सुप्रीम कोर्ट में हिजाब मामले की सुनवाई पूरी हो गई है । हालांकि कोर्ट ने अभी अपने आदेश को सुरक्षित रख लिया है । बुधवार को सुनवाई करने वाली बेंच ने अधीर होकर अपील की थी कि अब धैर्य जवाब दे चुका है सुनवाई जल्दी पूरी हो ।

 

कर्नाटक के स्कूलों में हिजाब पर रोक मामले में सुनवाई पूरी

सुप्रीम कोर्ट में गुरुवार को कर्नाटक के स्कूलों में हिजाब पर रोक मामले में सुनवाई पूरी हो गई है । कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया है । जस्टिस हेमंत गुप्ता और सुधांशु धूलिया की बेंच ने 10 दिन तक मामले की सुनवाई की । इस दौरान कोर्ट ने हिजाब समर्थक याचिकाकर्ताओं के अलावा कर्नाटक सरकार और कॉलेज शिक्षकों की भी दलीलें सुनी । उल्लेखनीय है कि मुस्लिम छात्राओं ने कर्नाटक हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है । दरअसल हाईकोर्ट ने स्कूलों मे हिजाब पर रोक को सही ठहराया था ।

हिजाब केस सुप्रीम कोर्ट

15 मार्च को हाई कोर्ट ने उडुपी स्थित सरकारी प्री-यूनिवर्सिटी गर्ल्स कालेज की मुस्लिम छात्राओं के एक वर्ग की याचिकाओं को खारिज कर दिया था, जिसमें क्लासरूम में हिजाब पहनने की इजाजत मांगी गई थी । हाईकोर्ट ने कहा था कि यह आवश्यक धार्मिक गतिविधियों का हिस्सा नहीं है । 5 फरवरी साल 2022 को राज्य सरकार ने अपने आदेश में वैसे कपड़ों पर रोक लगा दिया था जो समानता, संप्रभुता को खंडित करता है ।

हिजाब मामले में सुप्रीम कोर्ट में हुई घंटों बहस 

सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं के वकील से कहा कि वे अपनी बहस जल्द पूरी करें, क्योंकि अब हमारा धैर्य जवाब दे रहा । याचिकाकर्ताओं की ओर से दलील पेश करने वाले वकीलों में शामिल हौजफा अहमदी से न्यायमूर्ति हेमंत गुप्ता और न्यायमूर्ति सुधांशु धूलिया की पीठ ने कहा कि गुरुवार को हम आप सभी को एक घंटे का समय देंगे । उसी में आपको बहस पूरी करनी है । अब सुनवाई बहुत हो गई । हमारा धैर्य जवाब दे रहा है ।

बुधवार को मामले में 9 वें दिन की सुनवाई की गई, जिसमें राज्य सरकार के अलावा उन कालेज शिक्षकों ने भी जिरह की जो कालेज में हिजाब के पक्ष में नहीं थे । कर्नाटक सरकार ने बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में स्कूलों में हिजाब पर प्रतिबंध को सही ठहराया था । राज्य सरकार ने कहा था कि उसका आदेश किसी धर्म के खिलाफ नहीं है । राज्य भगवा शाल, हिजाब आदि सबका सम्मान करता है, लेकिन स्कूल में निर्धारित यूनिफार्म है । राज्य सरकार ने कहा कि केवल कक्षा को छोड़कर हिजाब पहनने पर कहीं रोक नहीं है ।

कर्नाटक में हिजाब बैन के खिलाफ याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट में आज एक बार फिर से सुनवाई हुई । सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया । सुनवाई के दौरान कर्नाटक सरकार की तरफ से जहां एडवोकेट जनरल प्रभुलिंग नवदगी ने दलीलें पेश कीं वहीं याचिकाकर्ता की तरफ से वरिष्ठ वकील सलमान खुर्शीद ने दलीलें पेश की । बता दें कि हिजाब बैन को चुनौती देने वाली याचिकाओं को जस्टिस हेमंत गुप्ता और जस्टिस सुधांशु धूलिया की बेंच सुन रही थी ।

क्या है हिजाब विवाद ?

कर्नाटक में हिजाब विवाद उस समय शुरू हुआ था, जब उडुपी के एक सरकारी स्कूल में कुछ छात्राओं को हिजाब पहनकर कक्षा में जाने पर रोक लगा दी गई थी। इसे लेकर देश के कई हिस्सों में काफी प्रदर्शन हुए थे । इसी दौरान आठ फरवरी को मांड्या में पीईएस कॉलेज के अंदर भगवा शॉल पहने लड़कों ने जयश्री राम के नारे लगाए ।

जिसके बाद विवाद और बढ़ गया । जय श्री राम के नारे लगाती भीड़ के सामने 19 साल की मुस्कान खान ने अल्लाह हू अकबर के नारे लगाए थे । इसके बाद मामला कर्नाटक हाईकोर्ट पहुंचा और हाईकोर्ट ने फैसला दिया था कि हिजाब इस्लाम धर्म का अभिन्न अंग नहीं है, इसलिए राज्य सरकार को इसे स्कूलों के अंदर यूनिफॉर्म का हिस्सा बनाने का निर्देश नहीं दिया जा सकता ।

हिजाब केस को लेकर इसलिए हुआ बवाल

दरअसल कर्नाटक में कुछ लोग मुस्लिम छात्राओं के कॉलेज में हिजाब पहन के जाने का विरोध कर रहे थे । जबकि कुछ का कहना है कि मुस्लिम छात्राओं का हिजाब पहनना वाजिब है । इसी को लेकर कर्नाटक में बहुत अधिक विवाद हो रहा है जोकि अब हाई कोर्ट तक पहुँच गया ।

बता दें कि हिजाब विवाद का जन्म कर्नाटक के उडुपी में हुआ था । इसकी शुरुआत पिछले साल दिसंबर में हुई थी ।उडुपी के एक महाविद्यालय में इस घटना की शुरुआत हुई थी । यहां छात्राएं ड्रेसकोड को फॉलो न करके हिजाब में कॉलेज आई थी । कर्नाटक में ऐसी घटनाएं कुंडापुर, बिंदूर जैसे इलाकों में भी देखने को मिली है । मुस्लिम छात्राओं को हिजाब पहन कर क्लासेज में प्रवेश नहीं मिला जिसके बाद ये सारा विवाद तेज़ी पकड़ने लगा ।

जब मुस्लिम छात्राएं हिजाब पहन कर कॉलेज आने लगीं तो हिंदू छात्राएं भगवा स्कार्फ लिए कॉलेज आने लगे। ऐसी घटना के बाद संस्थानों को सख्त रवैया अपनाना पड़ा । संस्थानों ने हिजाब और स्कार्फ दोनों पर ही अपनी असहमति जताई और इन दोनो पर रोक लगा दिया । बाद में यहां स्थिति गंभीर होने पर पुलिस की मदद ली गई थी ।

हिजाब और बुर्के में डिफरेंस

इस्लाम में हिजाब का अभिप्राय परदे से है । जानकारों की मानें तो कुरान में हिजाब कपड़े के तौर पर नहीं बल्कि परदे के तौर पर बताया गया है । औरत और मर्द दोनो को ढीले और शालीन कपड़े पहनने के लिए कहा गया है । अक्सर हिजाब और नकाब को एक ही समझा जाता है । पर नकाब चेहरे को ढांकने का कपड़ा होता है । हालाकि इस्लाम में चेहरे को ढांकने की बात नही की गई है । इसमें सर और बाल छुपाने का ज़िक्र आता है । कट्टरपंथी देशों में अक्सर महिलाओं को नकाब डालने के लिए कहा जाता है ।

भारत जैसे देशों में अक्सर मुस्लिम महिलाओं को बुर्के में देखा जा सकता है । बुर्का नकाब का ही एक अलग प्रारूप है।  बुर्के में आंखे भी ढंकी होती हैं। आम तौर पर इसका रंग काला होता है । आपको बता दे कि एक बुर्के की बनावट लबादे की तरह होती है । इसे एक ही रंग का रखा जाता है जिससे उस महिला से कोई गैर आकर्षित न हो पाए ।

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