अभी पूरी दुनिया कोरोना वायरस के संक्रमण से जूझ ही रही थी , इसी बीच एक नए वायरस ने दस्तक दे दी है । इस वायरस का नाम मंकीपॉक्स वायरस है । विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार यह वायरस 12 देशों में करीबन 100 से अधिक संक्रमण के मामले दर्ज हो चुके है । तो चलिए जानते हैं कि इस नए वायरस का लक्षण क्या है, इस से कैसे बचाव करें और यह भी जानेंगे कि क्या कोरोना वायरस से ज्यादा खतरनाक है या नहीं ।

 

साल 2020 से ही दुनिया भर में हर एक व्यक्ति कोरोना वायरस की महामारी से जूझ रहा है । कोरोना वायरस महामारी का प्रकोप अभी भी नहीं थमा है , अभी भी दुनिया में कई ऐसे देश हैं जो इस महामारी से जूझ ही रहे हैं । इसी बीच विश्व स्वास्थ्य संगठन ने एक नए वायरस को लेकर चेतावनी जारी कर दी है । इस नए वायरस का नाम मंकीपॉक्स वायरस है , यह वायरस ज्यादातर अमेरिका और यूरोप में देखे जा रहे है ।दुनियाभर में इसके 100 से ज़्यादा मामले सामने आ चुके है । विश्व स्वास्थ्य संगठन ने भी इस बीमारी को हल्के में न लेने की चेतावनी दी है । दुनियाभर में जिस तरह मंकीपॉक्स के बढ़ते मामले देखे जा रहे है , कुछ देशों ने इसके लिए सख्त कदम उठाने शुरू कर दिए है । हाल ही में, ब्रिटेन के स्वास्थ्य अधिकारियों ने देश में पश्चिम अफ्रीकी वेरिएंट के मामलों में स्पाइक के बारे में चिंता जताई है । यूनाइटेड किंगडम हेल्थ सिक्योरिटी एजेंसी ने लोगों को मंकीपॉक्स के विकास के उच्च जोखिम वाले लोगों या संक्रमित लोगों के निकट संपर्क में आने वालों को 21 दिनों के लिए खुद से आइसोलेशन करने की सलाह दी है ।

 

क्या है मंकीपॉक्स वायरस ?

मंकीपॉक्स पॉक्सविरिडे परिवार में ऑर्थोपॉक्सवायरस जीनस से जुड़ा है । मंकीपॉक्स, आमतौर पर मध्य और पश्चिम अफ्रीका में जंगली जानवरों के बीच फैलने और प्रसारित होने वाली बीमारी है । यह मनुष्यों में तब फैलती है जब वे संक्रमित जानवरों के संपर्क में आते है । इसके अलावा, कोविड-19 में आरएनऐ नामक आनुवंशिक सामग्री का सिंगल स्ट्रेन्ड होता है । वहीं, मंकीपॉक्स वायरस डीएनए में दोहरे-असहाय आनुवंशिक कोड को वहन करता है ।

 

कैसे फैलता है मंकीपॉक्स वायरस ?

इस बीमारी का नाम मंकीपॉक्स साल 1958 में रखा गया था ।जब इस वायरस का बंदरों की एक कॉलोनी में पता चला था , जिसका उपयोग रिसर्च के लिए किया जाता था । मंकीपॉक्स वायरस एक ऐसी बीमारी है , जो जानवरों से इंसानों में फैलती है और इंसान से इंसान में भी फैल सकती है । डब्ल्यूएचओ के अनुसार, मानव-से-मानव में फैल सकता है इसलिए इसके लक्षणों को देखते हुए 21 दिनों में मरीज के संपर्क में आए लोगों की तुरंत पहचान कर उन्हें आइसोलेट करना होगा । आइसोलेशन तब तक खत्म नहीं किया जा सकता जब तक कि संदिग्ध मरीजों के सभी घाव ठीक नहीं हो जाते और त्वचा की एक नई परत नहीं बन जाती और तब तक उसे क्वारंटाइन किया जाना चाहिए । यह मनुष्यों में भी हो सकता है और फिर दूसरे लोगों में भी फैल सकता है । विश्व स्वास्थ्य संगठन बताता है कि शारीरिक तरल पदार्थ, त्वचा पर घाव, या मुंह या गले में श्लेष्मा सतहों के साथ निकट संपर्क के माध्यम से यह एक व्यक्ति से दूसरे में फैल सकता है ।

 

क्या कोरोनावायरस से खतरनाक है मंकीपॉक्स वायरस ?

बेल्जियम ने मंकीपॉक्स के मरीजों के लिए 21 दिन का अनिवार्य क्वारंटाइन भी शुरू किया है । हालांकि, इस तरह के पागलपन के बीच ओटागो विश्वविद्यालय के जैव रसायन के प्रोफेसर कर्ट क्रूस ने कहा है कि मंकीपॉक्स वायरस कोरोना से कम खतरनाक है, हालांकि इसकी मृत्यु दर अधिक है । उन्होंने एक इंटरव्यू में बताया कि मंकीपॉक्स गंभीर हो सकता है, लेकिन इस वक्त इससे कुछ लोग ही संक्रमित हुए है । यह वायरस तेज़ी से एक से दूसरे व्यक्ति को संक्रमित नहीं करता, इसलिए यह जल्द ख़त्म हो सकता है ।

 

मंकीपॉक्स वायरस के ये है लक्षण

जैसा कि कोविड-19 लक्षणों में बुखार, गले में ख़राश, खांसी, थकान, नाक बहना, जोड़ों में दर्द, सिरदर्द, सांस लेने में तकलीफ, सीने में दर्द, गंध और स्वाद की कमी और जठरांत्र संबंधी समस्याएं शामिल है । वहीं, मंकीपॉक्स के लक्षण स्मॉल पॉक्स की तरह के ही है । विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक, इसमें सिर दर्द, बुखार, ठंड लगना, गले में खराश, बेचैनी, थकावट, रैश और लिम्फैडेनोपैथी आम लक्षण है ।

 

क्या मंकीपॉक्स वायरस का भी वैक्सीन उपलब्ध है?

कोविड-19 वैक्सीन और वैक्सीनेशन प्रोग्राम बहुत तेज़ी से दुनिया भर में चल रहा है । इसी तरह मंकीपॉक्स के मामले में सभी को मालूम होना चाहिए कि इस बीमारी से बचाव के लिए किसी तरह की वैक्सीन उपलब्ध है या नहीं । सीडीसी के मुताबिक, मंकीपॉक्स का कोई इलाज नहीं है , लेकिन क्योंकि मंकीपॉक्स वायरस स्मॉलपॉक्स से संबंधित है , तो ऐसे में स्मॉलपॉक्स वैक्सीन, एंटीवायरल और वैक्सीना इम्यून ग्लोबिन लोगों को मंकीपॉक्स से संक्रमित होने से बचा सकती है ।

 

चिकन पॉक्स की तरह का वायरस है मंकीपॉक्स वायरस

चिकन पॉक्स की तरह का ही वायरस मंकी वायरस है । लेकिन मंकी वायरस में अलग तरीके का संक्रमण पाया जाता है । ये वायरस साल‌ 1958 मे कैद हुए एक बंदर में पाया गया था , जिसके चलते हैं इस वायरस को मंकीपॉक्स वायरस के नाम से जाना गया । साल 1970 में यह वायरस सबसे पहले इंसानों में पाया गया । इस बीमारी में शरीर में बड़े-बड़े दाने निकल आते हैं इसके साथ ही बुखार, सर दर्द होना , कमजोरी और मांस पेशियों में दर्द होना लिम्फ नोज में सूजन आना आदि जैसी समस्याएं देखी जाती हैं ।

 

क्या भारत में भी है मंकीपॉक्स वायरस ?

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की मानें तो भारत में मंकीपॉक्सका कोई मामला सामने नहीं आया है , लेकिन अन्य देशों में फैल रहे मामलों को देखते हुए विभाग ने राज्यों को सतर्क रहने को कहा है । मंत्रायल के सख्त निर्देश दिए है कि पिछले 21 दिनों में प्रभावित देशों की यात्रा करने वाले सभी संदिग्ध लोगों पर कड़ी नजर रखी जाएगी । इन संदिग्ध मरीजों की जानकारी स्थानीय जिला कार्यालय से तत्काल स्वास्थ्य विभाग को उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए है । इसके अलावा महाराष्ट्र के स्वास्थ्य विभाग ने भी मंकीपॉक्स को लेकर एडवाइजरी जारी की है । यहां के स्वास्थ्य मंत्रालय ने चेतावनी दी है कि आने वाले दिनों में हमारे यहां भी ये मामले आ सकते है । इसलिए जरूरी है कि हम सतर्क रहें और राज्य में किसी भी व्यक्ति में मंकीपॉक्स के मामले नज़र आए तो इस पर खास ध्यान दें । इसके अलावा राज्य में आइसोलेशन वार्ड तैयार करने को भी कहा गया है ।

 

ऐसे करें मंकीपॉक्स वायरस से बचाव –

  • मंकीपॉक्स वायरस से बचाव के लिए संक्रमित लोगों और जानवरों से दूर रहना चाहिए ।
  • इस वायरस से बचाव के लिए संक्रमित लोगों के सामान के संपर्क में आने से बचना चाहिए ।
  • इस वायरस से बचाव के लिए अपने हाथों को साबुन से अच्छे से धोना चाहिए और एक अच्छी हाइजीन मेंटेन करनी चाहिए ।
  • इस वायरस से बचाव के लिए खाना ख़ासकर नॉनवेज अच्छे से पका कर खाना चाहिए ।

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