आश्रम बेव सीरीज का पहला और दूसरा जितना रोमांचक और रोजक था , वहीं तीसरा सीजन आते-आते यह वेब सीरीज कुछ ज्यादा खास नहीं कर पाई । दरअसल आश्रम वेब सीरीज के तीसरे सीजन में कहानी का केंद्र भटक सा गया और इस सीजन से आश्रम का कांसेप्ट ही पूरी तरीके से गायब हो गया । आश्रम वेब सीरीज के तीसरे सीजन में कोई भी ऐसा डायलॉग नहीं रहा जो दर्शकों पर प्रभाव डाल सके जैसे कि पिछले सीजन में था । पिछले सीजन में ना भूलने वाला डायलॉग था ” जपनाम ” वही इस सीजन में दर्शकों को ऐसा ना कोई डायलॉग देखने को मिला ना ऐसा प्रभाव उन पर डालते हुए देखा गया ।

 

यह है “एक बदनाम आश्रम-3 ” की कहानी-

आश्रम वेब सीरीज के तीसरे सीजन की शुरुआत वहीं से होती है जहां इस सीजन 2 खत्म हुआ था । पम्मी पहलवान बाबा निराला से बदला लेना चाहती है , लेकिन अपनी जान बचाने के लिए यहां वहां भी भागती है । इसके लिए वह अपने साथी के साथ अनजान शहरों में छीपते दिखाई नहीं है । वही पम्मी पहलवान की खोज में भी बाबा निराला अपनी सारी तक झोंक देता है । लेकिन इस सीन को 2 एपिसोड तक खींचा गया है , जो बेहद ही बोरिंग और अनइंटरेस्टिंग हो गया है । आश्रम का सीजन 3 बहुत ही धीरे-धीरे स्लो मोशन में दिखाई दिया है । इस सीरीज में 5 एपिसोड ऐसी दिखाए गए हैं जैसे की पुरानी दाल में बार-बार तड़का लगाया गया हो , लेकिन दर्शकों को नहीं डाल नहीं परोसी गई है ।इसी बीच सोनिया (ईशा गुप्ता) का पदार्पण होता है, सोनिया सीएम हुकुम सिंह की लंदन बेस्ड फ्रेंड है, जो कि बाबा के साथ एक डील करती है । वह बाबा को एक सपना बेचती है, जिसमें बाबा निराला स्वर्ग भूमि बनाने की कल्पना करता है । सोनिया बाबा को भगवान होने का अहसास कराती है, इसके बाद निराला अपने स्वप्न लोग में स्वर्ग भूमि बनाने की कल्पना करता है । सोनिया बाबा को भगवान होने का अहसास कराती है, इसके बाद निराला अपने स्वप्न लोग में स्वर्ग लोक की कल्पना करने लगता है , जहां वह एक ऐसी दुनिया बसा है जो उसके इशारे पर चले । इस सीजन में ड्रग्स के ऐंगल को भी जोड़ा गया है । इस सीजन में भी अभिनेत्री बॉबी देओल अपने किरदार को बखूबी से निभाती दिखाई दिए है । वहीं इस बेव सीरीज की महत्वपूर्ण कड़ी है भोपा स्वामी । बाबा निराला के हर षड्यंत्र को किस तरह से अंजाम देना है ये भोपा स्वामी का खुराफाती दिमाग ही प्लान करता है । ईशा गुप्ता इस सीजन में कुछ नयापन लेकर आई है । उन पर एक गाना भी फिल्माया गया है । वह अपने फायदे के लिए बाबा के साथ एक प्रोजेक्ट डील करती है, लेकिन जब उन जब उनके दोस्त हुकुम सिंह की सरकार पर बात आती है तो वह अपने दोस्त की तरफदारी करती है । वहीं मुख्यमंत्री हुकुम सिंह का किरदार कहीं-कहीं भटका हुआ लगता है । सीजन-1 और सीजन-2 की तरह इस बार रोचकता की कमी नजर आ रही है । कई मर्तबे महसूस हो जाएगा कि कहानी में मसाले की कमी रह गई है ।” एक बदनाम आश्रम-3 ” के निर्माता-निर्देशक प्रकाश झा है । नयेपन के अभाव के चलते लंबे-लंब 10 एपिसोड देखना थोड़ी परेशानी भरा लग सकता है । पूरी कहानी में पम्मी पहलवान अपने दोस्त के साथ भटकती रहती है । अपनी बात पहुंचाने के लिए वह जितने हथकंडे अपनाती है वह बहुत ही उबाऊ है ।

 

आश्रम सीजन 3 का रीव्यू-

” एक बदनाम आश्रम ” के एपीसोड काफी लंबे लंबे हैं और इसके दृश्य देखकर यूं भी लगता है कि जैसे प्रकाश झा ने ” एक्शन ” बोलने के बाद थोड़ा बहुत काम और भी निपटा लिया और फिर लौटकर आकर ” कट” बोल दिया । सीन चलते जाते हैं, चलते जाते हैं, गनीमत है कि ओटीटी पर फास्ट फॉरवर्ड का ऑप्शन भी मौजूद है । चूंकि सीरीज का कप्तान यानी इसका निर्देशक ही अपनी पकड़ सीरीज पर से खो चुका है लिहाजा बाकी तकनीकी टीम को दोष देना भी ठीक नहीं । सीरीज बहुत बोरिंग है । इस पर अपना समय ना ही नष्ट करें तो बेहतर ।आश्रम सीरीज का नाम तीसरे सीजन में बदलकर उन्होंने ” एक बदनाम आश्रम ” कर दिया है । इसके 10 एपीसोड देखना अपने आप में किसी चुनौती से कम नहीं है । और यह देखने के बाद समझ ही नहीं आता कि ये वही प्रकाश झा है , जिन्होंने कभी सर्वश्रेष्ठ पटकथा का राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार भी जीता । वेब सीरीज ” एक बदनाम आश्रम ” को 10 एपीसोड तक देखने की ललक कहें या कि मजबूरी सिर्फ इसके दो प्रमुख कलाकारों बॉबी देओल और चंदन रॉय सान्याल की वजह से बनी रहती है । एक कमजोर कहानी पर लिखी लचर पटकथा में दोनों अपनी तरफ से पूरी जान डालने की कोशिश करते दिखते है । अभिनेता बॉबी देओल का यह रूप पहले सीजन से चौंकाता रहा है । एक भ्रष्ट, धूर्त, सत्तालोलुप और कामातुर बाबा के किरदार ने ही बॉबी देओल की अभिनय क्षमता से दुनिया को परिचित कराया । लोगों ने इसे समझा भी लेकिन उनके इस रंग रूप के मुफीद कहानियां उन तक अभी और पहुंचनी जरूरी है । ” क्लास ऑफ 83 ” में जो कुछ उन्होंने कमाया था वह सब वह” ‌” लव हॉस्टल ” में गंवा चुके है ।नयेपन के अभाव के चलते लंबे-लंब 10 एपिसोड देखना थोड़ी परेशानी भरा लग सकता है । पूरी कहानी में पम्मी पहलवान अपने दोस्त के साथ भटकती रहती है । अपनी बात पहुंचाने के लिए वह जितने हथकंडे अपनाती है वह बहुत ही उबाऊ है । बाबा निराला के बराबर दमखम वाला किरदार भोपा स्वामी भी इस कहानी में शुरू से रहा है, ये किरदार निभा रहे चंदन रॉय सान्याल तीसरे सीजन में अपनी ऊर्जा और अपने अभिनय की खनक के चलते तमाम दृश्यों में बॉबी पर भारी पड़ते दिखते है ।

 

बता दें कि ” एक बदनाम आश्रम-3 ” के निर्माता-निर्देशक प्रकाश झा है । कहानी को हबीब फैसल, माधवी भट्ट, अविनाश कुमार और संजय मासूम ने लिखा है‌ । हालांकि इस कड़ी में कई सीन जो बोझिल है । इसमें आश्रम का सेट बदला गया है और पिछले सीजंस की तरह भव्यता दिखाने की कोशिश की गई है ।

 

 

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