भारत के पूर्व ओपनर और सबसे विस्फोटक बल्लेबाज वीरेंद्र सहवाग की बल्लेबाजी के सभी फैन है, यहां तक की बड़े बड़े दिग्गज उनकी बल्लेबाजी की तारीफ करते रहते है। ऐसा नहीं है की सहवाग सिर्फ टी 20 में तेज पारी खेलते थे बल्कि क्रिकेट के तीनों फॉर्मेट में वो लगभग एक सी ही बैटिंग करते थे। वो टेस्ट भी वनडे की तरह ही खेलते थे तभी तो दुनिया का कोई भी गेंदबाज क्यों न हो,अगर सहवाग उनके सामने है तो उसका डरता तय था। वीरेंद्र सहवाग जब अपने कैरियर के पीक पर चल रहे थे तब वो दुनिया का कितना भी बड़ा गेंदबाज क्यों न हो वो उसकी लाइन और लेंथ बिगाड़ देते थे यही वजह रही है की सहवाग से हर एक गेंदबाज डरता था। लेकिन आप जान कर चौक जायेंगे की सहवाग के कैरियर में एक ऐसा समय भी आया था जब खुद सहवाग ने 2011 वर्ल्ड कप के पहले ही सन्यास लेने का निर्णय ले लिया था। दुनिया का सबसे खतरनाक बैटर भी उस समय से जूझा है जिस से सचिन जैसे बड़े खिलाड़ी भी जूझे है। हर खिलाड़ी के कैरियर में एक दिन ऐसा आता है जब वो ऐसा सोचता है। लेकिन सहवाग का कारण धोनी थे क्योंकि उस समय ऑस्ट्रेलिया दौरे (2008) में सहवाग पूरी तरह से परेशान हो गए थे और उन्होंने उसी परेशानी के वजह से संन्यास के बारे में भी सोच लिया था। आपको बता दे कि उस दौरे पर सहवाग को वनडे के प्लेइंग इलेवन से धोनी ने ड्रॉप कर दिया था। जिसके बाद वीरेंद्र सहवाग धोनी से नाराज होकर संन्यास लेना चाहते थे। और इन सारी बातों का खुलासा खुद वीरेंद्र सहवाग ने किया है।

 

सहवाग का ये सारा बयान एक क्रिकबज शो ‘मैच पार्टी’ पर दिया गया है, सहवाग कहते है कि ‘2008 में जब हम ऑस्ट्रेलिया में थे तो मेरे दिमाग में एक विचार आया और वो विचार रिटायरमेंट का था क्योंकि उस समय मैंने टेस्ट सीरीज में वापसी की थी और 150 रन बनाए थे जो अच्छा था लेकिन वनडे में मैं पूरी तरह से असफल रहा और मेरे से रन नही बना, इसलिए एमएस धोनी ने मुझे प्लेइंग इलेवन से बाहर कर दिया तब मेरे दिमाग में एकदिवसीय क्रिकेट छोड़ने का विचार आया था। मैंने सोचा कि मैं केवल टेस्ट क्रिकेट खेलना जारी रखूंगा।

 

‘सहवाग आगे बताते है कि तब मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर ने उन्हें सन्यास से रोका था। सचिन ने सहवाग से कहा था कि यह करियर का बुरा दौर है और तुम बस रुको। घर जोओ और आराम से सोचो की आगे क्या करना है। आपको बता दे कि सहवाग ने उस ट्राई सीरीज में चार मैचों में 6, 33, 11 और 14 रन बनाए थे, जिसके बाद इस खिलाड़ी को प्लेइंग इलेवन से बाहर कर दिया गया था। जब उन्हें बाहर किया गया तब वो धोनी से नाराज होकर सन्यास का मन बना चुके थे लेकिन सचिन तेंदुलकर ने उन्हें इस निर्णय पर सोचने को कहा जिसे सहवाग ने सोचा और बाद में उन्होंने सन्यास नही लिया।

 

इस से पहले भी कैरियर बचाने को लेकर दे चुके है बयान

 

वीरेंद्र सहवाग आय दिन कुछ न कुछ बयान आ रहा है, अभी हाल में ही उन्होंने शोएब अख्तर पर बयान देकर शुर्खिया बटोरी थी और अब उन्होंने अपने करियर को बचाने के लिए दो खिलाड़ियों का नाम लिया है, दोनो ही खिलाड़ी भारत के सबसे बेहतरीन स्पिनर रह चुके है। सहवाग अपनी बातों को बेबाकी से रखते है, और उन्होंने वही बेबाकी आज भी दिखाई है। वीरेंद्र सहवाग ने ऑस्ट्रेलिया दौरे को लेकर बहुत बड़ा खुलासा किया है। उन्होंने भारत के टेस्ट टीम के पूर्व कप्तान अनिल कुंबले की भूमिका का खुलासा करते हुए कहा है कि अनिल कुंबले ही थे जिन्होंने उनके कैरियर को वापस से पटरी पर लाया था,और पूरा श्रेय अनिल कुंबले को ही जाता है। उस समय वीरेंद्र सहवाग खराब फॉर्म से जूझ रहे थे और लगभग 50 के औसत होने के बावजूद इस खिलाड़ी को भारतीय टेस्ट टीम से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया था। सहवाग जनवरी 2007 में अपना 52वां टेस्ट खेलने के बाद सहवाग ने 2008 में ऑस्ट्रेलिया में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ अपना 53वां टेस्ट खेला था।

 

सहवाग ने एक इंटरव्यू में बातचीत के दौरान ये बताया कि, ‘अचानक, मुझे एहसास हुआ कि मैं टेस्ट टीम से बाहर हो रहा हूं, इससे मुझे दुख हुआ।’ उन्होंने आगे कहा, ‘मैं 10,000 से अधिक टेस्ट रन बनाता, अगर मुझे उस समय बाहर नहीं किया जाता।’ 2007-08 के ऑस्ट्रेलिया दौरे के लिए बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी के लिए जब सहवाग का नाम टेस्ट टीम में नही आया था तब कई लोगो को हैरानी हुई थी। लेकिन, कप्तान अनिल कुंबले जो हमेशा हौसला बढ़ाते थे सहवाग का वो उस समय पहले दो टेस्ट नहीं खेल पाए थे। ये भी सहवाग का निराशा का कारण बना था। पर्थ में तीसरे टेस्ट से पहले टीम ने अभ्यास मैच के लिए कैनबरा की यात्रा की। सहवाग आगे बताते है कि, उन्हे कंबले द्वारा ये कहा गया था की वो इस मैच में 50 रन बनाए और उन्हे निश्चित ही पर्थ में होने वाले टेस्ट मैच के लिए चुना जाएगा। सहवाग ने एसीटी इनविटेशन इलेवन के खिलाफ मैच में लंच से पहले शतक लगा दिया था जो उनके टीम में आने के लिए काफी था। लेकिन जैसा कि वादा किया गया था, सहवाग ने पर्थ में खेले, दोनों पारियों में शीर्ष पर अच्छी शुरुआत दी और दो विकेट लिए। लेकिन यह एडिलेड था जब उन्होंने अपने आगमन की घोषणा की। पहली पारी में 63 रन के बाद एडिलेड में दूसरी पारी में एक अस्वाभाविक लेकिन मैच बचाने वाली 151 रनों की पारी खेल डाली। जो उनका जगह टीम में सुनश्चित कर रहा था। सहवाग ने इंटरव्यू में आगे बातचीत के दौरान कहा कि, ‘वे 60 रन जो उन्होंने बनाया था वो उनके जीवन का सबसे कठिन 60 रन थे। उन्होंने कहा कि वो अनिल भाई के विश्वास पर खड़ा उतरना चाहते थे। वो नहीं चाहते थे कि कोई उन्हें ऑस्ट्रेलिया लाने के लिए अनिल कुंबले से सवाल करे।’ चौथी पारी में जो सहवाग ने बल्लेबाजी की वो वाकई में मास्टरक्लास था। शुरू में ही पार्टनर खोने के बाद भी सहवाग अपने अंदाज में बल्लेबाजी करते रहे और उन्होंने बेहतरीन 151 रन ठोक डाले। सहवाग ने अपने इस बेहतरीन पारी के बारे में बताते हुए कहा कि, ‘मैं स्ट्राइकर के छोर पर टिका हुआ था, दूसरे छोर पर मैंने अपने पसंदीदा गाने गुनगुनाते हुए अंपायर से बात की, जिससे मेरा दबाव खत्म हो गया।’ और मैं रन बनाता चला गया।

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