2022 का विधानसभा चुनाव नजदीक देखते हुए अचानक से सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव का अपने चाचा के प्रति प्यार उमड़ पड़ा और उनसे मिलने अचानक प्रसपा के अध्यक्ष शिवपाल सिंह यादव से मिलने उनके घर पहुंच गए। सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव आज लगभग 3:30 बजे अचानक से अपने चाचा शिवपाल के घर सारे गीले शिकवे दूर करने पहुंच गए और 45 मिनट चली बात चीत के बाद साथ में चुनाव लड़ने का ऐलान कर दिया।

इस खबर के बाद राजनैतिक गलियारों में हलचल मच गई है। 2022 के विधानसभा चुनाव में अखिलेश यादव किसी भी तरह का कसर नही छोड़ना चाहते इसलिए वो तमाम छोटी और बड़ी पार्टियों के साथ गठजोड़ करने के लिए लगातार प्रयासरत है। इसी क्रम में आज अचानक से अखिलेश यादव अपने चाचा से मिलने उनके घर पहुंचे जहां पर शिवपाल सिंह यादव का पूरा परिवार भी मौजूद था और लगभग 45 मिनट चले बात चीत के बाद ये बात निकल कर सामने आती है की चाचा और भतीजा दोनो साथ चुनाव लड़ने का फैसला किया है। ये 2017 के बाद पहली दफा था जब अखिलेश और शिवपाल सारे गीले -शिकवे छोड़ एक साथ सामने आएं। 2017 के चुनाव के ठीक पहले ही चाचा और भतीजे के बीच बात बिगड़ है थी और तब से चाचा शिवपाल नाराज चल रहे थे। और समाजवादी पार्टी से अलग होने के बाद शिवपाल ने प्रगतिशील समाजवादी पार्टी लोहिया का गठन 2018 में किया था। और ये पहली बार होगा जब शिवपाल 2022 के चुनाव में उतरने जा रहे है, इससे पहले वो लोकसभा का चुनाव अकेले लड़ चुके है।

2019 में शिवपाल को मिली करारी हार।

2018 में पार्टी का गठन करने के बाद 2019 में कुल 88 सीटों पर शिवपाल ने कैंडिडेट उतारे । उत्तर प्रदेश के दर्जनों सीट पर अपने प्रत्यासी उतारे लेकिन नतीजे करिश्माई नही आए और जमानत जब्त हो गई। मुश्किल से एक दो सीटें छोड़ कर कोई भी प्रत्यासी 10 हजार से भी अधिक वोट ना पा सका। ये जरूर है कि कुछ सीटों पर शिवपाल की पार्टी को अच्छे वोट मिले थे। लोकसभा चुनाव में फिरोजाबाद की सीट पर तो उन्होंने सपा कैंडीडेट अक्षय यादव को हरवा दिया था। शिवपाल की पार्टी ने यहां 91 हजार वोट हासिल किया था। सपा के अक्षय यादव भाजपा से 30 हजार वोटों से हारे थे। शिवपाल ने अपना कैंडीडेट न उतारा होता तो सपा चुनाव जीत जाती. फिरोजाबाद के अलावा PSPL के कैंडीडेट को लखनऊ की मोहनलालगंज सीट पर 8 हजार, उन्नाव में 6700, सुल्तानपुर में 11494, फर्रूखाबाद में 9701, इटावा में 8675, अलीगढ़ में 4953 जबकि हमीरपुर में 4247 वोट मिले थे।

मुख्यमंत्री बनने की थी चाह लेकिन पार्टी छोड़ जाना पड़ा|

सीएम बनना चाह रहे थे लेकिन मुलायम सिंह यादव ने अखिलेश यादव को सीएम बना दिया. हालांकि वे अखिलेश सरकार में मंत्री रहे लेकिन 2016 के आखिर में बात बहुत बिगड़ गई| शिवपाल ने सपा छोड़ दिया और खुद की प्रगतिशील समाजवादी पार्टी (लोहिया) बनाई| वे इटावा की जसवंतनगर सीट से विधायक हैं|

इससे पहले दोनो की तमाम कोशिशें की गई सुलह कराने की लेकिन बात कुछ बनी नही। समाजवादी पार्टी के कुछ वरिष्ठ नेताओं का कहना था की रामगोपाल यादव नही चाहते थे कि अखिलेश और शिवपाल एक हो। वह अपने बेटे अक्षय की हार को अभी तक भूल नहीं पाए हैं. जबकि मुलायम सिंह यादव लगातार चाह रहे हैं कि शिवपाल समाजवादी पार्टी के साथ चुनाव लड़ें।

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