समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने बुधवार को गठबंधन प्रत्याशियों की एक और सूची जारी की जिसमे सिराथू से डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य के खिलाफ अपना दल (कमेरावादी) से पल्लवी पटेल को उतारा है, और वही भारतीय जनता पार्टी छोड़ सपा में शामिल हुए स्वामी प्रसाद मौर्य को भी टिकट दिया है। जारी हुए सूची में कुल तीन उम्मीदवारों के नाम है। पहला नाम लखनऊ सरोजनीनगर से अभिषेक मिश्रा, दूसरा कौशांबी के सिराथू से पल्लवी पटेल, और तीसरा और आखिरी कुशीनगर के फाजिलनगर से स्वामी प्रसाद मौर्य ये लिस्ट अहम इसलिए भी है क्योंकि भारतीय जनता पार्टी की सरकार में मंत्री रहे स्वामी प्रसाद मौर्य का भी नाम है। और पल्लवी पटेल जोकि अपना दल (एस) की राष्ट्रीय अध्यक्ष व भाजपा सरकार में केंद्रीय मंत्री अनुप्रिया पटेल की छोटी बहन है। आपको बता दे की पल्लवी पटेल की मां अपना दल कमेरावादी पार्टी को राष्ट्रीय अध्यक्ष है और उन्होंने समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन भी किया है। जैसा की हमेशा से ही समाजवादी पार्टी जातिगत कार्ड खेलती आ रही। और शायद यही कारण है की कौशांबी के सिराथू से पिछड़ा वर्ग को लुभाने के लिए पल्लवी पटेल को मैदान में उतारा है। और वो इस सीट के लिए बाहरी नेता भी नही है तो ये डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य के खिलाफ मजबूत प्रत्याशी हो सकती है।

 

फाजिलनगर से स्वामी प्रसाद मौर्य मैदान में।

 

कुछ दिन पहले यूपी कैबिनेट को छोड़ कर समाजवादी पार्टी में जाने वाले स्वामी प्रसाद मौर्य को कुशीनगर के फाजीलपुर से सपा ने अपना उम्मीदवार बनाया है। स्वामी प्रसाद मौर्य 2017 के चुनाव में कुशीनगर से पडरौना से जीते थे। और कयास लगाया जा रहा था की शायद समाजवादी पार्टी उन्हें वही से उम्मीदवार बना सकती है। लेकिन ऐसा हुआ नही क्योंकि भारतीय जनता पार्टी ने आरपीएन सिंह दांव खेला है और आरपीएन सिंह के सामने स्वामी प्रसाद के मुश्किल हो सकता था। इसलिए इस बार इनकी सीट बदल दी है। अभी कुछ ही दिन पहले ‘पडरौना के राजा’ पूर्व केंद्रीय मंत्री आरपीएन सिंह कांग्रेस को छोड़ बीजेपी में शामिल हो गए है। क्यूंकि अटकलें ये है की भारतीय जनता पार्टी आरपीएन सिंह को पडरौना से अपना उम्मीदवार बना सकती है। आरपीएन सिंह पडरौना सीट से 1996, 2002, 2007 में विधायक रहे है। कुर्मी – सैधवार जाति से आपने वाले कुंवर रतनजीत प्रताप नारायण सिंह को यहां पर राजा साहेब के नाम से पुकारा जाता है। और पडरौना में कुर्मी वोटो की जनसंख्या ज्यादा है और अपने इलाके के सजातीय वोटों पर उनकी अच्छी पकड़ है। और यही कारण है की अगर यहां से सपा स्वामी प्रसाद को उम्मीदवार बनाती तो मौर्य के लिए मुश्किल हो जाती। आपको बता दे स्वामी प्रसाद मौर्य बसपा के वरिष्ठ नेता और मंत्री के तौर पर 2009 के लोकसभा चुनाव में आरपीएन सिंह से मुलाबलें में हार का सामना करना पड़ा था। और शायद इसी परसेप्शन की वजह से स्वामी प्रसाद मौर्य के अंदर कमजोर पड़ने का डर है। हालांकि 2012 में बसपा प्रत्याशी और 2017 में बीजेपी प्रत्याशी के रूप में पडरौना से जीत हासिल किया था।

 

फाजिलनगर पर भी आसान नहीं।

 

अगर बात की फाजिलनगर सीट की तो ये भी स्वामी प्रसाद के लिए आसान नही होगा क्योंकि पिछले दो बार से यहां पर भारतीय जनता पार्टी दबदबा रहा है। फाजिलनगर विधानसभा से सीट से बीजेपी ने पुराने नेता और 2012 और 2017 में जीते गंगा सिंह कुशवाहा के बेटे सुरेन्द्र सिंह कुशवाहा को टिकट दिया है। गंगा सिंह कुशवाहा जनसंघ के जमाने से ही आरएसएस के करीब रहे। यह विधानसभा कुशवाहा बाहुल्य के रूप में जाने जानी जाती है। परिसीमन के बाद 2012 के विधानसभा सभा चुनाव में भाजपा के टिकट पर गंगासिंह कुशवाहा सपा के लहर के बावजूद लगभग पांच हजार से चुनाव जीतकर विधानसभा सभा पहुंचे। इसके बाद से यह 2017 में सपा के प्रत्याशी को लगभग 42 हजार मतों से हराकर दोबारा विधानसभा पंहुचे।

 

फाजिलनगर का जातिगत समीकरण

 

3 लाख 40 हजार से अधिक वोटर वाले फाजिलनगर विधानसभा चुनाव में 10 फीसदी ब्राह्मण वोटर्स हैं, जबकि 7 फीसदी क्षत्रिय, 8 फीसदी वैश्य मतदाता है। फाजिलनगर में 14 फीसदी मुस्लिम मतदाता हैं तो 17 फीसदी अनूसिचित जाति के मतदाता, 5 फीसदी यादव और 10 फीसदी कुशवाहा हैं।

 

सिराथू का जातिगत समीकरण

 

अगर इस सीट की जातिगत समीकरण की बात करें तो यहां पर सबसे ज्यादा अनुसूचित जाति वर्ग के मतदाता है। और दूसरे वर्ग के मतदाता पिछड़े वर्ग के हैं। उसके बाद सभी वर्ग के मिश्रित मतदाता है। लेकिन कहा यह जाता है कि यहां पर हार या जीत का फैसला अनुसूचित जाति के मतदाताओं के हाथ में रहता है। सिराथू में मौजूदा समय में 3,65,153 कुल मतदाता है। इनमें से पुरुष मतदाता 1,95,660 और महिला मतदाता 1,69,492 हैं।

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