राष्ट्रीय जांच एजेंसी ने गुरुवार को सुबह कई राज्यों में पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) से जुड़े परिसरों पर छापेमारी की । उत्तर प्रदेश, केरल, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक और तमिलनाडु सहित अन्य राज्यों में छापे मारे गये है । ख़बर यह भी है कि इस देशव्यापी छापेमारी में पीएफआई के 100 से अधिक शीर्ष नेताओं और पदाधिकारियों को गिरफ्तार किया गया है ।

क्या है पीएफआई ( PFI ) ?

पीएफआई (PFI) की स्थापना केरल में 2006 में हुई थी । साल 1992 में बाबरी मस्जिद विध्वंस के बाद तीन मुस्लिम संगठनों- केरल का राष्ट्रीय विकास मोर्चा, कर्नाटक फोरम फार डिग्निटी और तमिलनाडु की मनिथा नीति पासारी के विलय के बाद PFI का जन्म हुआ । बाबरी मस्जिद के विध्वंस के बाद, दक्षिण भारत में कई संगठन सामने आए थे, जिनमें से कुछ को मिलाकर PFI का गठन किया गया था । PFI खुद को अल्पसंख्यक समुदायों, दलितों और समाज के अन्य कमजोर वर्गों के लोगों को सशक्त बनाने के लिए प्रतिबद्ध एक नव-सामाजिक आंदोलन के रूप में बताता है ।

इन सबके चलते विवादों से पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया का इतिहास भी जानना जरूरी है । इसकी शुरुआत साल 2006 में केरल में हुई थी । 2006 में तीन मुस्लिम संगठनों का विलय के बाद पीएफआई अस्तित्व में आया ।तीनों संगठनों में राष्ट्रीय विकास मोर्चा, कर्नाटक फोरम फॉर डिग्निटी और तमिलनाडु की मनिथा नीति पासारी थे । साल 1992 में बाबरी मस्जिद के विध्वंस के बाद दक्षिण में इस तरह के कई संगठन सामने आए थे । उनमें से कुछ संगठनों को मिलाकर पीएफआई का गठन किया गया । तब से ही यह संगठन देशभर में कार्यक्रम आयोजित करवाता है ।

पीएफआई (PFI ) संगठन मध्य पूर्व के देशों से आर्थिक मदद भी मांगता है, जिससे उसे अच्छी-खासी फंडिंग मिलती है । पीएफआई का मुख्यालय कोझीकोड में था, लेकिन लगातार विस्तार के कारण इसका सेंट्रल ऑफिस राजधानी दिल्ली में खोला गया है ।

कितने राज्यों में सक्रिय है पीएफआई ?

पीएफआई ( PFI ) का दावा है कि वर्तमान में 22 राज्यों में उसकी इकाइयां है । पिछले कुछ वर्षों में PFI की अभूतपूर्व वृद्धि हुई है । PFI को एशिया के अलावा मध्य-पूर्वी देशों से भी फंडिंग मिलती है । पहले PFI का मुख्यालय कोझिकोड में था, लेकिन इसके विस्तार के बाद मुख्यालय को दिल्ली में स्थानांतरित कर दिया गया । PFI के प्रदेश अध्यक्ष नसरुद्दीन एलमारोम संगठन के संस्थापक नेताओं में से एक है । इसके अखिल भारतीय अध्यक्ष ई अबुबकर भी केरल के रहने वाले है ।

अमित शाह PFI

पीएफआई ( PFI ) और SDPI के कार्यकर्ताओं ने किया विरोध प्रदर्शन 

जांच एजेंसी की इस कार्रवाई के विरोध में कई जगह पीएफआई ( PFI ) और SDPI के कार्यकर्ताओं ने विरोध प्रदर्शन किया है । कर्नाटक के मंगलुरु में NIA की कार्रवाई के खिलाफ PFI और SDPI के समर्थकों ने प्रदर्शन किया । साथ ही तमिलनाडु के डिंडुगल में NIA की कार्रवाई के विरोध में PFI के 50 से अधिक कार्यकर्ता प्रदर्शन कर रहे है ।

NIA ने इस महीने की शुरुआत में एक पीएफआई (PFI) मामले में तेलंगाना, आंध्र प्रदेश में 40 स्थानों पर छापेमारी की थी, जिसमें चार लोगों को हिरासत में लिया गया था । जांच एजेंसी ने तब तेलंगाना में 38 स्थानों (निजामाबाद में 23, हैदराबाद में चार, जगत्याल में सात, निर्मल में दो, आदिलाबाद और करीमनगर जिलों में एक-एक) और आंध्र प्रदेश में दो स्थानों (कुरनूल और नेल्लोर में एक-एक) पर तलाशी ली थी । उस दौरान, तलाशी अभियान में डिजिटल डिवाइस, दस्तावेज, दो चाकू और 8,31,500 रुपये नकद सहित अन्य आपत्तिजनक सामान जब्त की थी । NIA ने बताया कि सभी आरोपी आतंकवादी गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए ट्रेनिंग कैंप आयोजित कर रहे थे ।

देश भर में 10 राज्यों में बड़ी कार्रवाई करते हुए, NIA, ED और राज्य पुलिस ने PFI के 100 से अधिक कैडरों को गिरफ्तार किया है । जानकारी के अनुसार, PFI के दिल्ली प्रमुख परवेज अहमद को भी गिरफ्तार किया गया है । सूत्रों के मुताबिक तेलंगाना, केरल, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, दिल्ली, राजस्थान, बिहार और कई अन्य राज्यों में छापेमारी की कार्रवाई हुई है ।

अमित शाह PFI

टेरर फंडिंग मामले में पीएफआई ( PFI ) के ठिकानों को लेकर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की बैठक

देशभर में टेरर फंडिंग मामले में पीएफआई ( PFI ) के ठिकानों पर हुई कार्रवाई को लेकर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बैठक की है । इस बैठक में NSA, गृह सचिव, NIA DG सहित अधिकारियों ने भाग लिया। बता दें कि टेरर फंडिंग मामले में NIA, ED और राज्य पुलिस की संयुक्त टीम ने 10 से अधिक राज्यों में PFI के ठिकानों पर छापा मारा है । छापेमारी में अब तक PFI के 100 से अधिक सदस्यों की गिरफ्तारी हुई है । इनमें PFI के कई प्रमुख नेता भी शामिल है । ये तलाशी आतंकवाद को फंडिंग करने, ट्रेनिंग कैंप आयोजित करने और प्रतिबंधित संगठनों में शामिल होने के लिए लोगों को कट्टरपंथी बनाने में शामिल व्यक्तियों के घरों और कार्यालयों में की जा रही है ।

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