7 फरवरी रविवार को सुबह 8:12 मिनट पर 92 साल वर्षीय भारत रत्न से सम्मानित स्वर कोकिला लता मंगेशकर निधन हो गया।स्वर कोकिला लता मंगेशकर के आवाज जादू हमेशा लोगों के ज़हन में कायम रहेगा और शायद ही कोई ऐसा व्यक्ति होगा जिन्हें लता मंगेशकर जी की आवाज पसंद ना हो।8 जनवरी को लता जी कोरोना वायरस से संक्रमित हो गई थी‌ और इसके बाद से ही उनका स्वास्थ्य ठीक नहीं थी।कोरोना वायरस से संक्रमित के चलते ही उन्हें मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में भर्ती कराया गया था‌ और उन्हें आईसीयू में रखा गया था। लता जी के फैंस भी उनके तबीयत सही होने के लिए दुआ मांग रहे थे, लेकिन वह पूरी दुनिया को रूला कर चली गई।

 

लता मंगेशकर जी का शुरुआती जीवन-

भारत की सबसे प्रतिष्ठित गायिका है लता मंगेशकर को भारत के सबसे सर्वोच्‍च सम्‍मान भारत रत्न,पद्म भूषण, दादा साहेब फाल्के पुरस्कार, पद्म विभूषण सहित कई पुरस्कारों से सम्मानित किया जा चुका है। उनके फैंस उन्‍हें मां सरस्वती का अवतार मानते है। उनका जन्म 28 सितंबर 1929 में मध्यप्रदेश के इंदौर शहर में हुआ और वह एक मराठा परिवार से बिलॉन्ग करती है। बचपन में सब उन्हें लता मंगेशकर को हेमा कह कर बुलाते थे। लता मंगेशकर के पिता का नाम पंडित दीनानाथ मंगेशकर है‌ और वह भी एक संगीतज्ञ थे। उनकी मां का नाम शेवंती मंगेशकर है‌ और वह गुजराती थी। शेवंती दीनानाथ मंगेशकर की दूसरी पत्नी थी‌ और वह दीनानाथ मंगेशकर की पहली पत्नी नर्मदा की सगी बहन थी। नर्मदा मंगेशकर के निधन के बाद दीनानाथ मंगेशकर ने शेवंती से शादी कर ली।5 साल की उम्र से ही लता मंगेशकर जी संगीत में रुचि रखने लगी थी‌ और उन्होंने एक इंटरव्‍यू में उन्होंने यह बताया था कि वह जब पांच वर्ष की थी, तभी से वह अपने गीत अपनी माँ को सुनाया करती थी। सन् 1942 में उनके पिता का देहांत हो गया‌ था, तब वह सिर्फ उम्र केवल 13 वर्ष थी।लता मंगेशकर जी अपने भाई-बहनों में सबसे बड़ी थी। इसके अलावा इनकी तीन बहनें मीना खाड़ीकर, आशा भोसले और उषा मंगेशकर है और लता मंगेशकर के एक भाई भी है जिनका नाम हृदयनाथ मंगेशकर है। लता मंगेशकर के साथ इनकी तीनों बहनें और भाई भी संगीत की दुनिया से ही बिलॉन्ग करते है।आपको जानकर हैरानी होगी कि लता मंगेशकर अपने जीवनकाल में सिर्फ एक दिन के लिए स्‍कूल गई थी। दरअसल पहले ही दिन जब लता स्‍कूल गई तो वह अपनी बहन आशा को भी साथ ले गई थी, ल‍ेकिन उनकी टीचर ने आशा को क्‍लास में बैठने की अनुमति नहीं दी, जिस कारण वह फिर कभी स्‍कूल नहीं गई।

साल 1942 में पिता की मृत्‍यु के बाद परिवार की पूरी जिम्‍मेदारी लता मंगेशकर जी पर आ गई। नवयुग चित्रपट मूवी कंपनी के मालिक और मंगेशकर परिवार में बहुत अच्‍छे संबंध थे, उनका करियर अभिनय और गायिका के रूप में स्‍थापित करने में इनका ही योगदान था। शुरू से ही लता मंगेशकर‌ जी को अभिनय में कोई रूचि नहीं थी, लेकिन मजबूरियों के कारण उन्‍होंने कुछ हिंदी और मराठी फिल्‍मों में अभिनय भी किया। साल 1942 में मंगला गौर, 1943 में माझे बाल, 1944 में गजभाऊ, 1945 में बड़ी मां, 1946 में जीवन यात्रा जैसी कई फिल्‍मों में लता मंगेशकर ने छोटे-मोटे किरदार निभाए। इसके बाद साल 1942 में लता मंगेशकर ने अपना पहला गाना मराठी फिल्‍म “कीती हसाल” के लिए गाया। इस गाने के लिए उन्हें 25 रूपये मिले, लेकिन इस गाने को फाइनल कट के बाद फिल्‍म से हटा दिया गया।बचपन से ही गायिका बनने का सपना देखने वाली लता मंगेशकर को 1949 में फिल्म महल का गाना “आएगा आनेवाला” से पहचान मिली।इसके बाद साल 1947 में बसंत जोगलेकर ने अपनी फिल्म “आपकी सेवा में” लता मंगेशकर को गाने का मौका दिया, जिसके बाद उनकी आवाज़ को बहुत सराहना मिली। उन्होंने साल 1949 में आई फिल्म “महल” के गाने “आएगा आनेवाला” से बहुत नाम कमाया। यह गाना अभिनेत्री मधुबाला पर फिल्माया गया था,जो बड़े पर्दे पर हिट साबित हुई थी।

 

अपने घर में सबसे बड़ी होने के बावजूद भी लता मंगेशकर ने नहीं की शादी-

लता मंगेशकर अपने घर में सबसे बड़ी थी। महज़ 13 साल की वर्ष में ही उनके पिता का देहांत हो गया था। जिसके बाद उन पर घर का सारा बोझ आ गया था। अपनी बहनों और भाई से बड़े होने के नाते लता ने घर की ज़िम्‍मेदारी अपने कंधों पर उठा ली, जिसके लिए लता जी ने शादी न करने का फैसला लिया। लता मंगेशकर जी ने अपने एक इंटरव्‍यू में बताया भी था कि अगर वह चाहें भी तो वह शादी नहीं कर सकती थी, लेकिन उन पर उनके भाई-बहनों की ज़िम्मेदारी थी। उन्होंने इंटरव्यू में बताया था कि जब वह 13 साल की थीं तभी उनके पिता का देहांत हो गया था। ऐसे में घर के सभी सदस्यों की जिम्मेदारियां मेरे पर गई थी। क्योंकि वह अपने भाई-बहनों में सबसे बड़ी थी। इसी वज़ह से वह कम उम्र में ही पैसे कमाने लगी थी। कई बार उन्हें शादी का ख्याल आता भी था तो वह उस पर अमल नहीं कर सकती थी। क्योंकि वह अपने भाई-बहनों और घर की जिम्मेदारियों को देखते-देखते ही वक्त चला गया और वे ताउम्र शादी नहीं कर पाई।

अपनी पतली आवाज़ के कारण रिजेक्शन का शिकार हो चुकी है लता मंगेशकर-

लता मंगेशकर भारत की शान है। लेकिन एक समय ऐसा भी था, जब उन्हें अपनी आवाज़ की कारण से ही रिजेक्शन झेलना पड़ा। उन्हें पतली आवाज़ की कारण से उन्हें फिल्मों से बाहर किया गया था। लेकिन बहुत कड़ी मेहनत के दम पर उन्होंने दुनिया में अपना नाम बनाया। लता मंगेशकर ने अपने करियर में 30 हजार से भी ज्यादा गाने गाए है। एक समय ऐसा भी था जब जैसे ही लता जी ने गाना शुरू किया दिलीप कुमार ने उन्हें टोकते हुए कहा कि मराठियों की आवाज से दाल भात का गंध आती है। दरअसल अपनी टिप्पणी के जरिए दिलीप कुमार लता जी के उच्चारण की तरफ इशारा कर रहे थे। दिलीप कुमार की इस टिप्पणी के बाद लता जी ने हिंदी और उर्दू सीखने के लिए एक टीचर रखा और अपनी उच्चारण को सही किया।सुरों के साथ-साथ धुन की भी पक्की लता मंगेशकर ने सबकी बताई गलतियों से सबक लेते हुए देश ही नहीं बल्कि दुनिया में भी अपनी एक अलग पहचान बनाई है। आज लता मंगेशकर स्वर कोकिला के नाम से पहचानी जाती है। इतना ही नहीं फिल्म इंडस्ट्री में कमाई अपनी शोहरत की बदौलत ही आज वह उस मुकाम पर है, जहां पहुंचना सबके बस की बात नहीं।

सन् 1962 के भारत-चीन युद्ध के बाद शहीदों को श्रद्धांजलि देने के लिये एक कार्यक्रम का आयोजन किया गया था। इस में तत्कालीन प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू भी उपस्थित थे। इस समारोह में लता जी के द्वारा गाए गये गीत “ऐ मेरे वतन के लोगों” को सुन कर सब लोग भाव-विभोर हो गये थे। पं नेहरू की आँखें भी भर आई थी। ऐसा था उनका भावपूर्ण एवं मर्मस्पर्शी स्वर। आज भी जब देश-भक्ति के गीतों की बात चलती है तो सब से पहले इसी गीत का उदाहरण दिया जाता है।

 

लता मंगेशकर का कान्टोवर्सीज-

पिता के निधन के बाद लता मंगेशकर के परिवार का बोझ उनपर आ गया था। उनके पिता की मौत के 7 साल बाद जब धीरे-धीरे घर की स्थिति सुधरने लगी।तब लता मंगेशकर की छोटी बहन आशा भोसले ने प्रेम विवाह के लिए अपने परिवार वालों से ही बगावत कर दी थी। आशा भोसले गणपत राव भोसले से शादी करना चाहती थी। जिससे लता बहुत परेशानियां हुई और दोनों के बीच बातचीत बंद हो गई थी। इसके बाद साल 1949 में आशा ने गणपतराव भोसले से शादी कर ली थी।

 

एक समय में लता मंगेशकर और मोहम्मद रफ़ी में ऐसी अनबन हो गई थी कि दोनों ने बहुत समय तक एक दूसरे से बात तक नही की। इसको लेकर दोनों ही बहुत चर्चा में भी रहे थे।इस अनबन का कारण दोनों में रॉयल्टी को लेकर हुई थी। जिसकी वजह से करीब 3 साल दोनों ने एक दूसरे से बात नहीं की। बता दें कि लता अपने गाए हुए गानों की रॉयल्टी चाहती थीं जिसमें मोहम्‍मद रफ़ी ने उनका साथ नहीं दिया। जिसकी वजह से दोनों के बीच बहस हो गई। इस पर मोहम्‍मद रफ़ी का कहना था कि सिंगर्स को जब पेमेंट मिल चुकी है, तो रॉयल्टी का कोई मतलब नहीं था।

 

 

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