में मदद मिल सकती है।अध्ययन में बताया कि ओमिक्रॉन संक्रमण ने इंग्लैंड सहित दुनिया के तमाम हिस्सों में बहुत ही गंभीर तौर पर प्रभावित किया है और बहुत ही कम समय में इस वैरिएंट ने डेल्टा को लगभग रिप्लेस कर दिया है। वैज्ञानिकों का कहना है कि जिन लोगों को कोरोना की दूसरी लहर में डेल्टा वैरिएंट का संक्रमण हो चुका है उन्हें ओमिक्रॉन का खतरा अधिक हो सकता है। वैज्ञानिकों का मानना है कि कोरोना के रिइंफेक्शन को लेकर भी लोगों को विशेष सावधानी बरतने की आवश्यकता है।

 

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