भ्रष्टाचार की नींव पर खड़ा सुपरटेक बिल्डर के ट्विन टावर 200 करोड़ से ज्यादा की लागत में बने इन टावर्स को गिराने में करीब 20 करोड़ का खर्च आने की बात कही जा रही है । ऐसे में एक सवाल हर किसी के मन में कौंध रहा है कि आखिर इसे बनाने वाला शख्स कौन है  ? इन ट्विन टावर्स का मालिक कौन है और कैसे उसने इतनी बड़ी इमारत खड़ी कर दी ? आइए जानते हैं इसके पीछे की कहानी –

ट्विन टावर के नाम पर भ्रष्टाचार की इमारत खड़ी करने की साजिश 2009 में ही रच ली गई थी । स्थानीय निवासियों ने बताया कि दूसरे संशोधित प्लान के हिसाब से 22 मंजिल की इमारत की मंजूरी मिली थी, लेकिन बिल्डर ने इसकी नींव 40 मंजिला इमारत की क्षमता के हिसाब से तैयार कराई थी ।

सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर सेक्टर-93ए स्थित सुपरटेक एमराल्ड कोर्ट के ट्विन टावर रविवार दोपहर 2:30 बजे जमींदोज कर दी गई । 32 मंजिला एपेक्स (100 मीटर) व 29 मंजिला सियान (97 मीटर) टावर में 3500 किलोग्राम विस्फोटक लगाकर तारों से जोड़ दिया गया है । महज 9 से 12 सेकेंड में ये इमारतें जमींदोज कर दी गई ।

ट्विन टावर

सुप्रीम कोर्ट में क्यों पहुंचा ट्विन टावर का मामला ?

इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सुपरटेक सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया । सुप्रीम कोर्ट में सात साल चली लड़ाई के बाद 31 अगस्त 2021 को सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले को बरकार रखा । सुप्रीम कोर्ट ने तीन महीने के अंदर ट्विन टावर को गिराने का आदेश दिया ।

ट्विन टावर कैसे थी अवैध ?

सुपरटेक को 13.5 एकड़ जमीन आवंटित की गई थी । परियोजना का 90 फीसदी यानी करीब 12 एकड़ हिस्से पर 2009 में ही निर्माण पूरा कर लिया गया था । 10 फीसदी हिस्से को ग्रीन जोन दिखाया गया । साल 2011 आते-आते दो नए टावरों के बनने की खबरें आने लगी ।

12 एकड़ में जितना निर्माण किया गया, उतना एफएआर का खेल खेलकर दो गगनचुंबी इमारतों के जरिये 1.6 एकड़ में ही करने का काम तेजी से जारी था । अंदाजा लगाया जा सकता है कि 12 एकड़ में 900 परिवार रह रहे हैं, इतने ही परिवार 1.6 एकड़ में बसाने की तैयारी थी । ‌

फ्लैट बायर्स ने 2009 में आरडब्ल्यू बनाया था । इसी आरडब्ल्यू ने सुपरटेक के खिलाफ कानूनी लड़ाई की शुरुआत की । ट्विन टावर के अवैध निर्माण को लेकर आरडब्ल्यू ने पहले नोएडा अथॉरिटी मे गुहार लगाई । अथॉरिटी में कोई सुनवाई नहीं होने पर आरडब्ल्यू इलाहाबाद हाईकोर्ट पहुंचा ।

साल 2014 में हाईकोर्ट ने ट्विन टावर तोड़ने का आदेश जारी किया । इस लड़ाई में यूबीएस तेवतिया, एसके शर्मा, रवि बजाज, वशिष्ठ शर्मा, गौरव देवनाथ, आरपी टंडन, अजय गोयल ने अग्रणी भूमिका निभाई ।

ट्विन टावर

पूरे मामले पर सुपरटेक ने बयान

ट्विन टावर गिराए जाने से कुछ समय पहले सुपरटेक का बयान आया है । बयान में कहा गया है कि प्राधिकरण को पूरा भुगतान करने के बाद हमने टावर का निर्माण किया था । हालांकि, माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने तकनीकी आधार पर निर्माण को संतोषजनक नहीं पाया है और दोनों टावरों को ध्वस्त करने के आदेश जारी किए । हम सर्वोच्च न्यायालय के आदेशों का सम्मान करते हैं और उसे लागू करने के लिए प्रतिबद्ध है ।

हमने एक विश्व प्रसिद्ध कंपनी एडिफिस इंजीनियरिंग को ध्वस्त का काम सौंपा है, जिनके पास ऊंची इमारतों को सुरक्षित रूप से गिराने में विशेषज्ञता है । हमने करीब 70000 से अधिक लोगों फ्लैट्स तैयार करके दे दिए है । बाकी लोगों को भी निर्धारित समय में फ्लैट देने के लिए प्रतिबद्ध है ।

ट्विन टावर के दोनों टावर के बीच कम थी दूरी

दो मार्च 2012 को टावर 16 और 17 के लिए एफआर में फिर बदलाव किया । इस संशोधन के बाद इन दोनों टावर को 40 मंजिल तक करने की अनुमति मिल गई । इसकी ऊंचाई 121 मीटर तय की गई । दोनों टावर के बीच की दूरी महज नौ मीटर रखी गई । जबकि, नियम के मुताबिक दो टावरों के बीच की ये दूरी कम से कम 16 मीटर होनी चाहिए ।

कौन है ट्विन टावर का मालिक ? 

ट्विन टावर सुपरटेक कंपनी ने बनाया था । सुपरटेक कंपनी के मालिक का नाम आरके अरोड़ा है । आरके अरोड़ा ने 34 कंपनियां खड़ी की है । ये कंपनियां सिविल एविएशन, कंसलटेंसी, ब्रोकिंग, प्रिंटिंग, फिल्म्स, हाउसिंग फाइनेंस, कंस्ट्रक्शन तक के काम करती है । यही नहीं, मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो आरके अरोड़ा ने तो कब्रगाह बनाने तक की कंपनी भी खोली है ।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, आरके अरोड़ा ने अपने कुछ साथियों के साथ मिलकर सात दिसंबर 1995 को इस कंपनी की शुरुआत की थी । कंपनी ने नोएडा, ग्रेटर नोएडा, यमुना विकास प्राधिकरण क्षेत्र, मेरठ, दिल्ली-एनसीआर समेत देशभर के करीब 12 शहरों में रियल स्टेट के प्रोजेक्ट लॉन्च किए । देखते ही देखते अरोड़ा ने रियल स्टेट में अपना नाम बना लिया । इसके बाद अरोड़ा ने एक के बाद एक 34 कंपनियां खोली । ये सभी अलग-अलग कामों के लिए थी ।

सुपरटेक लिमिटेड शुरू करने के चार साल बाद 1999 में उनकी पत्नी संगीता अरोड़ा ने सुपरटेक बिल्डर्स एंड प्रमोटर्स प्राइवेट लिमिटेड नाम से कंपनी खोली थी । इसके अलावा आरके अरोड़ा ने अपने बेटे मोहित अरोड़ा के साथ मिलकर पॉवर जेनरेशन, डिस्ट्रीब्यूशन और बिलिंग सेक्टर में भी काम शुरू किया । इसके लिए सुपरटेक एनर्जी एंड पॉवर प्राइवेट लिमिटेड नाम की कंपनी बनाई ।

ट्विन टावर

 

32 मंजिल की ट्विन टावर इमारत की कहानी ?

इस इमारत कहानी 23 नंवबर 2004 से शुरू होती है । जब नोएडा अथॉरिटी ने सेक्टर-93ए स्थित प्लॉट नंबर-4 को एमराल्ड कोर्ट के लिए आवंटित किया । आवंटन के साथ ग्राउंड फ्लोर समेत 9 मंजिल तक मकान बनाने की अनुमति मिली । दो साल बाद 29 दिसंबर 2006 को अनुमति में संशोधन कर दिया गया । नोएडा अथॉरिटी ने संसोधन करके सुपरटेक को नौ की जगह 11 मंजिल तक फ्लैट बनाने की अनुमति दे दी ।

इसके बाद अथॉरिटी ने टावर बनने की संख्या में भी इजाफा कर दिया । पहले 14 टावर बनने थे, जिन्हें बढ़ाकर पहले 15 फिर इन्हें 16 कर दिया गया । साल 2009 में इसमें फिर से इजाफा किया गया। 26 नवंबर 2009 को नोएडा अथॉरिटी ने फिर से 17 टावर बनाने का नक्शा पास कर दिया ।

 

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